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जबलपुर में बीमारियों का विस्फोट!मौसम की मार से अस्पतालों में मची अफरा-तफरी,मरीजों के लिए पलंग तक नहीं
राहत की बारिश के बाद उमस का कहर,उल्टी-दस्त, पीलिया और वायरल संक्रमण ने बढ़ाई चिंता
विशेष रिपोर्ट अमित तिवारी
जबलपुर।कभी तेज बारिश,कभी चिलचिलाती उमस और कभी अचानक तापमान में गिरावट—शहर का लगातार बदलता मौसम अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगा है।हालात ऐसे बन गए हैं कि सरकारी और निजी अस्पताल मरीजों से खचाखच भर चुके हैं।अस्पतालों में सुबह से लेकर देर शाम तक लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं और कई मरीजों को भर्ती होने के लिए पलंग तक नहीं मिल पा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की यह अनिश्चितता आने वाले दिनों में और बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है।शहर में उल्टी-दस्त,पीलिया,वायरल फीवर,खांसी-जुकाम, डिहाइड्रेशन और ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे,बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग हो रहे हैं।
अस्पतालों में मरीजों का सैलाब,स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
जबलपुर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में इन दिनों हालात सामान्य नहीं हैं।विक्टोरिया अस्पताल में जहां सामान्य दिनों में प्रतिदिन 500 से 700 मरीज ओपीडी में पहुंचते थे,वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग 1200 से 1300 तक पहुंच गई है।इसी तरह नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी ओपीडी का आंकड़ा लगभग 2200 से 2400 मरीज प्रतिदिन तक पहुंच गया है।
मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों पर भी दबाव बढ़ गया है।कई वार्डों में बेड फुल होने की स्थिति बन रही है, जिससे गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उमस और दूषित खानपान बना बीमारी का सबसे बड़ा कारण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में नमी और उमस बढ़ने से बैक्टीरिया एवं वायरस तेजी से सक्रिय हो जाते हैं।इसके साथ ही सड़क किनारे बिकने वाले खाद्य पदार्थ, दूषित पानी और अस्वच्छ खानपान बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं।
शहर के विभिन्न क्षेत्रों से लगातार उल्टी-दस्त और पेट संबंधी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं।कई मरीज डिहाइड्रेशन की गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंच रहे हैं।डॉक्टरों का कहना है कि लोग मौसम को हल्के में ले रहे हैं,जिसका परिणाम गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में सामने आ रहा है।
पीलिया और वायरल संक्रमण ने बढ़ाई मुश्किलें
बारिश के मौसम में जलजनित बीमारियां भी तेजी से फैल रही हैं।शहर के कई इलाकों में पीलिया के मरीजों की संख्या बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं।इसके अलावा वायरल बुखार, गले में संक्रमण और लगातार खांसी-जुकाम के मरीज भी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को इस समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। थोड़ी सी लापरवाही लंबे उपचार और अस्पताल के चक्कर का कारण बन सकती है।
निजी अस्पताल और क्लीनिक भी मरीजों से हुए फुल
स्थिति केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं है। निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों में भी मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की जा रही है।कई चिकित्सकों के अनुसार पिछले कुछ सप्ताह में मौसमी बीमारियों के मामलों में लगभग दोगुनी वृद्धि हुई है।
सुबह से ही क्लीनिकों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बन गया है।
बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा खतरा
डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है।ऐसे में बदलता मौसम उनके लिए अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों को बारिश में भीगने से बचाएं,साफ पानी पिलाएं और बाहर के खाद्य पदार्थों से दूर रखें।वहीं बुजुर्गों को नियमित दवाएं लेने और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी:अभी नहीं संभले तो हालात हो सकते हैं और गंभीर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।उनका कहना है कि यदि मौसम का यही मिजाज बना रहा और लोगों ने सावधानी नहीं बरती, तो आने वाले दिनों में बीमारियों का ग्राफ और तेजी से बढ़ सकता है।
डॉक्टरों ने लोगों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने,स्वच्छ भोजन करने, बाहर के खुले खाद्य पदार्थों से बचने और किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है।
कागजों में मजबूत लेकिन बैसाखी पर नजर आई जबलपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था
जबलपुर में बदलते मौसम ने स्वास्थ्य संकट की स्थिति पैदा कर दी है।अस्पतालों में बढ़ती भीड़,मरीजों को नहीं मिल रहे पलंग, उल्टी-दस्त और पीलिया जैसी बीमारियों का बढ़ता प्रकोप यह संकेत दे रहा है कि मौसम की मार अब आम लोगों की सेहत पर गंभीर असर डाल रही है।वहीं दूसरी और स्वास्थ्य महक में द्वारा किए गए बड़े-बड़े वादे और दावे जमीनी स्तर पर धूल चटते नजर आ रहे हैं।आलम है कि कागजों में जिला अस्पताल एवं मेडिकल काफी चाक-चौबंद स्वास्थ्य व्यवस्था से लवरेज नजर आता है लेकिन हकीकत में स्वास्थ्य विभाग के शरण में आए मरीज दर्द की गोली तो क्या बैठने की जगह तक को तरस रहे हैं।
