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गोटेगांव में पोस्टमार्टम भवन का इंतजार:50 साल पुरानी इमारत हुई ध्वस्त,अब अस्पताल की मर्चुरी में हो रहे पोस्टमार्टम
10 लाख रुपये की स्वीकृति के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं, मरीजों और कर्मचारियों को हो रही परेशानी
नरसिंहपुर|विकास की कलमजिस अस्पताल में लोग नई जिंदगी की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं यदि पोस्टमार्टम जैसी संवेदनशील प्रक्रिया भी संचालित होने लगे तो स्वाभाविक रूप से मरीजों और उनके परिजनों के मन में असहजता पैदा होती है।नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में इन दिनों कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। यहां वर्ष 1970 में निर्मित पोस्टमार्टम भवन जर्जर होकर ध्वस्त हो चुका है। इसके बाद से पोस्टमार्टम की पूरी व्यवस्था पुराने शासकीय अस्पताल परिसर स्थित मर्चुरी में की जा रही है।इस बीच,नए पोस्टमार्टम भवन के लिए 10 लाख रुपये स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
50 साल पुराना भवन बना खंडहर
गोटेगांव में शांति धाम के पास वर्ष 1970 में पोस्टमार्टम भवन का निर्माण कराया गया था।वर्षों तक यह भवन पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण केंद्र रहा,जहां संदिग्ध मौत, सड़क दुर्घटना और अन्य मामलों में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया संपन्न होती थी।
समय के साथ भवन पूरी तरह जर्जर हो गया।विभागीय इंजीनियर द्वारा इसे असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद भवन को ध्वस्त करना पड़ा।इसके बाद से नया भवन नहीं बनने के कारण पोस्टमार्टम की व्यवस्था अस्थायी रूप से अस्पताल परिसर की मर्चुरी में कर दी गई।
अस्पताल में इलाज और पोस्टमार्टम साथ-साथ
वर्तमान व्यवस्था के तहत जिस परिसर में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं,वहीं कुछ दूरी पर शवों का पोस्टमार्टम भी किया जा रहा है।इससे अस्पताल का वातावरण प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल पहले ही तनाव और चिंता का स्थान होता है।ऐसे में पोस्टमार्टम की गतिविधियां मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक रूप से और अधिक विचलित करती हैं।उनका मानना है कि पोस्टमार्टम जैसी प्रक्रिया के लिए अलग भवन होना आवश्यक है।
कर्मचारियों को भी उठानी पड़ रही मुश्किलें
अस्पताल की मर्चुरी को स्थायी पोस्टमार्टम भवन के रूप में विकसित नहीं किया गया है।सीमित संसाधनों और आवश्यक सुविधाओं के अभाव में डॉक्टरों एवं कर्मचारियों को कार्य करना पड़ रहा है।आधुनिक पोस्टमार्टम भवन में उपलब्ध कई बुनियादी सुविधाएं यहां नहीं हैं,जिससे कार्य प्रभावित होने की बात भी सामने आ रही है।
10 लाख स्वीकृत,फिर भी निर्माण शुरू नहीं
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार नए पोस्टमार्टम भवन के निर्माण के लिए शासन द्वारा लगभग 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की जा चुकी है।इसके बावजूद अब तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।
यही कारण है कि लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब बजट उपलब्ध है तो आखिर निर्माण में देरी क्यों हो रही है। संबंधित विभाग की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों की मांग
गोटेगांव के नागरिकों का कहना है कि नए पोस्टमार्टम भवन का निर्माण जल्द से जल्द कराया जाए ताकि अस्पताल परिसर में इलाज और पोस्टमार्टम की व्यवस्थाएं अलग-अलग संचालित हो सकें।इससे मरीजों,उनके परिजनों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी राहत मिलेगी।
प्रशासन से जवाब की उम्मीद
अब लोगों की निगाहें प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं।यदि निर्माण के लिए राशि वास्तव में स्वीकृत हो चुकी है,तो निर्माण कार्य शीघ्र शुरू होना चाहिए।वहीं यदि किसी प्रशासनिक या तकनीकी कारण से कार्य लंबित है, तो संबंधित विभाग को इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
फिलहाल गोटेगांव का पोस्टमार्टम भवन सिर्फ एक जर्जर इमारत का मामला नहीं रह गया है,बल्कि यह सवाल भी बन गया है कि स्वीकृत योजनाओं का लाभ आम जनता तक समय पर क्यों नहीं पहुंच पा रहा है।
