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Exclusive|कमीशन का खेल उजागर होते ही बदले सुर?अल्ट्रा क्लीन कंपनी को नोटिस,अब बचाव में जुटे जिम्मेदार!

कमीशन का खेल उजागर होते ही बदले सुर?अल्ट्रा क्लीन कंपनी को नोटिस,अब बचाव में जुटे जिम्मेदार!

मानवाधिकार आयोग और ईपीएफओ की कार्रवाई के बाद बढ़ा दबाव,नगर निगम की अतिक्रमण शाखा ने थमाया नोटिस

जबलपुर|अमित तिवारी की विशेष रिपोर्ट

नगर निगम जबलपुर में वर्षों से आउटसोर्स व्यवस्था को लेकर उठते रहे सवाल अब एक नए मोड़ पर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। लंबे समय से विवादों में रही अल्ट्रा क्लीन एंड केयर सर्विसेस को नगर निगम की अतिक्रमण शाखा ने कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए नोटिस जारी किया है। लेकिन इस कार्रवाई के बाद नगर निगम के भीतर भी कई सवाल उठने लगे हैं।

चर्चा इस बात की है कि जिन अधिकारियों पर पहले कंपनी के साथ कथित मिलीभगत और अनियमितताओं पर आंखें मूंदने के आरोप लगते रहे,अब वही अधिकारी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करते नजर आ रहे हैं।हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों ने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

नोटिस में क्या कहा गया?

अतिक्रमण विभाग प्रभारी कृष्णकांत रावत द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि आउटसोर्स कर्मचारी समय पर कार्यालय नहीं पहुंच रहे हैं,जिससे विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कंपनी के डायरेक्टर मुकेश कालवे को निर्देश दिए गए हैं कि सभी कर्मचारियों की प्रतिदिन सुबह 10 बजे उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।आदेश का पालन नहीं होने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

क्या सिर्फ उपस्थिति ही समस्या है?

इस नोटिस के बाद कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करना जरूरी है,तो फिर समय पर वेतन, तय कार्य अवधि,ओवरटाइम,ईपीएफ और श्रम कानूनों के पालन जैसे मुद्दों पर भी समान गंभीरता दिखाई जानी चाहिए।

कई कर्मचारियों का दावा है कि उनसे देर रात तक काम कराया जाता है, जबकि कार्य अवधि का स्पष्ट निर्धारण नहीं है। वेतन भुगतान और अन्य सुविधाओं को लेकर भी कर्मचारियों ने असंतोष जताया है।

बढ़ता दबाव या कार्रवाई की शुरुआत?

सूत्रों के अनुसार,कंपनी पहले भी विभिन्न शिकायतों को लेकर जांच एजेंसियों के दायरे में रही है।यह भी कहा जा रहा है कि मानवाधिकार आयोग और ईपीएफओ की ओर से नोटिस मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर दबाव बढ़ा है।हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

सबसे बड़ा सवाल

यदि नगर निगम कंपनी को कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर नोटिस दे सकता है,तो क्या कर्मचारियों के वेतन,श्रम कानूनों के पालन और अन्य शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच होगी?क्या आउटसोर्स व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की व्यापक जांच कर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाएगी?

फिलहाल नगर निगम की कार्रवाई ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।अब नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी नोटिस का क्या जवाब देती है और प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है। यदि कर्मचारियों के आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

(यह रिपोर्ट उपलब्ध दस्तावेजों,कर्मचारियों के दावों और संबंधित पक्षों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।कथित कमीशन और मिलीभगत से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।संबंधित पक्षों का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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