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MP High Court on E-Attendance:शिक्षकों की ई-अटेंडेंस पर हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित,निजी मोबाइल के इस्तेमाल पर उठे सवाल
जबलपुर।मध्य प्रदेश में शिक्षकों की अनिवार्य ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर चल रही कानूनी बहस अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ ने इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।मामला शिक्षकों से ई-अटेंडेंस दर्ज कराने के लिए निजी मोबाइल फोन,इंटरनेट कनेक्शन और व्यक्तिगत डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़ा है।
निजी मोबाइल से ई-अटेंडेंस पर हाईकोर्ट में उठे सवाल
अमरपाटन,सतना निवासी सतेन्द्र सिंह तिवारी एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर न्यायमूर्ति विशाल धगट की अदालत में सुनवाई हुई।याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने अदालत के समक्ष ई-अटेंडेंस व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण कानूनी और व्यावहारिक सवाल उठाए।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि सरकारी कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए निजी मोबाइल फोन, व्यक्तिगत इंटरनेट कनेक्शन और अन्य निजी डिजिटल संसाधनों का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने के लिए बाध्य किया जाना निजता और व्यक्तिगत संसाधनों के अधिकार से जुड़ा प्रश्न है।
क्या सरकारी व्यवस्था के लिए निजी संसाधनों का इस्तेमाल अनिवार्य हो सकता है?
याचिका में इस बात पर भी सवाल उठाया गया कि यदि सरकार किसी डिजिटल व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू करती है,तो उसके संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी होगी।
मामले में अदालत के सामने यह मुद्दा भी आया कि कर्मचारियों के निजी संसाधनों के इस्तेमाल की अनिवार्यता को कानूनी कसौटी पर किस तरह देखा जाना चाहिए।हाईकोर्ट के आगामी फैसले से इस व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण दिशा स्पष्ट हो सकती है।
संबंधित कंपनी को भी बनाया गया पक्षकार
ई-अटेंडेंस व्यवस्था से जुड़े मामले में संबंधित निजी कंपनी को भी पक्षकार बनाया गया था।हालांकि,पर्याप्त अवसर दिए जाने के बावजूद कंपनी की ओर से अदालत में जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।
इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े पक्षों की दलीलों और उपलब्ध तथ्यों पर सुनवाई पूरी की और फैसला सुरक्षित रख लिया।
तकनीकी गड़बड़ी से ई-अटेंडेंस नहीं लगी तो वेतन पर असर
ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर शिक्षकों की एक अन्य बड़ी समस्या तकनीकी खामियों से जुड़ी रही है।कुछ मामलों में तकनीकी कारणों से शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो सकी,जिसके चलते वेतन भुगतान प्रभावित होने की स्थिति बनी।
ऐसे मामलों में हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।इससे तकनीकी समस्या के कारण परेशान शिक्षकों को राहत मिली है।
हाईकोर्ट के फैसले पर शिक्षकों की नजर
अब शिक्षकों और शिक्षा विभाग दोनों की नजर हाईकोर्ट के सुरक्षित फैसले पर है।अदालत का निर्णय यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि ई-अटेंडेंस जैसी डिजिटल व्यवस्था लागू करते समय कर्मचारियों के निजी मोबाइल, इंटरनेट और अन्य व्यक्तिगत संसाधनों के इस्तेमाल की सीमा क्या होनी चाहिए।
फिलहाल हाईकोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाया नहीं है।इसलिए ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर आगे की स्थिति अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस का मामला केवल ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने तक सीमित नहीं रह गया है।इसके साथ निजी मोबाइल के इस्तेमाल,डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता,तकनीकी खामियों और वेतन भुगतान जैसे मुद्दे भी जुड़ गए हैं।हाईकोर्ट का आने वाला फैसला शिक्षकों और सरकार,दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
