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Ground Report|CHC मझौली में मनमानी और बदहाली का बोलबाला:प्रभार के खेल में उलझा तंत्र,स्वास्थ्य सेवाओं पर लटके ताले; CMHO की चुप्पी पर उठे सवाल

Jabalpur News|Health Administration| Ground Report

CHC मझौली में मनमानी और बदहाली का बोलबाला:प्रभार के खेल में उलझा तंत्र,स्वास्थ्य सेवाओं पर लटके ताले; CMHO की चुप्पी पर उठे सवाल

जबलपुर के मझौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC)में अव्यवस्था और विवादित प्रभार पर बड़ा खुलासा।उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर लटके ताले, टीकाकरण प्रभावित और स्वास्थ्य विभाग की रहस्यमयी चुप्पी।पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

मझौली/जबलपुर।मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण अंचलों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के दावों की धज्जियां जबलपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मझौली में उड़ती दिखाई दे रही हैं। अधिकारियों की आपसी खींचतान, नियम-विरुद्ध प्रभार हस्तांतरण और अस्पताल की चरमराती व्यवस्थाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर अव्यवस्था और प्रशासनिक अराजकता पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी(CMHO) जबलपुर का तंत्र पूरी तरह मौन साधे बैठा है, जिससे स्वास्थ्य महकमे की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

​1.कलेक्टर के आदेशों की अनदेखी: 'अतिरिक्त प्रभार' की आड़ में मनमानी

​सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझौली में प्रशासनिक स्तर पर चल रहा खेल अब अस्पताल के कामकाज को पूरी तरह प्रभावित कर चुका है:

  • ​बीसीएम पद पर विवादित प्रभार: ब्लॉक कम्युनिटी मैनेजर (BCM) पद पर नियमों को ताक पर रखकर प्रभार सौंपे जाने की बात सामने आ रही है, जिसके चलते आंतरिक तालमेल पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।
  • ​संलग्नीकरण (Attachment) पर निर्देशों की अवहेलना: जबलपुर कलेक्टर द्वारा सभी शासकीय विभागों में अवैध प्रभार और संलग्नीकरण पर सख्त पाबंदी के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद मझौली स्वास्थ्य केंद्र में 'अतिरिक्त प्रभार' की आड़ में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
  • ​CMHO दफ्तर की निष्क्रियता: मामले की जानकारी होने के बावजूद जिला स्तर से अब तक कोई ठोस आदेश, स्पष्टीकरण या पत्राचार जारी नहीं किया गया।

​2. कागजों में आदर्श केंद्र,धरातल पर लटके ताले

​ग्रामीणों को 24 घंटे आपातकालीन और प्राथमिक चिकित्सा मुहैया कराने का दावा करने वाले इस केंद्र और इसके अधीन आने वाले उप-स्वास्थ्य केंद्रों का ज़मीनी सच बेहद चिंताजनक है:

  • ​कर्मचारियों की नदारदगी:मझौली विकासखंड के अंतर्गत आने वाले उप-स्वास्थ्य केंद्रों से मैदानी अमला अक्सर गायब रहता है, जिसके चलते केंद्रों के मुख्य दरवाजों पर ताले लटके मिलते हैं।
  • ​टीकाकरण अभियान पर सीधी चोट:जमीनी स्तर पर निगरानी न होने से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के नियमित टीकाकरण सत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
  • ​दवा और प्राथमिक उपचार का टोटा:प्राथमिक इलाज और सामान्य दवाओं के लिए भी गरीब ग्रामीणों को भटकना पड़ रहा है या निजी झोलाछाप डॉक्टरों की शरण लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।

​3.जवाबदेही से भागता प्रशासन:जांच की फाइलें ठंडे बस्ते में क्यों?

​स्वास्थ्य केंद्र में लगातार बढ़ रही शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से कोई ठोस एक्शन न दिखना कई संदेह पैदा करता है:

  • ​जब मैदानी स्तर पर सेवाएं बाधित हो रही हैं,तो जिला स्वास्थ्य महकमे द्वारा औचक निरीक्षण(Surprise Inspection) क्यों नहीं कराया गया?
  • ​प्रभार हस्तांतरण में बरती गई कथित अनियमितता पर आधिकारिक जांच समिति का गठन अब तक क्यों नहीं हुआ?

