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जबलपुर नगर निगम टेंडर विवाद:अल्ट्रा क्लीन कंपनी को फिर ठेका दिलाने की कोशिश?बंद कमरे की बैठक और अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
नई टेंडर प्रक्रिया के बीच पुराने आरोप फिर चर्चा में, शिकायतकर्ताओं ने निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता की मांग उठाई
खास रिपोर्ट:अमित तिवारीजबलपुर।नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स व्यवस्था एक बार फिर विवादों के केंद्र में है।नई टेंडर प्रक्रिया के दौरान अल्ट्रा क्लीन कंपनी को दोबारा ठेका दिलाने की कथित कोशिशों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी के खिलाफ पहले से वेतन भुगतान,श्रमिक सुविधाओं और अन्य अनियमितताओं से जुड़े मामले लंबित होने के बावजूद उसे फिर से लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।वहीं नगर निगम प्रशासन का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया जारी है और सभी कंपनियों के प्रस्तावों पर नियमानुसार विचार किया जा रहा है।
बंद कमरे की बैठक को लेकर बढ़ा विवाद
सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि स्मार्ट सिटी कार्यालय में अतिरिक्त स्वास्थ्य अधिकारी देवेंद्र सिंह चौहान और अल्ट्रा क्लीन कंपनी के प्रतिनिधियों के बीच कई घंटों तक बैठक हुई।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस बैठक में टेंडर प्रक्रिया को लेकर चर्चा हुई।हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
कंपनी के खिलाफ पहले से उठते रहे हैं सवाल
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अल्ट्रा क्लीन कंपनी के खिलाफ पहले भी आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने,कलेक्टर दर के अनुरूप भुगतान नहीं होने,सुरक्षा उपकरण उपलब्ध न कराने और श्रम कानूनों के पालन में कथित अनियमितताओं जैसे आरोप लगाए जा चुके हैं।इन मामलों को लेकर जांच की मांग विभिन्न मंचों पर उठाई गई है।
टेंडर प्रक्रिया से पहले निष्पक्ष जांच की मांग
सामाजिक संगठनों और कर्मचारियों का कहना है कि यदि किसी एजेंसी के खिलाफ गंभीर शिकायतें लंबित हैं,तो नई निविदा प्रक्रिया में आगे बढ़ने से पहले उन शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।उनका मानना है कि इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहेगी।
अन्य कंपनियों ने भी मांगा समान अवसर
टेंडर प्रक्रिया में शामिल अन्य कंपनियों का कहना है कि नगर निगम को सभी पात्र एजेंसियों को समान अवसर देना चाहिए। उनका आग्रह है कि किसी भी कंपनी के पक्ष में पक्षपात की आशंका पैदा करने वाली परिस्थितियों से बचा जाए और पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार संचालित हो।
आय से अधिक संपत्ति की जांच की भी उठी मांग
कुछ कर्मचारियों ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर अतिरिक्त स्वास्थ्य अधिकारी देवेंद्र सिंह चौहान की कथित आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग उठाई है।उनका कहना है कि यदि सक्षम एजेंसी जांच करती है तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच एजेंसी ने इस संबंध में कोई निष्कर्ष जारी किया है।
नगर निगम का पक्ष
इस पूरे मामले पर नगर निगम की ओर से कहा गया है कि टेंडर प्रक्रिया अभी जारी है और कई कंपनियों ने निविदाएं जमा की हैं।सभी प्रस्तावों पर नियमानुसार विचार किया जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए स्वास्थ्य अधिकारी अभिनव मिश्रा से संपर्क करने की बात भी कही गई।
अब इन सवालों के जवाब का इंतजार
•क्या टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से पूरी होगी?
•क्या पहले से लंबित शिकायतों की जांच कराई जाएगी?
•क्या सभी कंपनियों को समान अवसर मिलेगा?
•क्या आरोपों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में नगर निगम की कार्यप्रणाली और पूरी टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
