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भंवरताल गार्डन से उठी कर्मचारियों की आवाज:बैंक पासबुक लेकर सामने आए कर्मी,अल्ट्रा क्लीन कंपनी पर वेतन भुगतान में गंभीर आरोप
कर्मचारियों का दावा-कलेक्टर रेट का पूरा वेतन नहीं मिला,बैंक स्टेटमेंट के आधार पर निष्पक्ष जांच की मांग
विशेष रिपोर्ट अमित तिवारीजबलपुर।नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स एजेंसी अल्ट्रा क्लीन कंपनी एक बार फिर विवादों के घेरे में है।इस बार कंपनी के खिलाफ आवाज उसके ही कर्मचारियों ने बुलंद की है।भंवरताल गार्डन में कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी बैंक पासबुक और बैंक स्टेटमेंट सार्वजनिक करते हुए वेतन भुगतान में कथित अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं।कर्मचारियों का कहना है कि वे नियमित रूप से काम करने के बावजूद शासन द्वारा निर्धारित कलेक्टर रेट के अनुसार पूरा वेतन नहीं पा रहे हैं।
बैंक पासबुक दिखाकर पूछा सवाल—बाकी वेतन आखिर गया कहां?
कर्मचारियों का दावा है कि उनके बैंक खातों में कभी ₹7,000 तो कभी ₹8,000 जैसी राशि जमा की जाती है,जबकि निर्धारित मजदूरी इससे अधिक है।उनका सवाल है कि यदि शासन ने मजदूरी की दर तय कर रखी है,तो शेष राशि किस स्तर पर और किस कारण से कट रही है?
कर्मचारियों ने कहा कि वे अपने बैंक रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं।
कंपनी प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे,जनरल मैनेजर विकास रजक,संबंधित सुपरवाइजर और नगर निगम के जोन स्तर के अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी सत्यता सक्षम जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
'आयुक्त से भी शिकायत की,लेकिन नहीं मिली राहत'
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत कई बार नगर निगम आयुक्त तक भी पहुंचाई,लेकिन उनकी शिकायतों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।उनका दावा है कि यदि समय रहते शिकायतों की जांच होती,तो स्थिति अलग हो सकती थी।
ईपीएफ,ईएसआई और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की मांग
कर्मचारियों का कहना है कि यदि बैंक ट्रांजेक्शन,वेतन भुगतान रिकॉर्ड,ईपीएफ,ईएसआई,उपस्थिति रजिस्टर और अनुबंध संबंधी दस्तावेजों का मिलान कराया जाए,तो पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
उनका कहना है कि अब उनके पास अपने दावों के समर्थन में बैंक रिकॉर्ड मौजूद हैं।
अब सवाल पारदर्शिता और जवाबदेही पर
कर्मचारियों का कहना है कि जब सरकारी धन से भुगतान किया जाता है,तो पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
'फिर उसी कंपनी को ठेका क्यों?'
कर्मचारियों ने सवाल उठाया कि यदि कंपनी के खिलाफ लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं,तो उसे दोबारा टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति क्यों दी जा रही है?
उन्होंने मांग की कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो कंपनी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और भविष्य में उसे ठेका न दिया जाए।
कर्मचारियों की मांग:दूसरी एजेंसी के साथ करेंगे काम
भंवरताल गार्डन में मौजूद कर्मचारियों ने कहा कि वे नगर निगम में कार्य जारी रखना चाहते हैं,लेकिन वर्तमान कंपनी के माध्यम से नहीं। उनका कहना है कि यदि आवश्यकता हो तो वे किसी अन्य एजेंसी के साथ काम करने को तैयार हैं।
अब प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें
पूरा मामला अब नगर निगम प्रशासन और संबंधित जांच एजेंसियों के सामने है।यदि कर्मचारियों के आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है,वहीं यदि आरोप गलत साबित होते हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।फिलहाल कर्मचारी निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
