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जबलपुर नगर निगम टेंडर विवाद:मानवाधिकार आयोग को दस्तावेज नहीं मिलने का दावा,अल्ट्रा क्लीन कंपनी को लेकर फिर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं का आरोप—जांच से पहले कंपनी को लाभ पहुंचाने की कोशिश;नगर निगम अधिकारियों की भूमिका पर भी उठी निष्पक्ष जांच की मांग
जबलपुर।नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स टेंडर प्रक्रिया एक बार फिर विवादों में है।अल्ट्रा क्लीन कंपनी से जुड़े कथित वेतन भुगतान विवाद,बायोमेट्रिक उपस्थिति,श्रमिक सुविधाओं और टेंडर प्रक्रिया को लेकर पहले से उठ रही शिकायतों के बीच अब मानवाधिकार आयोग की जांच से जुड़ा नया दावा सामने आया है।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि जांच के दौरान आयोग की टीम को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए,जिससे पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।मानवाधिकार आयोग की टीम को दस्तावेज नहीं मिलने का दावा
शिकायतकर्ताओं के अनुसार,एक शिकायत की जांच के सिलसिले में मानवाधिकार आयोग की टीम स्मार्ट सिटी कार्यालय पहुंची थी।आरोप है कि टीम ने अतिरिक्त स्वास्थ्य अधिकारी देवेंद्र सिंह चौहान से अल्ट्रा क्लीन कंपनी से संबंधित अभिलेख मांगे,लेकिन दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।शिकायतकर्ताओं का दावा है कि आवश्यक रिकॉर्ड न मिलने के कारण टीम बिना दस्तावेज लिए लौट गई।इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि कंपनी का कार्य पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुआ है,तो जांच एजेंसी को दस्तावेज उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की देरी या कठिनाई नहीं होनी चाहिए थी।उनका आरोप है कि रिकॉर्ड उपलब्ध न कराए जाने से जांच प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई है।
टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी बढ़ा विवाद
नगर निगम की नई टेंडर प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गंभीर शिकायतें लंबित होने के बावजूद अल्ट्रा क्लीन कंपनी को दोबारा मौका देने की कोशिश की जा रही है।।उनका कहना है कि पहले सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच पूरी होनी चाहिए, उसके बाद ही किसी एजेंसी को नया ठेका देने पर निर्णय लिया जाए।
कर्मचारियों के पुराने आरोप भी बने चर्चा का विषय
आउटसोर्स कर्मचारियों ने पहले भी वेतन भुगतान में कथित अनियमितता,कलेक्टर दर के अनुसार भुगतान न होने और श्रमिक सुविधाओं की कमी जैसे आरोप लगाए थे।कुछ कर्मचारियों ने अपने बैंक खातों और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड भी सार्वजनिक किए थे।इन आरोपों की जांच की मांग विभिन्न मंचों पर की जा चुकी है।
समिति की भूमिका पर भी सवाल
शिकायतकर्ताओं ने टेंडर प्रक्रिया के लिए गठित समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।उनका कहना है कि यदि जांच एजेंसियों को समय पर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया, तो पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह होना स्वाभाविक है।
अब आगे क्या?
अब निगाहें मानवाधिकार आयोग और नगर निगम प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।यदि जांच एजेंसियां दोबारा दस्तावेज तलब करती हैं या विस्तृत जांच होती है,तो मामले के कई पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि सभी आरोपों की जांच पूरी होने तक संबंधित टेंडर प्रक्रिया को रोककर पारदर्शी जांच कराई जाए।
नगर निगम का पक्ष
इस संबंध में नगर निगम के अतिरिक्त स्वास्थ्य अधिकारी देवेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया जारी है और कई कंपनियों ने निविदाएं जमा की हैं।अधिक जानकारी के लिए स्वास्थ्य अधिकारी अभिनव मिश्रा से संपर्क किया जा सकता है।
