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ठेका शर्तों पर सवाल:क्या अल्ट्रा क्लीन कंपनी को नियमों से ऊपर मान लिया गया?नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न
20%कर्मचारी कम होने पर ठेका समाप्त करने का प्रावधान,फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?जनता बोली—करोड़ों के भुगतान का पूरा हिसाब दो
विशेष रिपोर्ट:अमित तिवारीजबलपुर।नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है।इस बार चर्चा का केंद्र कर्मचारियों की उपस्थिति,निविदा(टेंडर)की शर्तों का पालन और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर उठ रहे सवाल हैं।नागरिकों का कहना है कि यदि किसी एजेंसी ने अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया है,तो उसके विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई,इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
महत्वपूर्ण:इस समाचार में वर्णित आरोप विभिन्न शिकायतों और सार्वजनिक रूप से उठाए गए सवालों पर आधारित हैं। इनकी पुष्टि किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा होना शेष है।
क्या कहती है टेंडर की क्लॉज 3.5?
जानकारी के अनुसार,1 अक्टूबर 2025 से नगर निगम में वार्डवार और जोनवार आउटसोर्स व्यवस्था लागू की गई थी। अनुबंध की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख है कि प्रत्येक वार्ड में कर्मचारियों की उपस्थिति,अनुपस्थिति,बीटवार तैनाती तथा निरीक्षण का रिकॉर्ड नियमित रूप से रखा जाएगा।
निविदा की क्लॉज 3.5 के अनुसार यदि किसी वार्ड में 20 प्रतिशत या उससे अधिक कर्मचारी अनुपस्थित पाए जाते हैं,तो संबंधित एजेंसी पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।लगातार अनियमितता की स्थिति में नोटिस जारी कर ठेका समाप्त करने तक की कार्रवाई का भी प्रावधान बताया गया है।
यदि नियम थे,तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अब शहर में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि किसी वार्ड या जोन में निर्धारित संख्या से कम कर्मचारी कार्यरत थे या उपस्थिति रिकॉर्ड और वास्तविक कार्यस्थल की स्थिति में अंतर था,तो क्या संबंधित अधिकारियों ने नियमानुसार कार्रवाई की?
लोग जानना चाहते हैं—
•क्या नियमित निरीक्षण हुआ?
•क्या किसी एजेंसी पर जुर्माना लगाया गया?
•क्या कारण बताओ नोटिस जारी किए गए?
•क्या किसी स्तर पर अनुबंध समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू हुई?
वार्डवार रिकॉर्ड से खुल सकते हैं कई राज
नगर निगम के पास कर्मचारियों की उपस्थिति,बीट प्लान, निरीक्षण रिपोर्ट और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध होने चाहिए।यदि इन दस्तावेजों का तकनीकी परीक्षण और आपसी मिलान किया जाए,तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निम्न रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है—
•वार्डवार उपस्थिति रजिस्टर
•जोनवार ई-अटेंडेंस रिकॉर्ड
•बीट प्लान
•निरीक्षण रिपोर्ट
•पेनल्टी आदेश
•भुगतान संबंधी दस्तावेज
जनता के करोड़ों रुपये का सवाल
नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर हर महीने करोड़ों रुपये सार्वजनिक धन से खर्च किए जाते हैं।ऐसे में नागरिकों का कहना है कि कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति,निरीक्षण रिपोर्ट,भुगतान और कार्रवाई से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए,ताकि पारदर्शिता बनी रहे और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय हो सके।
अल्ट्रा क्लीन कंपनी को लेकर लगातार उठ रहे सवाल
आउटसोर्स एजेंसी अल्ट्रा क्लीन एंड केयर सर्विसेस के कार्यों को लेकर पिछले कुछ समय से विभिन्न शिकायतें सामने आती रही हैं।कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक का नाम भी कुछ शिकायतों में लिया गया है।हालांकि,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन पर अंतिम निष्कर्ष किसी सक्षम जांच के बाद ही निकल सकेगा।
नगर निगम प्रशासन से उठी पारदर्शिता की मांग
शहर के नागरिकों का कहना है कि यदि सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार हुई हैं,तो नगर निगम को जांच रिपोर्ट,निरीक्षण रिकॉर्ड और कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
अब निगाहें आयुक्त के फैसले पर
पूरा शहर अब इस बात का इंतजार कर रहा है कि नगर निगम प्रशासन इस मामले की व्यापक और निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं।यदि जांच में निविदा शर्तों के उल्लंघन,फर्जी उपस्थिति या अन्य अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं,तो संबंधित एजेंसी के साथ-साथ निगरानी और सत्यापन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
