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% का खेल पार्ट-5 काली पट्टी बांधकर हो रहा कमीशनखोरों का विरोध... क्या जिम्मेदारों की आंख खोल पाएगी..?? विरोध की काली पट्टी...

 % का खेल पार्ट-5
काली पट्टी बांधकर हो रहा
कमीशनखोरों का विरोध...
क्या जिम्मेदारों की आंख खोल पाएगी..??
विरोध की काली पट्टी...




चश्मदीद अन्धे बने...

बहरे सुने दलील...

झूठों का है दबदबा...

सच्चे हो रहे ज़लील....


मामला मध्यप्रदेश के संस्काधानी कहे जाने वाले जिला जबलपुर का है। जहाँ अपने ही जीवन रक्षा की गुहार लगा रहे स्वास्थ्य कर्मियों को अब काली पट्टी बांधकर नियमित स्वास्थ्य सेवा और कोविड-19 के प्रति आम जन को जागरूक करते देखा जा रहा है। अब सवाल यह उठता है, कि जब प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान इन फ्रंट लाइन वॉरियर्स के लिए योजनाओं का पिटारा खोल चुके है। तो आखिर ऐसा क्या हुआ जो इन स्वास्थ्य कर्मियों को काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है।


अगर आप नए पाठक है..तो शुरू से जानिए पूरी कहानी...कैसे हुआ कमीशनबाजी का आगाज


क्यों..??काली पट्टी बांधकर विरोध कर रहे स्वास्थ्य कर्मचारी...



आपको बतादें की कोरोना संक्रमण की लहर के शुरुआती समय से ही कोविड 19 की रोकथाम में लगे स्वास्थ्य कर्मचारियों ने ग्राउंड लेबल पर मोर्चा संभाल लिया था। लेकिन  स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्राथमिक सुरक्षा के लिए दी जाने वाली जीवन रक्षक सामग्री N95 मास्क, सैनिटाइजर, हैंड ग्लब्स उपलब्ध नही करवाये गए। जबकि मिशन संचालक द्वारा बाकायदा लाखों रुपयों का बजट उपलब्ध करवाया गया था।लेकिन हर सरकारी योजना के तर्ज पर यह बजट भी कमीशन खोरी की भेंट चढ़ गया। गौरतलब हो कि कर्मचारी संघों ने इस बात की जानकारी एक ज्ञापन के माध्यम से जिला प्रशासन के जिम्मेदारों तक भी पहुँचाई थी।लेकिन दोषियों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। कर्मचारियों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अपनी आंखों में पट्टी बांधकर बैठे है तो हम भी काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराते हुए स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करेंगे।


पार्ट-2 में आपने जाना..कैसे बिना जांच किये ही दे दी गयी..क्लीन चिट..विस्तार से पढ़ें...


आखिर क्या है पूरा मामला...
किसके खिलाफ भड़का है कर्मचारी संघ का आक्रोश...


प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी कर्मचारी संघों ने स्वास्थ्य विभाग के क्रय लिपिक प्रवीण सोनी और जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुभाष शुक्ला पर फर्जी बिल लगाकर कर्मचारियों की सुरक्षा सामग्री के लिए आये बजट को अन्य मदो में खर्च करने का आरोप लगाया है। स्वास्थ्य कर्मियों और कर्मचारी संघ की माने तो कोविड-19 ड्यूटी के दौरान उन्हें स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किसी भी तरीके का जीवन रक्षक लॉजिस्टिक नहीं दिया गया। जिसके चलते हुए बिना सुरक्षा के सामानों के स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इस दौरान कई स्वास्थ्य कर्मी कोरोना संक्रमण की चपेट में भी आ चुके हैं यही नहीं इसी कारण कई स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कोरोना संक्रमण से मौत भी हो चुकी है।


पार्ट-3 में जानिए ...आखिर कौन पचा गया..स्वास्थ्य कर्मियों की जीवन रक्षक किट.. पढ़ें पूरी ख़बर


जानिए क्या है..???
कर्मचारी संघ की मांग...




