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Exclusive|जबलपुर नगर निगम में अल्ट्रा क्लीन के ठेके पर फिर उठे सवाल,सहायक स्वास्थ्य अधिकारी अर्जुन यादव की भूमिका जांच के घेरे में

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जबलपुर नगर निगम में अल्ट्रा क्लीन के ठेके पर फिर उठे सवाल,सहायक स्वास्थ्य अधिकारी अर्जुन यादव की भूमिका जांच के घेरे में

पेटी ठेकेदारी से लेकर टेंडर प्रक्रिया में कथित भूमिका तक उठ रहे सवाल,दस्तावेजों की जांच की मांग

जबलपुर।नगर निगम की आउटसोर्स व्यवस्था में कर्मचारियों की आपूर्ति से जुड़े अल्ट्रा क्लीन कंपनी के प्रस्तावित ठेके को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।इस बार विवाद कंपनी से ज्यादा सहायक स्वास्थ्य अधिकारी अर्जुन यादव की कथित भूमिका और कंपनी से बताए जा रहे संबंधों को लेकर है।

आरोप लगाया जा रहा है कि अर्जुन यादव की अल्ट्रा क्लीन कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक से कथित नजदीकी रही है।इसी आधार पर टेंडर प्रक्रिया में उनकी भूमिका को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।हालांकि,इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

टेंडर समिति में भूमिका ने बढ़ाई चर्चा

मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि यदि किसी अधिकारी के किसी निविदाकार कंपनी से व्यावसायिक संबंध होने का आरोप लगाया जा रहा है,तो उस अधिकारी की टेंडर प्रक्रिया में क्या भूमिका रही और क्या किसी स्तर पर हितों के टकराव की स्थिति बनी?

आरोप लगाने वालों की मांग है कि टेंडर समिति की बैठक की कार्यवाही,अधिकारियों के हस्ताक्षर,तकनीकी दस्तावेज, मूल्यांकन रिपोर्ट और कंपनी को दिए जाने वाले संभावित कार्यादेश की जांच कराई जाए।

पेटी ठेकेदारी के आरोपों की भी जांच की मांग

अर्जुन यादव को लेकर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि वे कथित तौर पर अल्ट्रा क्लीन से जुड़े काम में पेटी ठेकेदार के रूप में जुड़े रहे हैं।इन दावों की फिलहाल स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यदि सरकारी दस्तावेजों,भुगतान रिकॉर्ड या अन्य प्रमाणों से ऐसे किसी व्यावसायिक संबंध की पुष्टि होती है,तो टेंडर प्रक्रिया में उनकी भूमिका और संभावित हितों के टकराव की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

अल्ट्रा क्लीन को दोबारा काम मिलने की चर्चा

नगर निगम की आउटसोर्स व्यवस्था में अल्ट्रा क्लीन कंपनी को दोबारा काम मिलने की संभावित प्रक्रिया को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।आरोप है कि कंपनी को कई जोन का काम दिलाने के लिए अंदरूनी स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

हालांकि,यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि कंपनी को वास्तव में कितने जोन का कार्यादेश दिया जा रहा है और चयन प्रक्रिया किन निर्धारित नियमों के तहत पूरी की जा रही है।

आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग

इसी बीच नगर निगम के एक अधिकारी द्वारा अर्जुन यादव की कथित संपत्ति को लेकर भी जांच की मांग किए जाने की बात सामने आई है।आरोप लगाया गया है कि उनके और उनके परिजनों से जुड़े नामों पर बड़ी मात्रा में संपत्ति हो सकती है।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड,आय के स्रोत, रजिस्ट्री दस्तावेज और संबंधित विभागों के रिकॉर्ड की आधिकारिक जांच जरूरी होगी।

किन दस्तावेजों से सामने आ सकता है पूरा मामला?

मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए इन दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है—

•अल्ट्रा क्लीन कंपनी का टेंडर आवेदन

•तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन रिपोर्ट

•टेंडर समिति की बैठक की कार्यवाही

•संबंधित अधिकारियों की नोटशीट और हस्ताक्षर

•कंपनी के पूर्व कार्यादेश और भुगतान रिकॉर्ड

•जोनवार कार्यादेश

•अधिकारियों एवं कंपनी के बीच आधिकारिक पत्राचार

•अर्जुन यादव से जुड़े संभावित व्यावसायिक हितों के दस्तावेज

•संपत्ति एवं आय से संबंधित वैधानिक रिकॉर्ड

•नगर निगम प्रशासन से पारदर्शिता की उम्मीद

पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टेंडर प्रक्रिया में शामिल सभी कंपनियों के लिए समान नियम और समान मापदंड अपनाए जा रहे हैं? साथ हीयह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित अधिकारी की किसी निविदाकार कंपनी से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष व्यावसायिक संबद्धता है या नहीं।

यदि लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं तो दस्तावेजों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।वहीं यदि जांच में कोई तथ्य सामने आता है तो जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी शुरू होनी चाहिए।

फिलहाल अर्जुन यादव,अल्ट्रा क्लीन कंपनी,मुकेश कालवे और विकास रजक के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।संबंधित पक्षों का जवाब और आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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