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फर्जी अटेंडेंस के सहारे निकलता रहा वेतन?नगर निगम के कई विभागों की भूमिका पर उठे सवाल
आउटसोर्स व्यवस्था पर गंभीर आरोप,ई-अटेंडेंस और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की उठी मांग
विशेष रिपोर्ट:अमित तिवारीजबलपुर।नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है।अल्ट्रा क्लीन कंपनी के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों की कथित फर्जी उपस्थिति और वेतन भुगतान को लेकर नए आरोप सामने आए हैं।आरोप है कि स्वास्थ्य,अतिक्रमण और उद्यान विभाग में कुछ कर्मचारियों के नाम पर नियमित ई-अटेंडेंस दर्ज होती रही,जबकि दावा किया जा रहा है कि उनमें से कुछ कर्मचारी वास्तविक कार्यस्थलों पर मौजूद नहीं थे।इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में आधिकारिक जांच की मांग की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार,यदि किसी कर्मचारी की उपस्थिति के आधार पर वेतन जारी हुआ है,तो भुगतान प्रक्रिया में संबंधित विभागीय सत्यापन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जिन कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज हुई,क्या उनका भौतिक सत्यापन भी नियमानुसार किया गया था।
ई-अटेंडेंस से लेकर वेतन भुगतान तक होगी जांच?
मामले में यह मांग उठ रही है कि ई-अटेंडेंस लॉग, ड्यूटी चार्ट, वेतन भुगतान रिकॉर्ड,बैंक ट्रांजैक्शन और फील्ड सत्यापन का मिलान कराया जाए।यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है,तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंसी की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है।
कई अधिकारियों और कंपनी प्रबंधन की भूमिका पर सवाल
मामले में अल्ट्रा क्लीन कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक की भूमिका की जांच की मांग उठाई जा रही है।इसके अलावा सहायक अतिक्रमण अधिकारी दीपेंद्र रावत,अखिलेश भदौरिया,दल प्रभारी दुर्गा राव,अभिषेक समुद्रे और जय प्रवीण सहित अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।हालांकि,इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी केवल सक्षम जांच के बाद ही तय हो सकती है।
जनता के पैसे के उपयोग पर उठे सवाल
यदि जांच में यह पाया जाता है कि बिना वास्तविक कार्य के वेतन भुगतान हुआ या उपस्थिति रिकॉर्ड में गड़बड़ी की गई,तो मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा। ऐसी स्थिति में सरकारी धन के उपयोग,निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
नगर निगम की आउटसोर्स व्यवस्था को लेकर बढ़ते विवाद के बीच अब शहरवासियों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच कराई जाएगी।यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है,वहीं यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो प्रशासन से तथ्य सार्वजनिक करने की भी अपेक्षा की जा रही है।फिलहाल यह मामला नगर निगम की पारदर्शिता,जवाबदेही और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।
