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Jabalpur News:विवादों के बीच फिर दौड़ में अल्ट्रा क्लीन?नगर निगम की नई टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल,शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग तेज

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विवादों के बीच फिर दौड़ में अल्ट्रा क्लीन?नगर निगम की नई टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल,शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग तेज

कर्मचारियों ने वेतन भुगतान,श्रमिक सुविधाओं और टेंडर प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल,पारदर्शिता की मांग

जबलपुर।नगर निगम जबलपुर में आउटसोर्स कर्मचारियों की आपूर्ति से जुड़ी नई टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों द्वारा वेतन भुगतान में कथित देरी,कलेक्टर दर के अनुरूप भुगतान नहीं होने,श्रमिक सुविधाओं में अनियमितताओं तथा अन्य शिकायतों के बाद अब मांग तेज हो गई है कि नई टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और उससे पहले सभी शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

कर्मचारियों का दावा—महीनों तक करना पड़ा वेतन का इंतजार

कई कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें नियमित रूप से काम करने के बावजूद कई-कई महीनों तक वेतन मिलने का इंतजार करना पड़ा।उनका यह भी कहना है कि उन्हें निर्धारित वेतन, भुगतान की पूरी जानकारी और संबंधित अभिलेख समय पर उपलब्ध नहीं कराए गए।इन आरोपों के बाद विभिन्न स्तरों पर जांच की मांग उठ चुकी है।

लंबित शिकायतों के बीच टेंडर प्रक्रिया पर सवाल

कर्मचारियों और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि किसी कंपनी के विरुद्ध पहले से शिकायतें लंबित हैं, तो उन शिकायतों का सत्यापन और निष्पक्ष जांच पूरी होने से पहले उसे नई टेंडर प्रक्रिया में शामिल किए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।उनका कहना है कि पहले सभी आरोपों की जांच होनी चाहिए,उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया अपनाई जाए।

रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच की उठी मांग

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी एजेंसी के खिलाफ श्रमिकों द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए हैं,तो पारदर्शिता के हित में वेतन भुगतान,उपस्थिति रिकॉर्ड,ईपीएफ,ईएसआई,श्रम कानूनों के पालन और निविदा की शर्तों से जुड़े दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सभी नियमों का पालन हुआ या नहीं।

नगर निगम से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने की मांग

कर्मचारियों और नागरिकों ने मांग की है कि नगर निगम नई टेंडर प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए,सभी पात्र कंपनियों को समान अवसर दे तथा शिकायतों की निष्पक्ष जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाए।उनका कहना है कि यह मामला केवल एक ठेके का नहीं,बल्कि कर्मचारियों के अधिकारों, सार्वजनिक धन और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ा है।

प्रशासन के सामने बड़ा सवाल

अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या नगर निगम नई टेंडर प्रक्रिया से पहले सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराएगा या प्रक्रिया पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगी।इस संबंध में अंतिम स्थिति प्रशासनिक जांच और संबंधित अधिकारियों के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।

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