Vikas ki kalam

Special Investigation|इलाज के नाम पर 'मौत का बाजार':जबलपुर के पॉश इलाकों में निजी अस्पतालों की मनमानी,सड़क पर पार्किंग और सुरक्षा मानकों की खुली धज्जियां

Jabalpur News|Special Investigation

इलाज के नाम पर 'मौत का बाजार':जबलपुर के पॉश इलाकों में निजी अस्पतालों की मनमानी,सड़क पर पार्किंग और सुरक्षा मानकों की खुली धज्जियां

जबलपुर के निजी अस्पतालों में मानक तार-तार। सड़क पर बेतरतीब गाड़ियां,तीमारदारों से खुली लूट और कागजों पर दौड़ती सुरक्षा व्यवस्था।जानिए स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पर बड़ी पड़ताल।

विशेष रिपोर्ट अमित तिवारी 

जबलपुर।शहर में जीवन रक्षक होने का दावा करने वाले निजी अस्पताल अब आम जनता के लिए मुसीबत का सबब बन चुके हैं।गोल बाजार,सिविक सेंटर,नेपियर टाउन,राइट टाउन और मदन महल जैसे पॉश और सघन इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह खुले ये अस्पताल सुपर-स्पेशियलिटी का मुखौटा पहनकर सिर्फ कमाई का जरिया बनकर रह गए हैं।धरातल पर न तो मरीजों की सुरक्षा के बुनियादी इंतजाम हैं और न ही नियमों की कोई परवाह। कागजों पर लाखों के तामझाम दिखाने वाले इन निजी संस्थानों के पास मरीजों के परिजनों की गाड़ियां खड़ी करने तक की जगह नहीं है।

​सार्वजनिक सड़कों पर अस्पताल का कब्जा:तीमारदारों की जेब पर डाका और एंबुलेंस का रास्ता बंद

​निजी अस्पतालों की लापरवाही का सबसे वीभत्स चेहरा अस्पतालों के बाहर सड़कों पर देखने को मिलता है:

  • सड़कों पर लावारिस खड़ी गाड़ियां: अस्पताल परिसरों में पार्किंग का प्रावधान न होने के चलते मरीज और उनके तीमारदार गाड़ियां मुख्य सड़कों पर खड़ी करने को मजबूर हैं।
  • गुंडागर्दी और अवैध वसूली: सार्वजनिक सड़क पर वाहन खड़े होने के बावजूद कई जगहों पर अस्पताल प्रबंधन के गुर्गे तीमारदारों से पार्किंग के नाम पर अवैध शुल्क वसूल रहे हैं।
  • जाम में दम तोड़ती सांसें: व्यस्ततम मार्गों पर बेतरतीब खड़े वाहनों के कारण दिनभर जाम लगा रहता है। कई बार गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस खुद इस जाम में घंटों फंसी रहती है, जिससे मरीज की जान जोखिम में पड़ जाती है।

​सुरक्षा मानकों पर गहराता संकट: आईसीयू से लेकर फायर सेफ्टी तक सब बेदम

​अस्पताल भवनों के भीतर झांकें तो स्थिति और भी भयावह नजर आती है। यहां इलाज के नाम पर सुरक्षा नियमों को ताक पर रख दिया गया है:

  • संक्रमण की खुली दावत: आईसीयू (ICU) के भीतर बेड-टू-बेड आवश्यक न्यूनतम दूरी का पालन नहीं हो रहा है, जिससे गंभीर मरीजों में जानलेवा क्रॉस-इन्फेक्शन का खतरा हर वक्त मंडराता रहता है।
  • आग लगी तो भागने का रास्ता नहीं: बहुमंजिला इमारतों में चल रहे दर्जनों अस्पतालों में न तो प्रमाणित अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) उपकरण दुरुस्त हैं और न ही कोई आपातकालीन निकास (Emergency Exit) मौजूद है।
  • गंदगी और असुविधा का अंबार: मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों के लिए साफ शौचालय तक उपलब्ध नहीं हैं। बॉयोमेडिकल कचरे का निस्तारण भी बिना किसी वैज्ञानिक मापदंड के खुले में किया जा रहा है।

​डॉक्टरों का टोटा,अयोग्य स्टाफ: किसके भरोसे हैं जिंदगियां?

​अस्पतालों में सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर की ही कमी नहीं है, बल्कि इलाज करने वाले हाथों की योग्यता भी संदिग्ध है:

  • विजिटिंग डॉक्टरों की बैसाखी: कई बड़े नामी अस्पताल केवल 'ऑन-कॉल' डॉक्टरों के भरोसे संचालित हो रहे हैं। इमरजेंसी के वक्त मौके पर कोई विशेषज्ञ मौजूद नहीं मिलता।
  • अप्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ: कम वेतन में काम चलाने के लिए अप्रशिक्षित और बिना वैध पंजीयन वाले लड़के-लड़कियों को नर्सिंग व आईसीयू स्टाफ बनाकर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

​स्वास्थ्य विभाग की संदिग्ध चुप्पी:क्या किसी बड़े अग्निकांड का इंतजार है?

