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भवन शाखा से हटे कर्मचारी को अतिक्रमण शाखा में मिली नई तैनाती?अल्ट्रा क्लीन कंपनी पर उठे गंभीर सवाल
पूर्व कार्रवाई के बावजूद गणेश कनौजिया की दूसरी शाखा में पदस्थापना के आरोप,आउटसोर्स व्यवस्था की पारदर्शिता पर बहस तेज
भवन शाखा से हटाने के बाद दूसरी शाखा में तैनाती के आरोप
जानकारी के अनुसार,गणेश कनौजिया नगर निगम की भवन शाखा में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत थे।आरोप है कि कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के बाद तत्कालीन अपर आयुक्त विद्यानंद बाजपेयी ने उन्हें उस शाखा से हटाने की कार्रवाई की थी।
अब आरोप सामने आए हैं कि बाद में अल्ट्रा क्लीन कंपनी ने उन्हें अतिक्रमण शाखा में पदस्थ कर दिया,जहां उनका वेतन भी जारी रहा।हालांकि,इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।
नियमों के पालन पर उठ रहे हैं कई सवाल
इस पूरे मामले में कई अहम सवाल सामने आ रहे हैं—
•यदि किसी कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई हुई थी,तो क्या उसे दूसरे विभाग में नियुक्त करना नियमों के अनुरूप था?
•यदि प्रक्रिया वैधानिक थी,तो उसका आदेश किस स्तर से जारी हुआ?
•यदि नियमों का उल्लंघन हुआ,तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
•इन सवालों के स्पष्ट उत्तर अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।
अल्ट्रा क्लीन कंपनी के प्रबंधन पर भी उठी उंगलियां
मामले के सामने आने के बाद कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।आरोप लगाने वालों का कहना है कि यदि शिकायतों के बावजूद संबंधित कर्मचारी को दूसरी शाखा में तैनात किया गया,तो यह केवल एक कर्मचारी का मामला नहीं बल्कि पूरी आउटसोर्स व्यवस्था की कार्यप्रणाली की जांच का विषय बन सकता है।
इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
सूत्रों का दावा—दागी कर्मचारियों को भी मिल रही है जगह
कुछ सूत्रों का दावा है कि ऐसे अन्य कर्मचारी भी हैं,जिनके खिलाफ पहले शिकायतें या कार्रवाई हुई थी,लेकिन उन्हें आउटसोर्स एजेंसी के माध्यम से अन्य विभागों में कार्य दिया गया।हालांकि,इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसकी पुष्टि केवल सक्षम जांच के बाद ही संभव होगी।
पहले भी विवादों में रही है आउटसोर्स व्यवस्था
अल्ट्रा क्लीन कंपनी को लेकर पहले भी फर्जी उपस्थिति, भुगतान संबंधी कथित अनियमितताओं और कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। नया मामला इन चर्चाओं को फिर से सुर्खियों में ले आया है।
जनता की मांग—रिकॉर्ड सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करे नगर निगम
नागरिकों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी को एक विभाग से हटाने के बाद दूसरे विभाग में कार्य दिया गया है,तो उससे जुड़े सभी आदेश,अनुमति पत्र और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए। इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी।
अब निगाहें नगर निगम प्रशासन पर
इस पूरे मामले में लोगों की नजर अब नगर निगम प्रशासन पर है।उम्मीद की जा रही है कि यदि शिकायतें प्राप्त हुई हैं,तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे,उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
