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कर्मचारियों के बैंक स्टेटमेंट से बढ़ी अल्ट्रा क्लीन कंपनी की मुश्किलें!वेतन भुगतान में गड़बड़ी के आरोप,दस्तावेजों की जांच हुई तो खुल सकता है बड़ा राज
एक के बाद एक सामने आ रहे बैंक रिकॉर्ड से मचा हड़कंप,कर्मचारियों ने लगाया वेतन में कटौती और वित्तीय अनियमितताओं का आरोप;जांच एजेंसियों से बैंक स्टेटमेंट,वेतन रजिस्टर और निगम भुगतान रिकॉर्ड की जांच की मांग।
अमित तिवारी की खास रिपोर्टजबलपुर।नगर निगम जबलपुर में आउटसोर्स एजेंसी अल्ट्रा क्लीन कंपनी को लेकर विवाद अब लगातार गहराता जा रहा है।कर्मचारियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे बैंक स्टेटमेंट और पासबुक की प्रतियों ने वेतन भुगतान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।कर्मचारियों का दावा है कि उनके खातों में जमा हुई राशि और उन्हें मिलने वाले वास्तविक वेतन के बीच बड़ा अंतर है।उनका कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष वित्तीय जांच कराई जाए तो करोड़ों रुपये के भुगतान से जुड़ी कथित अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
कर्मचारियों का आरोप है कि नगर निगम के स्वास्थ्य, अतिक्रमण और उद्यान विभाग में आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को वर्षों से उनके वास्तविक वेतन,भत्तों और अन्य वित्तीय अधिकारों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। नौकरी छूटने के डर से अधिकांश कर्मचारी अब तक चुप रहे, लेकिन हाल के दिनों में लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद कई कर्मचारियों ने अपने बैंक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है।
बैंक स्टेटमेंट खोल रहे कई सवाल
कर्मचारियों का कहना है कि जब उन्होंने जनवरी से जुलाई 2026 तक के बैंक स्टेटमेंट निकाले तो उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि खाते में जमा राशि उनके अनुमानित वेतन से काफी कम थी।उनका दावा है कि उन्हें कभी यह नहीं बताया गया कि उनका स्वीकृत वेतन कितना है और कंपनी को उनके नाम पर कितना भुगतान प्राप्त हो रहा है।
कर्मचारियों के अनुसार,बैंक स्टेटमेंट अब इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज बनकर सामने आया है। उनका कहना है कि यदि इन रिकॉर्ड का आधिकारिक दस्तावेजों से मिलान कराया जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
डायरेक्टर और जनरल मैनेजर पर लगाए गंभीर आरोप
नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक ने कभी कर्मचारियों को वेतन संबंधी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।कर्मचारियों का कहना है कि हर महीने बैंक खाते में जितनी राशि आती थी, मजबूरी में उसी को स्वीकार करना पड़ता था।
कर्मचारियों का यह भी कहना है कि कई बार वेतन संबंधी जानकारी मांगने पर उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। यही कारण है कि अब वे पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।
जांच एजेंसियों से इन दस्तावेजों की जांच कराने की मांग
कर्मचारियों ने मांग की है कि जांच एजेंसियां केवल बैंक स्टेटमेंट तक सीमित न रहें,बल्कि पूरे भुगतान सिस्टम की जांच करें। उन्होंने निम्न दस्तावेजों का मिलान कराने की मांग की है—
•सभी कर्मचारियों के बैंक स्टेटमेंट
•वेतन रजिस्टर एवं मासिक भुगतान विवरण
•ईपीएफ (EPF) जमा रिकॉर्ड
•ईएसआई (ESI) भुगतान रिकॉर्ड
•उपस्थिति रजिस्टर
•अल्ट्रा क्लीन कंपनी के ठेके की शर्तें
•नगर निगम द्वारा कंपनी को किए गए भुगतान का पूरा रिकॉर्ड
•कर्मचारियों के नाम पर जारी वेतन स्वीकृति संबंधी दस्तावेज
अगर जांच हुई तो सामने आ सकते हैं बड़े तथ्य
कर्मचारियों का कहना है कि यदि बैंक रिकॉर्ड,वेतन रजिस्टर और नगर निगम द्वारा किए गए भुगतान का तकनीकी एवं वित्तीय ऑडिट कराया जाता है,तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि कर्मचारियों के नाम पर स्वीकृत राशि और वास्तविक भुगतान में कोई अंतर था या नहीं।
उनका मानना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो मामला केवल वेतन भुगतान तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग,श्रम कानूनों के पालन और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा बड़ा मामला बन सकता है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
कर्मचारियों ने जिला प्रशासन,नगर निगम और संबंधित जांच एजेंसियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या कर्मचारियों के अधिकारों का हनन पाया जाता है,तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और कर्मचारियों को उनका वैधानिक भुगतान दिलाया जाए।
हालांकि,यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ये आरोप कर्मचारियों द्वारा लगाए गए हैं।इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।संबंधित कंपनी और अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी समान महत्व के साथ प्रकाशित किया जाएगा।