​4.जनहित में निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की मांग

​CHC मझौली की बदहाली से क्षेत्रीय जनता और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है।स्थानीय नागरिकों की मांग है कि:

  1. ​धरातल पर उतरे टीम: जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों का दल स्वयं मझौली आकर उप-स्वास्थ्य केंद्रों और मुख्य अस्पताल का भौतिक निरीक्षण करे।
  2. ​प्रभार विवाद की जांच: बीसीएम सहित अन्य विवादित प्रभारों की सेवा शर्तों और नियमों के तहत निष्पक्ष जांच हो और अवैध अटैचमेंट तुरंत खत्म किए जाएं।
  3. ​लापरवाहों पर सख्त कार्रवाई: ड्यूटी से नदारद रहने वाले कर्मचारियों और प्रशासनिक मनमानी करने वाले जिम्मेदारों पर कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएं ताकि ग्रामीण जनता को उनका हक मिल सके।

​वो 4 सवाल,जिनका जवाब स्वास्थ्य महकमे को देना होगा:

  1. ​कलेक्टर के सख्त रुख के बावजूद मझौली में नियमों के विपरीत प्रभार व्यवस्था कैसे चल रही है?
  2. ​उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर लटकते तालों और प्रभावित होते टीकाकरण का जिम्मेदार कौन है?
  3. ​लगातार शिकायतों के बाद भी CMHO जबलपुर की ओर से कोई आधिकारिक आदेश या जांच क्यों नहीं बैठी?
  4. ​कागजी रिपोर्टों के आधार पर चल रहे इस अस्पताल का वास्तविक ऑडिट कब कराया जाएगा?

नियमों का हवाला:संलग्नीकरण पर शासन के सख्त आदेश, फिर मझौली में छूट क्यों?

सामान्य प्रशासन विभाग(GAD)और स्वास्थ्य संचालनालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी कर्मचारी को उसके मूल पदस्थापन से हटाकर अन्यत्र संलग्न (Attach)या नियम-विरुद्ध प्रभार नहीं दिया जा सकता:

•कलेक्टर का कड़ा रुख:जबलपुर जिले में सभी विभागों को निर्देशित किया गया है कि अनाधिकृत प्रभार और अटैचमेंट तत्काल समाप्त किए जाएं, ताकि मूल कार्य प्रभावित न हो।

•बीसीएम पद की अहमियत:ब्लॉक कम्युनिटी मैनेजर (BCM) का काम आशा कार्यकर्ताओं की मॉनिटरिंग,मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य योजनाओं का क्रियान्वयन और ग्रामीण टीकाकरण को ट्रैक करना होता है।इस पद पर प्रशासनिक विवाद का सीधा नुकसान ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को हो रहा है।

•उप-स्वास्थ्य केंद्रों की गाइडलाइन:प्राथमिक स्वास्थ्य नीति के तहत उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर एएनएम और सीएचओ (CHO) की नियमित उपस्थिति अनिवार्य है,लेकिन निरीक्षण के अभाव में केंद्र अक्सर बंद पाए जाते हैं।

जिम्मेदारों का औपचारिक पक्ष:'जांच के बाद होगी कार्रवाई'

इस पूरे घटनाक्रम पर जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई,तो उनका औपचारिक रुख सामने आया:

"मझौली विकासखंड में स्वास्थ्य सेवाओं और प्रभार से संबंधित जो भी बिंदु सामने आए हैं, उनका परीक्षण कराया जा रहा है। यदि उप-स्वास्थ्य केंद्रों के बंद रहने या कर्मचारियों की अनुपस्थिति की पुष्टि होती है, तो संबंधितों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा।नियमों के दायरे में रहकर ही प्रशासनिक व्यवस्थाएं संचालित की जाएंगी।"
— विभागीय सूत्र,स्वास्थ्य विभाग,जबलपुर

जन-संवाद:क्या आपके क्षेत्र का स्वास्थ्य केंद्र भी रहता है बंद?

क्या आपको या आपके परिवार को मझौली CHC या उप-स्वास्थ्य केंद्रों में इलाज या टीकाकरण के लिए भटकना पड़ा है?

क्या आपके पास स्वास्थ्य कर्मचारियों की गैर-हाजिरी या लटके तालों से जुड़ी तस्वीरें या जानकारी है?

अपनी राय और अनुभव नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर दर्ज करें।इस खबर को अधिक से अधिक साझा करें ताकि ग्रामीण जनता की समस्या उच्चाधिकारियों और शासन तक पहुंच सके।

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