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हत्याकांड के मुख्य आरोपी डॉक्टर अमित खरे पर प्रशासन का बड़ा एक्शन,स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल सील,लाइसेंस निरस्त
पांच युवकों की मौत के आरोपी डॉक्टर अमित खरे के अस्पताल पर छापा,भर्ती मरीज मेडिकल कॉलेज शिफ्ट
जबलपुर।नरसिंहपुर जिले के सुवातला में पांच युवकों की दर्दनाक मौत के मामले में मुख्य आरोपी डॉक्टर अमित खरे के खिलाफ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है।कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देश पर जबलपुर स्थित स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल को सील कर दिया गया।कार्रवाई के दौरान अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों में हड़कंप मच गया और सूचना मिलते ही कई कर्मचारी परिसर से बाहर निकल गए।क्या है पूरा मामला?
19 जुलाई को नरसिंहपुर जिले के सुआतला थाना क्षेत्र के इंद्रनगर के पास तेज रफ्तार हाइवा की चपेट में आने से पांच युवकों की मौत हो गई थी। इस मामले में डॉक्टर अमित खरे को मुख्य आरोपी बनाया गया है और पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर चुकी है।
इसी प्रकरण के बाद जिला प्रशासन ने डॉक्टर अमित खरे से जुड़े अस्पताल के संचालन की जांच शुरू की।
स्वास्थ्य विभाग,राजस्व और नगर निगम की संयुक्त कार्रवाई
लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर रविवार को स्वास्थ्य विभाग,राजस्व विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीम ने स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल पर औचक निरीक्षण किया।
सीएमएचओ डॉ.नवीन कोठारी के नेतृत्व में हुई जांच के दौरान अस्पताल के संचालन में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया।
जांच में सामने आईं ये प्रमुख अनियमितताएं
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों के अनुसार—
•अस्पताल में कोई योग्य रेजिडेंट या विजिटिंग डॉक्टर मौजूद नहीं मिला।
•फोन करने के बाद भी कोई डॉक्टर मौके पर नहीं पहुंचा।
•बिना मान्यता के पैथोलॉजी लैब संचालित होने का मामला सामने आया।
•अवैध रूप से फार्मेसी संचालित किए जाने की बात भी जांच में सामने आई।
•फायर एनओसी और भवन निर्माण संबंधी वैध अनुमति उपलब्ध नहीं पाई गई।
भर्ती मरीजों को मेडिकल कॉलेज भेजा गया
कार्रवाई के समय अस्पताल में लगभग 8 मरीज भर्ती मिले। प्रशासन ने तत्काल 108 एम्बुलेंस की व्यवस्था कर सभी मरीजों को सुरक्षित रूप से मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शिफ्ट कराया,ताकि उपचार प्रभावित न हो।
अस्पताल सील,लाइसेंस निरस्त
सीएमएचओ डॉ.नवीन कोठारी के अनुसार,अस्पताल का लाइसेंस निरस्त कर भवन को सील कर दिया गया है। अस्पताल के खिलाफ पंचनामा तैयार किया गया है तथा चिकित्सा संबंधी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है।
प्रबंधन को आवश्यक वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है।आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों के परीक्षण के आधार पर की जाएगी।
प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजर
पांच युवकों की मौत के मामले के बाद हुई इस कार्रवाई को प्रशासन की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।अब आगे यह देखा जाएगा कि जांच पूरी होने के बाद संबंधित संस्थान और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ क्या अतिरिक्त कानूनी कदम उठाए जाते हैं।
