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अल्ट्रा क्लीन कंपनी पर फिर उठे सवाल:कर्मचारियों ने खोला मोर्चा,बोले—'अब कोर्ट में देंगे गवाही,नहीं लुटने देंगे मेहनत की कमाई'
आउटसोर्स कर्मचारियों का बड़ा आरोप,वेतन कटौती और शोषण के खिलाफ जांच एजेंसियों के सामने गवाही देने को तैयार
जबलपुर।नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स एजेंसी अल्ट्रा क्लीन कंपनी एक बार फिर विवादों में है।इस बार कंपनी के खिलाफ आवाज किसी राजनीतिक दल या सामाजिक संगठन ने नहीं,बल्कि कंपनी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों ने उठाई है।कर्मचारियों का आरोप है कि उनसे पूरा काम लिया जाता है, लेकिन तय वेतन का पूरा भुगतान नहीं किया जाता।अब कर्मचारियों ने साफ कहा है कि यदि निष्पक्ष जांच होती है तो वे अदालत और जांच एजेंसियों के सामने सरकारी गवाह बनने के लिए तैयार हैं।'अब नहीं लुटने देंगे खून-पसीने की कमाई'
कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वे कथित वेतन कटौती और आर्थिक शोषण झेल रहे हैं।उनका आरोप है कि कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक द्वारा निर्धारित वेतन से कम भुगतान किया जा रहा है।
कर्मचारियों का दावा है कि अब वे अपने बैंक खाते,पासबुक और अन्य दस्तावेज भी जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करने को तैयार हैं।
'सरकारी गवाह बनेंगे,कोर्ट में भी देंगे बयान'
कई कर्मचारियों ने दावा किया कि यदि निष्पक्ष जांच शुरू होती है तो वे सरकारी गवाह बनने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय में भी गवाही देंगे।
उनका कहना है कि वे किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आएंगे और अपनी मेहनत की कमाई के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
नगर निगम प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने वेतन संबंधी शिकायतें कई बार नगर निगम अधिकारियों तक पहुंचाई,लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई।
इसी वजह से सवाल उठ रहे हैं कि यदि कंपनी के खिलाफ लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं,तो उसे दोबारा ठेका देने की चर्चा क्यों हो रही है।
धमकाने के भी लगाए आरोप
कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें चेतावनी दी जाती है कि यदि कंपनी से जुड़े दस्तावेज या जानकारी सार्वजनिक की गई,तो नौकरी से निकाल दिया जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मानव अधिकार आयोग और श्रम विभाग तक पहुंची शिकायतें
कर्मचारियों के अनुसार,इस पूरे मामले की शिकायत मानव अधिकार आयोग,श्रम आयुक्त कार्यालय और पीएफ आयुक्त कार्यालय तक भी की जा चुकी है।
उनका कहना है कि संबंधित एजेंसियों को निष्पक्ष जांच कर पूरे मामले के तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए,ताकि विवाद की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
पारदर्शी जांच की मांग तेज
अब निगाहें नगर निगम प्रशासन और संबंधित जांच एजेंसियों पर टिकी हैं।यदि कर्मचारियों के आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की मांग की जा रही है। वहीं यदि आरोप निराधार हैं,तो जांच के माध्यम से कंपनी और संबंधित अधिकारियों की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।
दर्जनभर कर्मचारी बोले—अब नहीं करेंगे समझौता
कर्मचारियों ने कहा कि वे अपने वेतन में किसी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे।उनका कहना है कि यदि उनकी मेहनत की कमाई में कटौती हुई है,तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ वे सरकारी गवाह बनने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
