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Corruption News:लोकायुक्त तक पहुंची अल्ट्रा क्लीन कंपनी की शिकायत,वेतन भुगतान और कथित अनियमितताओं की जांच शुरू

Jabalpur News|Corruption|Civic Affairs| Investigation

लोकायुक्त तक पहुंची अल्ट्रा क्लीन कंपनी की शिकायत, वेतन भुगतान और कथित अनियमितताओं की जांच शुरू

नगर निगम की आउटसोर्स व्यवस्था पर उठे सवाल, शिकायतकर्ता ने सबूतों के साथ सौंपा दस्तावेजी रिकॉर्ड

खास रिपोर्ट अमित तिवारी 

जबलपुर।नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स एजेंसी अल्ट्रा क्लीन कंपनी से जुड़े कथित वेतन भुगतान में अनियमितता, कर्मचारियों के शोषण, बायोमेट्रिक उपस्थिति,सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और निविदा शर्तों के पालन से जुड़े आरोप अब लोकायुक्त संगठन तक पहुंच गए हैं।मामले में शिकायत मिलने के बाद प्रारंभिक स्तर पर जांच प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी सामने आई है।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के अधिवक्ता धर्मराज सिंह ने पुलिस अधीक्षक,लोकायुक्त संगठन अंजुलता पटले को विस्तृत शिकायत सौंपते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।शिकायत के साथ दस्तावेज और एक सीडी भी प्रस्तुत किए जाने का दावा किया गया है।

शिकायत में किन-किन पर उठे सवाल?

शिकायत में नगर निगम के संबंधित अधिकारियों,जनसंपर्क अधिकारी,जोन प्रभारियों,दल प्रभारियों,बिल पारित करने वाले अधिकारियों के साथ-साथ अल्ट्रा क्लीन कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक का उल्लेख करते हुए पूरे मामले की जांच और दोषियों पर वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।

वेतन भुगतान और श्रमिकों के शोषण के आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कई आउटसोर्स कर्मचारियों को शासन द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप वेतन नहीं दिया जा रहा।साथ ही कर्मचारियों को मास्क,ग्लव्स, सैनिटाइजर सहित आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता का दावा है कि इन मदों के लिए बजट निर्धारित होने के बावजूद कर्मचारियों तक सुविधाएं नहीं पहुंच रहीं, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

बायोमेट्रिक रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच की मांग

लोकायुक्त को दी गई शिकायत में निम्न बिंदुओं की जांच की मांग की गई है—

•AEBS (आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति) रिकॉर्ड

•कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति

•बैंक खातों में वेतन भुगतान का विवरण

•निविदा शर्तों का पालन

•बिल पारित करने की प्रक्रिया

•उद्यान,स्वास्थ्य और अतिक्रमण विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का भौतिक सत्यापन

'तथ्य सही मिले तो हो कार्रवाई'

शिकायतकर्ता धर्मराज सिंह का कहना है कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता,मिलीभगत या भ्रष्टाचार के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

लोकायुक्त ने जांच का दिया भरोसा

लोकायुक्त संगठन की पुलिस अधीक्षक अंजुलता पटले ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए बताया कि मामले का परीक्षण किया जाएगा।जांच में जो तथ्य सामने आएंगे,उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब जांच के परिणाम पर टिकी निगाहें

यह मामला अब केवल आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि नगर निगम की आउटसोर्स व्यवस्था,निगरानी प्रणाली और सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़े सवाल भी जांच के दायरे में आ गए हैं।जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही आरोपों की पुष्टि या खंडन स्पष्ट हो सकेगा।

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