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Special Report|जोन-14 में हाजिरी पर बड़ा सवाल:‘इन’ दर्ज,‘आउट’ का हिसाब गायब होने का आरोप

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जोन-14 में हाजिरी पर बड़ा सवाल:‘इन’ दर्ज,‘आउट’ का हिसाब गायब होने का आरोप

156 श्रमिकों की स्वीकृति,मौके पर करीब 70 के काम करने का दावा;हाजिरी,मस्टर रोल और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की मांग

जबलपुर।नगर निगम जबलपुर के जोन क्रमांक-14 में आउटसोर्स कर्मचारियों की हाजिरी और भुगतान व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।आरोप है कि कुछ कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज होने के बावजूद उनके ‘आउट’ रिकॉर्ड और वास्तविक कार्यस्थल पर मौजूदगी का स्पष्ट हिसाब नहीं मिल रहा है।मामला सामने आने के बाद हाजिरी रिकॉर्ड से लेकर आउटसोर्स कंपनी के बिल भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग उठ रही है।

156 की स्वीकृति,मौके पर करीब 70 कर्मचारियों का दावा

सूत्रों के अनुसार जोन-14 में करीब 156 आउटसोर्स श्रमिकों की स्वीकृति बताई जा रही है,जबकि मौके पर लगभग 70 कर्मचारियों के ही काम करने का दावा किया जा रहा है।यदि यह अंतर आधिकारिक जांच में सही पाया जाता है,तो कर्मचारियों की वास्तविक संख्या,मस्टर रोल,हाजिरी और कंपनी को किए गए भुगतान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

‘इन’दर्ज है तो‘आउट’ कहां?

पूरे मामले में सबसे अहम सवाल कर्मचारियों की इन-आउट हाजिरी को लेकर है।यदि सुबह कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज की गई,तो क्या दिन समाप्त होने तक उनकी आउट एंट्री भी दर्ज हुई?क्या एईबीएएस, बायोमेट्रिक अथवा फोटो अटेंडेंस रिकॉर्ड में दोनों समय की जानकारी उपलब्ध है?

यही रिकॉर्ड यह स्पष्ट कर सकता है कि संबंधित कर्मचारी वास्तव में पूरे समय कार्यस्थल पर मौजूद थे या नहीं।

फर्जी हाजिरी के नाम पर ₹100 लेने का आरोप

मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि कुछ आउटसोर्स कर्मचारियों को कथित तौर पर हाजिरी दर्ज कराने के नाम पर ₹100 तक देने के लिए कहा जाता है।हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।यदि शिकायत सही पाई जाती है तो यह भी जांच का विषय होगा कि ऐसी व्यवस्था किसकी जानकारी में संचालित हो रही थी।

हाजिरी से बिल भुगतान तक जांच जरूरी

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पिछले कई महीनों के—

•इन-आउट लॉग

•एईबीएएस/बायोमेट्रिक डेटा

•फोटो अटेंडेंस

•मस्टर रोल

•स्वीकृत श्रमिकों की सूची

•जोनवार ड्यूटी चार्ट

•कंपनी के प्रस्तुत बिल

•भुगतान संबंधी फाइलें

•अधिकारियों के सत्यापन और हस्ताक्षर

का आपस में मिलान कराने की मांग की जा रही है।

यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में बड़ा अंतर सामने आता है तो यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि संबंधित हाजिरी को किस अधिकारी ने सत्यापित किया और उसी आधार पर भुगतान की अनुशंसा किस स्तर से की गई।

सहायक स्वास्थ्य अधिकारी अर्जुन यादव की भूमिका पर सवाल

इस मामले में सहायक स्वास्थ्य अधिकारी अर्जुन यादव की भूमिका को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं।आरोप है कि हाजिरी सत्यापन और बिल प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ऐसे में जांच का विषय यह होना चाहिए कि संबंधित अधिकारी की वास्तविक प्रशासनिक जिम्मेदारी क्या थी,किन दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर हैं और भुगतान प्रक्रिया में उनका स्तर क्या था।

अल्ट्रा क्लीन कंपनी से कथित संबंधों की भी जांच की मांग

आउटसोर्स व्यवस्था को लेकर अल्ट्रा क्लीन कंपनी और उसके पदाधिकारियों के साथ अधिकारियों के कथित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।कुछ आरोपों में कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे और जनरल मैनेजर विकास रजक के साथ अधिकारियों की कथित नजदीकी का उल्लेख किया गया है।

इन आरोपों की पुष्टि के लिए कंपनी के अनुबंध,टेंडर दस्तावेज, कार्यादेश,बिल और भुगतान रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी। केवल आरोपों के आधार पर किसी अधिकारी या कंपनी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।

आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच की मांग

अर्जुन यादव की संपत्ति को लेकर भी कुछ लोगों द्वारा आय से अधिक संपत्ति की जांच की मांग की जा रही है।आरोप लगाए गए हैं कि संपत्ति और आउटसोर्स कार्यों से जुड़े मामलों की विस्तृत जांच में कई तथ्य सामने आ सकते हैं।

हालांकि इन दावों की पुष्टि किसी जांच एजेंसी अथवा आधिकारिक दस्तावेज से होना अभी बाकी है।इसलिए संबंधित संपत्तियों,आय के स्रोतों और वित्तीय लेनदेन की जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।

जांच हुई तो साफ होगी पूरी तस्वीर

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जोन-14 में दर्ज हाजिरी और वास्तविक काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में कितना अंतर है?यदि इन-आउट रिकॉर्ड,मस्टर रोल और भुगतान बिलों का मिलान कराया जाता है तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

नगर निगम प्रशासन यदि पिछले महीनों के रिकॉर्ड का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराता है तो यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि कहीं वास्तविक कर्मचारियों से अधिक संख्या दिखाकर भुगतान तो नहीं किया गया।

फिलहाल पूरा मामला आरोपों और दावों के स्तर पर है। संबंधित अधिकारियों और कंपनी का पक्ष सामने आने तथा आधिकारिक जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

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