Civic Issues/Nagar Nigam/Investigation/ Local Administration
भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच टेंडर समिति की कमान विवादित अधिकारी को?अल्ट्रा क्लीन कंपनी को दोबारा ठेका दिलाने के आरोपों से घिरा नगर निगम
जबलपुर नगर निगम में आउटसोर्स टेंडर पर बढ़ा विवाद, शिकायतकर्ताओं ने उठाए गंभीर सवाल;निष्पक्ष जांच की मांग तेज
जबलपुर।नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स व्यवस्था एक बार फिर विवादों के केंद्र में है।कर्मचारियों के वेतन, टेंडर प्रक्रिया और ठेका कंपनियों को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब टेंडर समिति की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आने लगी है।शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि विवादों में घिरे अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपकर कथित रूप से कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।अल्ट्रा क्लीन कंपनी को लेकर बढ़े सवाल
नगर निगम में कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली अल्ट्रा क्लीन कंपनी पहले से ही कर्मचारियों के वेतन भुगतान,श्रम कानूनों के पालन और टेंडर शर्तों को लेकर उठी शिकायतों के कारण चर्चा में है। कर्मचारियों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई गंभीर शिकायतें दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच की घोषणा नहीं की गई।
इसी वजह से यह सवाल लगातार उठ रहा है कि यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो संबंधित दस्तावेजों की सार्वजनिक जांच और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया अब तक क्यों शुरू नहीं हुई।
टेंडर समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति पर भी उठे सवाल
पूरे मामले में अब नगर निगम के ऑफिस सुपरिटेंडेंट अमित कुमार दुबे का नाम भी चर्चा में है,जो वर्तमान में टेंडर समिति के अध्यक्ष हैं।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पूर्व में तत्कालीन नगर निगम आयुक्त प्रीति यादव के कार्यकाल के दौरान विवादों के बाद उन्हें उस विभाग से हटाया गया था।अब दोबारा उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि,इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की ओर से नहीं की गई है।
पुराने ठेकेदारों की वापसी की तैयारी?
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि पहले विवादों में रहे कुछ ठेकेदारों को दोबारा अवसर दिलाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाए हैं कि—
•क्या पूर्व में बीच कार्यकाल में काम छोड़ने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई हुई?
•क्या उनकी बैंक गारंटी जब्त की गई?
•क्या उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया?
•क्या अनुबंध समाप्त करने की प्रक्रिया पूरी की गई?
इन सभी बिंदुओं पर नगर निगम की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
अल्ट्रा क्लीन कंपनी और अधिकारियों की भूमिका पर भी चर्चा
शिकायतकर्ताओं ने कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे, जनरल मैनेजर विकास रजक तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि यदि कर्मचारियों की शिकायतें और भुगतान संबंधी आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
नगर निगम प्रशासन से उठी पारदर्शिता की मांग
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल तेज हो गए हैं। नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सभी टेंडर दस्तावेज, भुगतान रिकॉर्ड और निर्णय प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के संदेह की स्थिति समाप्त हो सके।
अब इन सवालों के जवाब का इंतजार
पूरे मामले में कई अहम सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं—
•अल्ट्रा क्लीन कंपनी से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र जांच कब होगी?
•कर्मचारियों के वेतन संबंधी आरोपों की पुष्टि कौन करेगा?
•टेंडर समिति के गठन और अध्यक्ष की नियुक्ति किन आधारों पर की गई?
•यदि पूर्व में किसी अधिकारी पर कार्रवाई हुई थी तो उन्हें दोबारा जिम्मेदारी क्यों दी गई?
•टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है?
इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। अब निगाहें नगर निगम प्रशासन,जिला प्रशासन और संबंधित जांच एजेंसियों पर हैं कि वे शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर तथ्य सार्वजनिक करते हैं या नहीं।
