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अमरकंटक में दृष्टिबाधित छात्र की मौत:मुआवजा मिले या न मिले,परिजन बोले—आशीष दीक्षित की भूमिका की हो निष्पक्ष जांच
शिरीष नामदेव की मौत के बाद उठे सवाल,परिजनों ने कहा—एक अधिकारी निलंबित हुआ,लेकिन पूरी प्रशासनिक श्रृंखला की जवाबदेही अब भी बाकी
जबलपुर।अमरकंटक में क्षेत्र भ्रमण के दौरान दृष्टिबाधित छात्र शिरीष कुमार नामदेव की नदी में डूबने से हुई मौत के मामले ने विद्यार्थियों की सुरक्षा,भ्रमण की अनुमति और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।हादसे के बाद तत्कालीन प्रभारी शिवेंद्र सिंह परिहार के निलंबन की कार्रवाई हुई,लेकिन परिजन अब संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
मृत छात्र के भाई आशीष नामदेव का कहना है कि परिवार की प्राथमिकता केवल मुआवजा नहीं है।उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और दोष सिद्ध होने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
महत्वपूर्ण:आशीष दीक्षित समेत किसी भी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।इसलिए उनकी भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही किया जा सकता है।
22 फरवरी के हादसे ने खड़े किए कई सवाल
22 फरवरी 2026 को क्षेत्र भ्रमण के दौरान शिरीष कुमार नामदेव की अमरकंटक में नदी में डूबने से मौत हो गई थी। घटना के बाद से परिवार सदमे में है।परिजनों का कहना है कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को ऐसे स्थान पर ले जाते समय सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए जाने चाहिए थे।
अब जांच का विषय यह है कि विद्यार्थियों के भ्रमण से पहले क्या सुरक्षा आकलन किया गया था और उनके साथ पर्याप्त संख्या में जिम्मेदार कर्मचारी एवं अधिकारी मौजूद थे या नहीं।
अमरकंटक ले जाने की अनुमति किसने दी?
मामले में सबसे अहम सवाल विद्यार्थियों को अमरकंटक ले जाने की अनुमति से जुड़ा है।
जांच में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि—
क्षेत्र भ्रमण के लिए लिखित अनुमति किसने दी?
अनुमति किस अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में थी?
विद्यार्थियों के साथ कौन-कौन से कर्मचारी गए थे?
यात्रा और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसे सौंपी गई थी?
क्या नदी एवं जल क्षेत्र के जोखिम का पहले से आकलन किया गया था?
भ्रमण से संबंधित नोटशीट और आदेश में क्या उल्लेख है?
यदि अनुमति जारी हुई थी तो संबंधित दस्तावेज सामने आने से जिम्मेदारी की पूरी श्रृंखला स्पष्ट हो सकती है।
8 फरवरी के भ्रमण की भी जांच जरूरी
मामले में 8 फरवरी 2026 को भी दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के अनूपपुर-अमरकंटक क्षेत्र में भ्रमण का उल्लेख सामने आया है। ऐसे में 8 फरवरी और 22 फरवरी के दोनों भ्रमण के रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
यह देखा जाना चाहिए कि दोनों यात्राओं के लिए किस स्तर से अनुमति मिली थी,कितने विद्यार्थी और कर्मचारी शामिल थे तथा क्या सुरक्षा संबंधी कोई रिपोर्ट तैयार की गई थी।
एक अधिकारी निलंबित,अब दूसरे अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
हादसे के बाद तत्कालीन प्रभारी शिवेंद्र सिंह परिहार को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई। हालांकि, परिजनों और मामले से जुड़े लोगों का सवाल है कि यदि भ्रमण का निर्णय किसी व्यापक प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हुआ था तो उस प्रक्रिया में शामिल अन्य अधिकारियों की भूमिका की भी जांच क्यों न हो?
इसी क्रम में आशीष दीक्षित की भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई जा रही है।यह जांच ही स्पष्ट कर सकती है कि भ्रमण की अनुमति और विद्यार्थियों की सुरक्षा व्यवस्था में उनकी कोई प्रशासनिक भूमिका थी या नहीं।
पूर्व प्राचार्य ने भी उठाए अनुमति और अधिकार क्षेत्र पर सवाल
मामले से जुड़े रमेश कुमार त्रिपाठी,जो रीवा स्थित यमुना प्रसाद शास्त्री नेत्रहीन एवं विकलांग महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य बताए गए हैं,के हवाले से भी अनुमति और अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल सामने आए हैं।
उनके अनुसार,यदि किसी अधिकारी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अनुमति दी थी तो यह जांच का विषय होना चाहिए कि उसे ऐसा करने का अधिकार किस नियम के तहत मिला था।
इन दावों की भी आधिकारिक जांच से पुष्टि होना आवश्यक है।
दस्तावेजों की जांच से सामने आ सकता है पूरा सच
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इन रिकॉर्ड की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी:
क्षेत्र भ्रमण की अनुमति और स्वीकृति आदेश
संबंधित अधिकारियों की नोटशीट
विद्यार्थियों की अधिकृत सूची
साथ जाने वाले कर्मचारियों की सूची
वाहन एवं यात्रा संबंधी रिकॉर्ड
छात्रावास से रवाना होने और वापसी का रिकॉर्ड
विद्यार्थियों की उपस्थिति एवं निगरानी व्यवस्था
सुरक्षा संबंधी निर्देश
8 फरवरी और 22 फरवरी के भ्रमण से जुड़े दस्तावेज
हादसे के बाद तैयार जांच रिपोर्ट
निलंबन आदेश एवं विभागीय जांच की फाइल
परिवार का सवाल—सिर्फ मुआवजा नहीं,जवाबदेही भी तय हो
शिरीष नामदेव के परिवार के लिए यह मामला केवल आर्थिक मुआवजे तक सीमित नहीं है।परिवार चाहता है कि यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित जिम्मेदारी तय की जाए।
आशीष नामदेव का कहना है कि परिवार अपने भाई की मौत का वास्तविक कारण और जिम्मेदार व्यवस्था का जवाब चाहता है।
सबसे बड़ा सवाल—आखिर जिम्मेदार कौन?
दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को अमरकंटक ले जाने की अनुमति किसने दी?
सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी?
क्या सभी आवश्यक अनुमति मौजूद थीं?
क्या नदी क्षेत्र के खतरे का आकलन किया गया था?
8 फरवरी के भ्रमण से कोई सबक लिया गया था या नहीं?
और यदि किसी अधिकारी की भूमिका थी तो उसकी जांच किस स्तर पर हुई?
शिरीष कुमार नामदेव की मौत की निष्पक्ष जांच तभी पूरी मानी जाएगी,जब केवल एक कर्मचारी के निलंबन तक मामला सीमित न रहे,बल्कि अनुमति से लेकर सुरक्षा,निगरानी और हादसे के बाद की कार्रवाई तक पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया की जांच हो।
