Jabalpur News|Crime & Investigation
फोटो से बेनकाब होगा करोड़ों के भुगतान का खेल?ई-अटेंडेंस का'महाखुलासा'!
अल्ट्रा क्लीन कंपनी पर उठे नए सवाल,डिजिटल रिकॉर्ड से खुल सकती है पूरी परत
डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की चर्चा
विशेष रिपोर्ट:अमित तिवारीजबलपुर।नगर निगम जबलपुर में आउटसोर्स एजेंसी अल्ट्रा क्लीन एंड केयर सर्विसेस से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मामला अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।चर्चा है कि यदि आधार आधारित ई-अटेंडेंस (AEBAS) के डिजिटल रिकॉर्ड,कर्मचारियों के फोटो, उपस्थिति विवरण और वास्तविक कार्यस्थल का मिलान कराया जाता है,तो करोड़ों रुपये के भुगतान और उपस्थिति से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार नगर निगम के स्वास्थ्य,उद्यान,अतिक्रमण सहित कई विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की उपस्थिति आधार आधारित ई-अटेंडेंस प्रणाली के माध्यम से दर्ज होती है। इस सिस्टम में कर्मचारियों का नाम,आधार सत्यापन और फोटो सुरक्षित रहता है।ऐसे में यदि इन फोटो का वास्तविक रूप से ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों से मिलान कराया जाए,तो यह स्पष्ट हो सकता है कि जिन लोगों के नाम पर उपस्थिति दर्ज हुई,क्या वास्तव में वही कर्मचारी मौके पर काम कर रहे थे।
सबसे बड़ा सवाल—क्या उपस्थिति और भुगतान का रिकॉर्ड मेल खाता है?
मामले का सबसे अहम प्रश्न यह है कि यदि किसी कर्मचारी की ई-अटेंडेंस नियमित रूप से दर्ज होती रही,लेकिन वह वास्तविक रूप से कार्यस्थल पर मौजूद नहीं था,तो उसके नाम पर वेतन भुगतान किस आधार पर हुआ?क्या निगरानी व्यवस्था में चूक हुई या फिर कहीं प्रशासनिक स्तर पर मिलीभगत की संभावना है?इन सवालों के जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
उपस्थिति दर्ज,फिर गायब होने की चर्चा
सूत्रों में यह भी चर्चा है कि कुछ कर्मचारी केवल उपस्थिति दर्ज कराकर कार्यस्थल से चले जाते थे,जबकि रिकॉर्ड में उनकी पूरी उपस्थिति बनी रहती थी।यदि जांच में ऐसे तथ्य सामने आते हैं, तो मामला केवल अनुशासनहीनता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
जांच की सबसे अहम कड़ी होगा डिजिटल डेटा
जानकारों का मानना है कि पूरे मामले में निम्न रिकॉर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं—
•ई-अटेंडेंस (AEBAS) का डिजिटल डेटा
•कर्मचारियों के आधार सत्यापित फोटो
•विभागवार ड्यूटी चार्ट
•वेतन एवं भुगतान रिकॉर्ड
•मौके पर कार्यरत कर्मचारियों का भौतिक सत्यापन
यदि इन सभी दस्तावेजों का आपस में मिलान कराया जाता है, तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
पहले भी नोटिसों से घिरी है कंपनी
गौरतलब है कि अल्ट्रा क्लीन कंपनी पहले भी विभिन्न शिकायतों और विभागीय नोटिसों को लेकर चर्चा में रही है। कर्मचारियों की उपस्थिति,वेतन भुगतान और अन्य श्रम संबंधी मुद्दों पर भी सवाल उठते रहे हैं।इसी बीच कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना भी आवश्यक है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
नगर निगम प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि पूरे मामले की तकनीकी और निष्पक्ष जांच कराई जाए।यदि किसी स्तर पर अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है,तो संबंधित अधिकारियों,कर्मचारियों अथवा एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।वहीं यदि आरोप जांच में सही नहीं पाए जाते हैं,तो इसकी भी सार्वजनिक जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि तथ्य स्पष्ट हो सकें।
अब सबसे बड़ा सवाल...
क्या ई-अटेंडेंस का डिजिटल रिकॉर्ड नगर निगम की आउटसोर्स व्यवस्था से जुड़े कथित रहस्यों से पर्दा उठाएगा,या यह मामला भी जांच की फाइलों तक सीमित रह जाएगा?आने वाले दिनों में जांच की दिशा इस पूरे प्रकरण की तस्वीर साफ कर सकती है।
नोट:इस रिपोर्ट में उल्लिखित आरोप और दावे विभिन्न स्रोतों एवं उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं।इनकी पुष्टि सक्षम जांच एजेंसियों की जांच के बाद ही होगी।संबंधित पक्ष का संस्करण उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
