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जी.एस.अर्थ वाणिज्य महाविद्यालय जबलपुर में महर्षि संदीपनि गुरु श्रद्धा पर्व का आयोजन,गुरुओं का हुआ सम्मान
जबलपुर।गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर जी.एस.अर्थ एवं वाणिज्य महाविद्यालय(स्वशासी),जबलपुर में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में"महर्षि संदीपनि गुरु श्रद्धा पर्व"हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया।कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा,भारतीय संस्कृति और गुरु के महत्व पर विस्तार से विचार रखे गए तथा महाविद्यालय के प्राध्यापकों का सम्मान किया गया।
"गुरु वो शक्ति हैं जो गिरकर संभलना सिखाते हैं"
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ.अमरेंद्र पाण्डेय ने कहा कि गुरु जीवन की वह शक्ति हैं जो कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
उन्होंने कहा,"गुरु वो शक्ति हैं जो गिरकर संभलना सिखाते हैं, मुश्किल राहों में भी आगे बढ़ना सिखाते हैं।उनके आशीर्वाद से जीवन में उजाला छाता है और सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।"
गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊंचा:डॉ.राधिका प्रसाद मिश्र
मुख्य वक्ता पंडित डॉ.राधिका प्रसाद मिश्र ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना गया है,क्योंकि गुरु ही ज्ञान देकर जीवन का सही मार्ग दिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल आध्यात्मिक गुरुओं का ही नहीं,बल्कि माता-पिता,शिक्षकों और उन सभी व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है,जिन्होंने जीवन में किसी भी रूप में मार्गदर्शन दिया है।
गुरुओं के आशीर्वाद से मिलता है आगे बढ़ने का संबल
महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ.शिव कुमार व्यास ने कहा कि गुरु पूर्णिमा हमें अपने गुरुओं के प्रति सम्मान,श्रद्धा और आभार व्यक्त करने की प्रेरणा देती है तथा उनके आशीर्वाद से जीवन में सफलता प्राप्त होती है।
गुरु पूर्णिमा के महत्व पर डाला प्रकाश
कार्यक्रम की शुरुआत भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के प्रभारी डॉ.नीरज कुमार केशरवानी ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए की।
इस अवसर पर डॉ.ज्ञानेन्द्र त्रिपाठी(उप प्राचार्य)एवं डॉ.डी.बी. कोष्ठ(वाणिज्य अधिष्ठाता)ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
विद्यार्थियों ने किया शिक्षकों का सम्मान
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने महाविद्यालय के सभी प्राध्यापकों का शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया। समारोह में महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ.सुनीता उपाध्याय ने किया।