म.प्र.अनुसुचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ अजाक्स  संभागीय अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह तेकाम एवं न्यू बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी संघ प्रांतीय उपाध्यक्ष दुर्गा मेहरा ने संयुक्त रूप जारी विज्ञप्ति में बताया

इस आपदा के काल में जहां चारों ओर संक्रमण पैर पसारता नजर आ रहा है वहां जानबूझकर स्वास्थ्य कर्मचारियों को बिना किसी साजो सामान के कोविड-19 ड्यूटी में तैनात करना ना सिर्फ क्रूरता भरा निर्णय है बल्कि अमानवीय भी है। यही कारण है कि कर्मचारी संघ ने  एकजुट होकर इस संबंध में तत्काल कार्यवाही करते हुए क्रय लिपिक और डीपीएम को जांच पूरी होने तक जबलपुर से अन्यत्र स्थानांतरण करने संभागायुक्त और कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया था। लेकिन कोई भी कार्यवाही ना होने पर शांति पूर्ण विरोध स्वरूप काली पट्टी बांधकर काम करने का निर्णय  लिया गया है ।



खुद स्वास्थ्य सेवाओं को मोहताज है..स्वास्थ्य कर्मचारी...


बिना जीवन रक्षक  किट के काम करने के दौरान संक्रमित होना कोई नई बात नहीं है। बात तो तब बड़ी हो जाती है। जब वे या उनके परिजन संक्रमित हो जाते है। और उसके बाद उन्हें अपनी ही विभाग के आला अधिकारियों से परिजनों को स्वास्थ्य सेवाएं दिलवाने के लिए मिन्नतें करनी पड़ती है। लेकिन इसके बाद भी उन्हें या उनके परिजनों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलती। कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि संक्रमण काल के इस विपदा भरे समय में स्वास्थ्य विभाग अपने ही स्वास्थ्य कर्मियों के साथ सौतेला व्यवहार करने में जुटा हुआ है। स्वास्थ्य कर्मचारी या उनके परिवारजनों में से कोई यदि कोरोना पॉजिटिव होता है। तो उन्हे समय पर इलाज नहीं मिल पाता है। अधिकतर मामलों में तो उनके लिए जिला अस्पताल में बेड तक नहीं मिलता। अधिकारियों से बात करो तो बस करते हैं कह कर टालमटोल कर देते है।जबकि नेता नगरी के लिए सब सुविधाएं महज एक कॉल पर उपलब्ध हो जाती है। कर्मचारियों के साथ हुए अन्याय के विरोध में दिए गए ज्ञापन पर अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही नही किये जाने, स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए एक कोविड वार्ड अलग से बनाये जाने जैसी मांगों को लेकर जबलपुर जिले के सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ता हांथो में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन करते हुए अपने कर्तव्यों को पूरा करने मजबूर है। 


पार्ट-4 में जानिए.. कैसे..?? दागियों की पीठ थपथपाते हुए..की गई ताजपोशी...


एक एक स्वास्थ्य कर्मचारी करेगा..
सीएम हेल्पलाइन में शिकायत...




कर्मचारी संघ ने समस्त स्वास्थ्य कर्मचारियों के हक की आवाज बुलंद करते हुए कमिशनबाजों के खिलाफ कमिश्नर,कलेक्टर और प्रभारी मंत्री तक इस बात की शिकायत की है। लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन के आंख की पट्टी नहीं खुली। यही कारण है कि अब तक दोषियों पर कोई कार्यवाही नहीं कि गयी है। इस बात से कर्मचारी संघ बेहद नाराज है।कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि जबलपुर के सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से सी एम हेल्पलाइन 181 के माध्यम से मास्क सेनेटाइजर घोटाला के दोषी कर्मचारी क्रय लिपिक प्रवीण सोनी और डी पी एम सुभाष शुक्ला का स्थानांतरण अन्य जिले मे करने एवं विशेष जांच किये जाने की मांग करेंगे । साथ ही स्वास्थ्य कर्मचारियो के लिए एक अलग से कोविड वार्ड बनाये जाने की अपील करेंगे।



क्या स्वास्थ्य कर्मियों की गांधीगिरी से पिघलेगा जिम्मेदारों का कलेजा....

पूरी जानकारी के साथ जल्द ही आ रहा है..

% का खेल पार्ट-6

सिर्फ...विकास की कलम..पर





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