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EXCLUSIVE|ई-अटेंडेंस की फोटो से खुली परतें!नगर निगम में फर्जी हाजिरी का खेल?कई चेहरों को कर्मचारी तक नहीं पहचानते
अल्ट्रा क्लीन कंपनी पर गंभीर सवाल,फोटो और रिकॉर्ड से उठे नए विवाद
विशेष रिपोर्ट:अमित तिवारीजबलपुर।नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स एजेंसी अल्ट्रा क्लीन एंड केयर सर्विसेस से जुड़े कथित फर्जी ई-अटेंडेंस और भुगतान के मामले में अब नए सवाल खड़े हो रहे हैं।उपलब्ध ई-अटेंडेंस रिकॉर्ड और उससे जुड़े फोटोग्राफ को लेकर कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है।कई कर्मचारियों का दावा है कि रिकॉर्ड में दर्ज कुछ चेहरों को उन्होंने कभी कार्यस्थल पर नहीं देखा।
यदि इन दावों की पुष्टि जांच में होती है,तो मामला केवल उपस्थिति तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि सरकारी भुगतान प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
ई-अटेंडेंस की फोटो बनी जांच का अहम आधार
सूत्रों के अनुसार,नगर निगम के अतिक्रमण विभाग सहित अन्य शाखाओं में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की आधार आधारित ई-अटेंडेंस (AEBAS) में दर्ज फोटो अब जांच का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।यदि इन तस्वीरों का वास्तविक कार्यस्थल पर मौजूद कर्मचारियों से मिलान कराया जाता है, तो स्थिति स्पष्ट हो सकती है कि रिकॉर्ड में दर्ज व्यक्ति वास्तव में ड्यूटी पर थे या नहीं।
"इन चेहरों को हमने कभी नहीं देखा"
कुछ कर्मचारियों ने दावा किया है कि ई-अटेंडेंस रिकॉर्ड में दर्ज कुछ व्यक्तियों को वे पहचानते तक नहीं हैं।उनका कहना है कि संबंधित चेहरे कभी कार्यालय या कार्यस्थल पर दिखाई नहीं दिए।हालांकि,इन दावों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है।
भुगतान और उपस्थिति पर उठे सवाल
यदि जांच में यह पाया जाता है कि जिन व्यक्तियों के नाम पर उपस्थिति दर्ज हुई,वे वास्तविक रूप से कार्यरत नहीं थे, तो उनके नाम पर हुए वेतन भुगतान की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ सकती है।ऐसे में ई-अटेंडेंस लॉग,ड्यूटी चार्ट,बैंक भुगतान रिकॉर्ड और भौतिक सत्यापन महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं।
प्रबंधन और अधिकारियों की भूमिका की भी मांग
कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि कथित अनियमितताओं की जानकारी कंपनी के उच्च प्रबंधन तक थी। आरोपों में कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक का भी उल्लेख किया गया है।साथ ही कुछ नगर निगम अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठ रही है।
हालांकि,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का आधिकारिक जवाब सामने आना अभी बाकी है।
20 से अधिक कर्मचारियों के रिकॉर्ड आने की चर्चा
सूत्रों के अनुसार,आने वाले दिनों में 20 से अधिक कर्मचारियों के ई-अटेंडेंस रिकॉर्ड और फोटो भी सामने आ सकते हैं।यदि ऐसा होता है,तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नगर निगम प्रशासन और संबंधित जांच एजेंसियां इन रिकॉर्ड की किस प्रकार जांच करती हैं और क्या पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई होती है।
