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Labour News|जबलपुर नगर निगम टेंडर विवाद:शपथ पत्र में पूरा वेतन देने का दावा, कर्मचारियों ने लगाया आधी तनख्वाह देने का आरोप

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जबलपुर नगर निगम टेंडर विवाद:शपथ पत्र में पूरा वेतन देने का दावा,कर्मचारियों ने लगाया आधी तनख्वाह देने का आरोप

आउटसोर्स कर्मचारियों ने बैंक रिकॉर्ड के आधार पर उठाए सवाल,टेंडर की शर्तों और श्रम कानूनों के पालन की मांग

जबलपुर।नगर निगम जबलपुर की आउटसोर्स व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है।कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली अल्ट्रा क्लीन एंड केयर कंपनी पर आउटसोर्स कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने टेंडर हासिल करने के लिए शपथ पत्र में श्रम कानूनों का पालन और नियमानुसार वेतन देने का दावा किया,लेकिन वास्तविकता में कर्मचारियों को निर्धारित मानकों से कम भुगतान किया गया।इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले में जांच की मांग की जा रही है।

टेंडर के साथ दिया गया था नियमों के पालन का शपथ पत्र

नगर निगम की निविदा प्रक्रिया के तहत प्रत्येक एजेंसी को 500 रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पर शपथ पत्र देना अनिवार्य होता है।इस शपथ पत्र में एजेंसी यह घोषणा करती है कि वह कर्मचारियों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन देगी,सभी श्रम कानूनों का पालन करेगी और किसी भी प्रकार की गलत जानकारी या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में अनुबंध समाप्त करने सहित वैधानिक कार्रवाई स्वीकार करेगी।

इसी शपथ पत्र को आधार बनाकर अब कर्मचारियों ने कंपनी के दावों पर सवाल उठाए हैं।

कर्मचारियों का दावा— बैंक खातों में पहुंची कम राशि

आउटसोर्स कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें कई महीनों तक निर्धारित वेतन से कम राशि का भुगतान किया गया।कुछ कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अपने बैंक स्टेटमेंट और वेतन भुगतान से जुड़े दस्तावेज भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए हैं।उनका दावा है कि वर्षों से आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है और शिकायत करने पर कार्रवाई के बजाय दबाव बनाया जाता है।

शपथ पत्र और भुगतान में अंतर पर उठे सवाल

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि कंपनी ने टेंडर के दौरान नियमों का पालन करने का लिखित आश्वासन दिया था,तो कर्मचारियों को कम भुगतान क्यों किया गया।उनका कहना है कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं,तो यह मामला केवल श्रम कानूनों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि निविदा की शर्तों और शपथ पत्र में किए गए दावों के उल्लंघन का भी विषय बनेगा।

कंपनी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

शिकायतकर्ताओं ने कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे, जनरल मैनेजर विकास रजक तथा नगर निगम के अतिरिक्त स्वास्थ्य अधिकारी देवेंद्र सिंह चौहान की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।उनका आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

इन आरोपों पर संबंधित कंपनी और अधिकारियों का विस्तृत पक्ष इस खबर के प्रकाशन तक उपलब्ध नहीं हो सका है।

जांच की मांग हुई तेज

कर्मचारियों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।उनका कहना है कि बैंक स्टेटमेंट,आरटीजीएस रिकॉर्ड, वेतन रजिस्टर उपस्थिति रजिस्टर,ईपीएफ,ईएसआईसी और टेंडर दस्तावेजों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल

मामले के सामने आने के बाद नगर निगम की आउटसोर्स व्यवस्था और टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो संबंधित एजेंसी के विरुद्ध अनुबंध समाप्त करने,ब्लैकलिस्ट करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने जैसी कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब सबकी नजर जांच पर

पूरा मामला अब जांच एजेंसियों और नगर निगम प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिका हुआ है।यदि स्वतंत्र जांच होती है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही हैं और टेंडर की शर्तों का पालन वास्तव में हुआ या नहीं।

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