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Electricity Department|जबलपुर में लाइनमैनों की भारी कमी,450 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 280 कर्मचारी;बारिश में बढ़ रहीं बिजली उपभोक्ताओं की मुश्किलें

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जबलपुर में लाइनमैनों की भारी कमी,450 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 280 कर्मचारी;बारिश में बढ़ रहीं बिजली उपभोक्ताओं की मुश्किलें

सिटी सर्किल को मिले 18 नए लाइनमैन,फिर भी फॉल्ट सुधारने के लिए पर्याप्त नहीं स्टाफ;आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे चल रही व्यवस्था

जबलपुर।बिजली व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले लाइनमैनों की संख्या लगातार चिंता का विषय बनी हुई है।जिले में 450 पद स्वीकृत होने के बावजूद वर्तमान में केवल लगभग 280 लाइनमैन ही कार्यरत हैं।ऐसे में बारिश के मौसम में बढ़ने वाले बिजली फॉल्ट, तार टूटने और ब्रेकडाउन जैसी समस्याओं का समय पर समाधान करना बिजली कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

हालांकि बिजली कंपनी ने हाल ही में प्रशिक्षित कर्मचारियों की नई खेप विभिन्न सर्किलों में भेजी है,लेकिन मौजूदा जरूरतों के मुकाबले यह संख्या बेहद कम मानी जा रही है।

सिटी सर्किल को मिले 18 नए लाइनमैन

बिजली कंपनी द्वारा हाल ही में प्रशिक्षण पूरा करने वाले लाइनमैनों को विभिन्न क्षेत्रों में तैनात किया गया है।इसी क्रम में जबलपुर सिटी सर्किल को 18 नए लाइनमैन मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन कर्मचारियों को आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग जोनों में तैनात किया जा रहा है, जिससे फॉल्ट सुधार कार्यों में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

जानकारी के अनुसार इन कर्मचारियों की भर्ती वर्ष 2025 में हुई थी और सभी आवश्यक प्रशिक्षण एवं तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद इन्हें फील्ड ड्यूटी पर भेजा गया है।

एक लाइनमैन पर कई इलाकों का भार

बिजली विभाग में कर्मचारियों की कमी का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।वर्तमान स्थिति में एक लाइनमैन को कई मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों की बिजली लाइनों की निगरानी,मरम्मत,फॉल्ट सुधार और आपातकालीन शिकायतों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।

बारिश के दौरान जब एक साथ कई जगह पेड़ गिरने,तार टूटने या ट्रांसफार्मर संबंधी शिकायतें सामने आती हैं,तब सीमित स्टाफ के कारण शिकायतों के निराकरण में देरी होना स्वाभाविक हो जाता है।

बारिश के मौसम में बढ़ती है चुनौती

मानसून के दौरान बिजली विभाग की परीक्षा सबसे कठिन होती है।तेज हवा,बारिश और जलभराव के कारण बिजली लाइनों में फॉल्ट की घटनाएं बढ़ जाती हैं।कई बार एक ही समय में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज होती हैं।

ऐसी परिस्थितियों में कर्मचारियों की कमी उपभोक्ताओं की परेशानी को और बढ़ा देती है।लोगों को घंटों बिजली बहाली का इंतजार करना पड़ता है,जिससे घरेलू और व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं।

जरूरत चार गुना,उपलब्धता सीमित

सिटी सर्किल में वर्तमान में करीब 131 लाइनमैन कार्यरत हैं, जबकि विभागीय सूत्रों के अनुसार वास्तविक आवश्यकता इससे कई गुना अधिक है।कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही हैं, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं है।

आउटसोर्स कर्मचारी अनुभव तो हासिल कर चुके हैं,लेकिन नियमित पदों की कमी के कारण विभाग की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।

बिना प्रशिक्षण नहीं दिया जा सकता लाइन का काम

बिजली लाइनों पर कार्य करना अत्यंत जोखिम भरा माना जाता है।इसी वजह से किसी भी नए कर्मचारी को सीधे फील्ड में नहीं भेजा जाता।प्रशिक्षण,तकनीकी परीक्षा और सुरक्षा मानकों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उन्हें लाइन संबंधी कार्य सौंपे जाते हैं।

यही कारण है कि नई भर्तियां होने के बावजूद कर्मचारियों को मैदान में उतरने में काफी समय लग जाता है।

नियमित भर्ती की मांग तेज

बिजली उपभोक्ताओं और कर्मचारी संगठनों का मानना है कि केवल आउटसोर्स व्यवस्था के भरोसे बिजली तंत्र को मजबूत नहीं बनाया जा सकता।यदि भविष्य में बिजली व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है तो स्वीकृत पदों के अनुरूप नियमित भर्ती प्रक्रिया को तेज करना होगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित लाइनमैन उपलब्ध होने पर फॉल्ट सुधार की गति बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।

असली सवाल:फॉल्ट के बाद कितनी जल्दी पहुंचेगा लाइनमैन?

बिजली उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा पदों की संख्या नहीं, बल्कि सेवा की गति है।जब बारिश के दौरान बिजली गुल होती है तो लोगों की पहली चिंता यही होती है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद लाइनमैन कितनी जल्दी मौके पर पहुंचेगा और बिजली कब तक बहाल होगी।

फिलहाल 18 नए लाइनमैनों की तैनाती से कुछ राहत की उम्मीद जरूर जगी है,लेकिन स्वीकृत और उपलब्ध कर्मचारियों के बीच का बड़ा अंतर यह संकेत देता है कि जबलपुर की बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अभी लंबा सफर तय करना बाकी है।


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