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समग्र पोर्टल के नए नियमों से बढ़ी परेशानी,एक नाम जुड़वाने में लग रहे कई चक्कर
नवविवाहिताओं से लेकर छोटे बच्चों तक प्रभावित, दस्तावेजों की नई अनिवार्यता बनी सिरदर्द
जबलपुर।मध्यप्रदेश के समग्र पोर्टल में किए गए तकनीकी बदलावों के बाद नागरिकों को नई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पहले जहां परिवार के सदस्य का नाम जोड़ना या संशोधन कराना अपेक्षाकृत आसान था, वहीं अब नई व्यवस्था के तहत कई अतिरिक्त दस्तावेजों और ऑनलाइन सत्यापन की अनिवार्यता ने प्रक्रिया को जटिल बना दिया है। इसका सबसे अधिक असर नवविवाहित महिलाओं, आरक्षित वर्ग के परिवारों और छोटे बच्चों के पंजीयन पर दिखाई दे रहा है।
प्रदेशभर के लोक सेवा केंद्रों, नगर निगम कार्यालयों और पंचायत स्तर पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है। कई मामलों में आवेदन तकनीकी कारणों से लंबित हो रहे हैं, जिससे नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
विवाह के बाद नाम जोड़ना अब आसान नहीं
नई व्यवस्था के तहत विवाह के बाद महिला का नाम ससुराल की समग्र आईडी में दर्ज कराने के लिए अब केवल विवाह प्रमाण पत्र पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। संबंधित महिला को पहले अपने मायके के स्थानीय निकाय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना होगा।
एनओसी के डिजिटल सत्यापन के बाद ही नाम स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। इससे एक जिले या शहर से दूसरे जिले में विवाह करने वाली महिलाओं को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जाति प्रमाण पत्र नहीं तो बदल जाएगा वर्ग
समग्र पोर्टल में अब वर्ग निर्धारण पूरी तरह डिजिटल दस्तावेजों पर आधारित कर दिया गया है। यदि आवेदक डिजिटल जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाता है तो उसका पंजीयन सामान्य वर्ग में किया जा रहा है।
इस बदलाव के कारण कई पात्र परिवारों को आशंका है कि भविष्य में सरकारी योजनाओं और छात्रवृत्तियों का लाभ लेने में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
बच्चों के नाम दर्ज कराने में भी बढ़ी मुश्किल
पहले माता-पिता के जाति प्रमाण पत्र के आधार पर बच्चों का वर्ग निर्धारित हो जाता था, लेकिन अब पोर्टल बच्चे के नाम से अलग डिजिटल जाति प्रमाण पत्र की मांग कर रहा है।
इस वजह से अभिभावकों को छोटे बच्चों के दस्तावेज बनवाने के लिए तहसील, कलेक्ट्रेट और लोक सेवा केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कई परिवारों का कहना है कि नई व्यवस्था ने उनके समय और खर्च दोनों को बढ़ा दिया है।
लोक सेवा केंद्रों पर बढ़ रहा दबाव
नए नियम लागू होने के बाद समग्र आईडी से जुड़े कार्यों के लिए लोक सेवा केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। ऑपरेटरों का कहना है कि दस्तावेजों की जांच और ऑनलाइन सत्यापन में अधिक समय लग रहा है, जिससे कार्यों के निपटारे की गति धीमी हो गई है।
सुविधा के नाम पर बढ़ी जटिलता
सरकार का उद्देश्य रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है, लेकिन नागरिकों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था ने प्रक्रिया को पहले से अधिक जटिल बना दिया है। यदि नियमों में व्यवहारिक सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में समग्र पोर्टल से जुड़ी शिकायतों और लंबित मामलों की संख्या और बढ़ सकती है।
