जबलपुर | शिक्षा | साहित्य एवं संस्कृति
तुलसीदास जी ने दिया भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता का महान ग्रंथ:डॉ.शिव कुमार व्यास
तुलसी जयंती पर गोविंदराम सेकसरिया महाविद्यालय में हुआ विशेष आयोजन,वक्ताओं ने तुलसीदास के साहित्यिक योगदान को किया याद
जबलपुर।स्थानीय गोविंदराम सेकसरिया अर्थ वाणिज्य महाविद्यालय (स्वशासी),जबलपुर के हिंदी विभाग एवं भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में तुलसी जयंती के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम में संत कवि गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य,भारतीय संस्कृति और सामाजिक समरसता में उनके योगदान पर विचार रखे गए।
तुलसीदास की रचनाओं में भारतीय संस्कृति और संस्कारों का संदेश
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शिव कुमार व्यास ने कहा कि तुलसीदास जी ने भारतीय संस्कृति और संस्कारों को जिस व्यापक रूप में प्रस्तुत किया,वह आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी है।उनके द्वारा रचित महान ग्रंथ हमें अपने दायित्वों का बोध कराने के साथ-साथ सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि तुलसीदास का साहित्य केवल धार्मिक या आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है,बल्कि उसमें समाज और जीवन से जुड़े अनेक आदर्शों को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
भारतीय ज्ञान परंपरा में तुलसी साहित्य का विशेष महत्व
कार्यक्रम में वक्ताओं ने तुलसीदास जी के साहित्य को भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए उनके विचारों और रचनाओं की प्रासंगिकता पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में तुलसी साहित्य से मिलने वाले मानवीय मूल्यों और समरसता के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।
महाविद्यालय के पदाधिकारी एवं शिक्षक रहे उपस्थित
इस अवसर पर महाविद्यालय के उपप्राचार्य डॉ.ज्ञानेंद्र त्रिपाठी, वाणिज्य विभाग के अधिष्ठाता डॉ.डी.बी.कोस्टा, वाणिज्य विभागाध्यक्ष डॉ.आर.के.गौतम तथा भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की सदस्या डॉ.सुनीता उपाध्याय सहित अन्य शिक्षक एवं सदस्य उपस्थित रहे।
डॉ.नीरज कुमार केशरवानी ने किया संचालन
कार्यक्रम का संचालन डॉ.नीरज कुमार केशरवानी ने किया। कार्यक्रम के दौरान तुलसीदास जी के साहित्यिक योगदान और उनके द्वारा दिए गए सामाजिक समरसता के संदेश को स्मरण करते हुए उनके विचारों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताया गया।
जबलपुर में आयोजित तुलसी जयंती कार्यक्रम ने भारतीय संस्कृति,साहित्य और सामाजिक समरसता के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया।
