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मानवाधिकार आयोग के एक्शन के बाद अल्ट्रा क्लीन कंपनी पर कसता शिकंजा!
फर्जी अटेंडेंस से करोड़ों के भुगतान की होगी जांच,रिकॉर्ड खंगालने की तैयारी
डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की चर्चा
विशेष रिपोर्ट:अमित तिवारीजबलपुर।नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स एजेंसी अल्ट्रा क्लीन एंड केयर सर्विसेस से जुड़े कथित फर्जी अटेंडेंस,वेतन भुगतान और कर्मचारियों की संख्या में अनियमितताओं के आरोप अब गंभीर जांच की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। मानवाधिकार आयोग द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद नगर निगम प्रशासन भी सक्रिय नजर आ रहा है।सूत्रों के अनुसार,कंपनी से जुड़े विभिन्न रिकॉर्डों की गहन जांच की तैयारी की जा रही है और संबंधित विभागों से दस्तावेज तलब किए जा सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि नगर निगम के स्वास्थ्य,उद्यान, अतिक्रमण समेत अन्य विभागों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों की वास्तविक संख्या,आधार आधारित ई-अटेंडेंस (AEBAS),बायोमेट्रिक रिकॉर्ड,वेतन भुगतान और सेवा अभिलेखों का मिलान कराया जा सकता है।जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि जिन कर्मचारियों के नाम पर भुगतान हुआ,क्या वे वास्तव में कार्यरत थे और उनकी उपस्थिति का रिकॉर्ड वास्तविक स्थिति से मेल खाता है या नहीं।
अतिक्रमण शाखा का नोटिस बना जांच की अहम कड़ी
हाल ही में नगर निगम की अतिक्रमण शाखा के प्रभारी द्वारा अल्ट्रा क्लीन कंपनी को कर्मचारियों की नियमित एवं वास्तविक उपस्थिति सुनिश्चित करने के संबंध में नोटिस जारी किया गया था।प्रशासनिक हलकों में इसे पूरे प्रकरण की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।इसके बाद से कंपनी के कार्यों और दस्तावेजों की जांच को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
फर्जी अटेंडेंस साबित हुई तो दर्ज हो सकती है एफ आई आर
सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या और मौके पर कार्यरत कर्मचारियों का भौतिक सत्यापन भी कराया जा सकता है।यदि जांच में यह पाया जाता है कि फर्जी उपस्थिति दर्ज कर सरकारी धन का भुगतान कराया गया या रिकॉर्ड में किसी प्रकार की हेराफेरी की गई,तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध एफआईआर सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
जांच का दायरा कंपनी प्रबंधन तक पहुंच सकता है
चर्चा यह भी है कि यदि पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं,तो जांच केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगी।आउटसोर्स एजेंसी के जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि,इस संबंध में किसी भी दोष या जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण केवल सक्षम जांच के बाद ही होगा।
आरोप साबित हुए तो हो सकती है सख्त कार्रवाई
नगर निगम में लंबे समय से आउटसोर्स व्यवस्था को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
यदि जांच में आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों, अधिकारियों और एजेंसी के विरुद्ध नियमों के अनुसार अनुबंध संबंधी कार्रवाई,एफआईआर तथा अन्य कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई जा सकती हैं।वहीं यदि आरोप सिद्ध नहीं होते,तो संबंधित पक्ष का पक्ष भी सार्वजनिक रूप से सामने आना आवश्यक होगा।
अब सबकी निगाहें जांच पर
मानवाधिकार आयोग के संज्ञान के बाद यह मामला अब प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तर पर महत्वपूर्ण बन गया है। अब यह देखना होगा कि प्रस्तावित जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और नगर निगम प्रशासन इस बहुचर्चित मामले में आगे क्या कदम उठाता है।
नोट:इस रिपोर्ट में उल्लिखित आरोप,दावे और संभावित कार्रवाई उपलब्ध दस्तावेजों,सूत्रों और शिकायतों पर आधारित हैं।इनकी अंतिम पुष्टि सक्षम प्राधिकारी की जांच और आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही होगी।