​इस पूरे सिंडिकेट में सबसे बड़ी भूमिका मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी(CMHO) और स्वास्थ्य विभाग के सुस्त तंत्र की है।

​विभाग की नींद केवल तभी टूटती है जब किसी मरीज की अकाल मौत पर परिजन सड़कों पर उतरकर हंगामा करते हैं। बिना पर्याप्त पार्किंग, बिना फायर एनओसी और बिना मानकों के इन अस्पतालों के लाइसेंस हर साल किस लेन-देन के आधार पर रिन्यू किए जा रहे हैं, यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

​वो 4 तीखे सवाल,जिनका जवाब प्रशासन को देना ही होगा:

  1. जब अस्पतालों के पास पार्किंग की जगह नहीं थी, तो उन्हें पॉश इलाकों में संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई?
  2. सड़क किनारे वाहन खड़े कराने के बाद तीमारदारों से अवैध पार्किंग शुल्क वसूलने वाले गिरोह पर पुलिस और प्रशासन चुप क्यों है?
  3. क्या स्वास्थ्य विभाग के पास निजी अस्पतालों के आईसीयू और सुरक्षा मानकों के औचक निरीक्षण का कोई पारदर्शी रिकॉर्ड है?
  4. क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या अग्निकांड के बाद ही जागेगा, या समय रहते इन फर्जी नर्सिंग होमों का भौतिक ऑडिट (Physical Audit) कराकर कार्रवाई करेगा।
नियमों की किताब में क्या है,ज़मीनी हकीकत क्या कहती है?

मध्य प्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन)अधिनियम और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों के तहत किसी भी अस्पताल के संचालन के लिए सख्त दिशा-निर्देश तय हैं:

पार्किंग का नियम:अस्पताल के कुल निर्मित क्षेत्र (Built-up Area) और बेड क्षमता के अनुपात में अनिवार्य इन-हाउस पार्किंग स्पेस होना चाहिए, ताकि मुख्य मार्ग बाधित न हो।

अग्नि सुरक्षा एनओसी (Fire NOC):बहुमंजिला अस्पताल भवनों में स्प्रिंकलर सिस्टम, 24 घंटे काम करने वाले वाटर हाइड्रेंट और अलग से फायर एग्जिट सीढ़ी अनिवार्य है।

आईसीयू मापदंड:इंटेंसिव केयर यूनिट(ICU) में प्रत्येक बेड के चारों तरफ डॉक्टरों और वेंटिलेटर मशीनों की निर्बाध आवाजाही के लिए कम से कम 100 से 120 वर्ग फीट का स्थान निर्धारित है।

बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट:संक्रमित कचरे को कलर-कोडेड डिब्बों में रखकर प्रतिदिन अधिकृत एजेंसी के माध्यम से निस्तारित करना अनिवार्य है, न कि सामान्य कचरे के साथ फेंकना।

धरातल पर स्थिति यह है कि इनमें से अधिकांश नियम केवल फाइलों में 'टिक' लगाकर पूरे दिखा दिए जाते हैं।

जिम्मेदार बोले:'जांच कराएंगे,नियम विरुद्ध पाए जाने पर होगी कार्रवाई'

इस पूरे मामले पर जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका हमेशा की तरह रटा-रटाया जवाब सामने आया।

"शहर के सभी निजी अस्पतालों के दस्तावेजों और व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की जाती है।यदि किसी अस्पताल के बाहर सड़क पर वाहन खड़े होने,पार्किंग शुल्क की अवैध वसूली या सुरक्षा मानकों में लापरवाही की ठोस शिकायत मिलती है,तो जांच दल भेजकर भौतिक निरीक्षण कराया जाएगा।नियम विरुद्ध संचालन पाए जाने पर नोटिस जारी कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।"
—विभागीय प्रतिनिधि,स्वास्थ्य विभाग,जबलपुर

पाठक आवाज़:क्या आप भी हैं इस अव्यवस्था के शिकार?

•क्या आपको भी गोल बाजार, राइट टाउन या मदन महल के अस्पतालों में इलाज के दौरान अवैध पार्किंग शुल्क चुकाना पड़ा है?

•क्या आपके पास इन अस्पतालों में सुरक्षा और स्वच्छता की अनदेखी से जुड़े फोटो या वीडियो हैं?

•अपनी राय और अनुभव नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें और इस रिपोर्ट को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि सोए हुए प्रशासन तक जनता की आवाज पहुंच सके।

एक टिप्पणी भेजें

If you want to give any suggestion related to this blog, then you must send your suggestion.

और नया पुराने