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जबलपुर नगर निगम की आउटसोर्स व्यवस्था पर उठे सवाल:क्या ठेके की शर्तों को दरकिनार कर चल रही थी अल्ट्रा क्लीन कंपनी?
जनता पूछ रही जवाब—नियम टूटे तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?आयुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग तेज
विशेष रिपोर्ट:अमित तिवारीजबलपुर।नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स व्यवस्था एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।विभिन्न शिकायतों और आरोपों के बीच विशेष रूप से अल्ट्रा क्लीन एंड केयर सर्विसेस के कामकाज,अनुबंध की शर्तों के पालन और प्रशासनिक निगरानी को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि ठेके की शर्तों का उल्लंघन हुआ है,तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
नोट:इस समाचार में उल्लिखित आरोप शिकायतों और सार्वजनिक रूप से उठाए गए सवालों पर आधारित हैं। इनकी आधिकारिक जांच और पुष्टि संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जानी शेष है।
ठेके की शर्तों के पालन पर उठ रहे सवाल
नगर निगम की निविदाओं में स्पष्ट प्रावधान होते हैं कि आउटसोर्स एजेंसियों को श्रम कानूनों,कर्मचारी हितों और अनुबंध की सभी शर्तों का पालन करना होगा।यदि किसी एजेंसी द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो निगम के पास कारण बताओ नोटिस,आर्थिक दंड,अनुबंध समाप्त करने अथवा अन्य वैधानिक कार्रवाई करने का अधिकार होता है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि संबंधित एजेंसियों के खिलाफ शिकायतें मिली थीं,तो उन पर क्या कार्रवाई की गई।
अल्ट्रा क्लीन कंपनी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा
शहर में सबसे अधिक चर्चा अल्ट्रा क्लीन एंड केयर सर्विसेस को लेकर है।नागरिकों का कहना है कि यदि कंपनी के संबंध में गंभीर शिकायतें प्रशासन के संज्ञान में थीं,तो—
•क्या कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया?
•क्या विभागीय जांच कराई गई?
•क्या कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा गया?
•यदि कार्रवाई हुई तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
इन सवालों के आधिकारिक उत्तर का इंतजार किया जा रहा है।
अन्य आउटसोर्स एजेंसियों पर भी निगरानी की मांग
अल्ट्रा क्लीन के अलावा मेसर्स राज सिक्योरिटी फोर्स (एल.एस.)प्रा.लि.,भोपाल,माँ नर्मदा सफाई संरक्षक कामगार लेबर कॉन्ट्रैक्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी तथा श्री बर्फानी सिक्योरिटी सर्विसेज,जबलपुर जैसी अन्य एजेंसियों के कार्यों की भी निष्पक्ष समीक्षा की मांग उठ रही है।
नागरिकों का कहना है कि सभी आउटसोर्स एजेंसियों के अनुबंधों का समान रूप से परीक्षण किया जाए।
पारदर्शिता पर उठे बड़े सवाल
नगर निगम प्रशासन की ओर से अब तक ऐसा कोई विस्तृत सार्वजनिक दस्तावेज सामने नहीं आया है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि शिकायतों पर किस स्तर तक जांच हुई और क्या कार्रवाई की गई।
यही कारण है कि पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर लोगों के बीच सवाल लगातार बढ़ रहे हैं।
जनता के टैक्स के पैसे का हिसाब मांग रहे नागरिक
नगर निगम द्वारा आउटसोर्स कंपनियों को किया जाने वाला भुगतान सार्वजनिक धन से होता है।ऐसे में नागरिकों का कहना है कि उन्हें यह जानने का अधिकार है कि—
•कंपनियां अनुबंध की शर्तों का पालन कर रही हैं या नहीं।
•कर्मचारियों से जुड़े सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
•यदि कहीं अनियमितता मिली है तो संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की।
आयुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग
शहर के नागरिकों की मांग है कि—
•सभी शिकायतों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
•जिन कंपनियों के खिलाफ शिकायतें प्राप्त हुई हैं,उनसे संबंधित नोटिस और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
•यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सबसे बड़ा सवाल
जब नगर निगम की निविदाओं में नियम स्पष्ट हैं, तो यदि उनका उल्लंघन हुआ है,क्या संबंधित एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
इस प्रश्न का आधिकारिक उत्तर आने तक नगर निगम की आउटसोर्स व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल बने रह सकते हैं।
