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कोरोना के लेकर कांग्रेसियों का धरना प्रदर्शन

कोरोना के लेकर कांग्रेसियों का धरना प्रदर्शन





सुदेश नागवंशी छिंदवाड़ा 


 *पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना, विधायक सोहन वाल्मीक,सुनील उईके, नीलेश उईके, विजय चौरे और कमलेश शाह बैठे धरने पर*
*लगातार विकराल रूप लेते रहे लेते जा रही कोरोना महामारी और लगातार हो रही मौतों के विरोध में जिला प्रशासन द्वारा जारी लापरवाही और अव्यवस्थाओं के विरोध में विधायकों का धरना प्रदर्शन*
*जिले के 6 विधायक फवारा चौक गांधी प्रतिमा के समक्ष धरने पर बैठे।*
*कोरोना महामारी को रोकने में नाकाम शासन प्रशासन छिंदवाड़ा ज़िले के सभी विधायक बैठे अनिश्चित हड़ताल पर*
*छिंदवाड़ा जिले के सभी 6 विधायक धरने पे बैठे*


छिंदवाड़ा में बढ़ते कोरोना को देखते हुए शासन प्रशासन के द्वारा झूठा आंकड़ा जनता के सामने लाने और डेली 30 से 35 मौत कोरोना से हो रही है लेकिन छिंदवाड़ा का जिला प्रशासन के द्वारा शून्य या एक दो ही दर्शया जा रहा और जितनी भी मौत हो रही उनको कोरोना फोटोकाल के द्वारा अंतिम संस्कार किया जा रहा है जिसको लेकर आज छिंदवाड़ा जिले के सभी विधायक के द्वारा हड़ताल किया जा रहा और मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल प्रबंधन की अर्थव्यवस्था से जिला की जनता परेशानी का सामना कर रही हैं ।


*विधायकों की ये हैं प्रमुख मांगें*


 1 . जिला अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्थाओं के संबंध में पूर्व में लगातार जिला प्रशासन को और प्रभारी मंत्री के आने पर उन्हें भी जिले के सभी विधायकों ने ज्ञापन देकर व्यवस्थाएं बनाने की मांग की थी, प्रभारी मंत्री के आने से जनता में उम्मीद जागी थी कि अब व्यवस्थाएं कुछ सुधरेंगी, मगर व्यवस्था में कोई भी सुधार नहीं हो पाया । आज कोरोना संक्रमित मरीज अस्पताल में इलाज के लिए बाट जोह रहे हैं मगर उन्हें कोई देखने वाला नहीं है। जो मरीज अस्पताल में भर्ती भी हो गए हैं उनकी कोई खैर खबर नहीं है,  बस मरीज की मृत्यु होने पर सूचनाएं आ रही हैं।


2. जिले में ऑक्सीजन का टोटा बना हुआ है,  प्रशासन कह रहा है कि ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है लेकिन लगभग सभी अस्पतालों में मरीजों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो रही है। 


अमरवाड़ा सिविल अस्पताल में अभी तक नए डॉक्टरों की कोई प्रतिनियुक्ति नहीं की गई एवं अमरवाड़ा अस्पताल में  शासन प्रशासन की तरफ से कोई उचित ब्यबस्था नहीं की जा रही है एवं अमरवाड़ा  को कोविड-19 अस्पताल बनाने के लिए अभी तक कोई शासकीय प्रक्रिया चालू नहीं की गई


 जुन्नारदेव में 3 दिन पहले से तैयार सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम की लाइनें तो विधायक जुन्नारदेव द्वारा लगवा दी गई लेकिन ऑक्सीजन की सप्लाई अभी तक नहीं हो  पाई। 


3. रेमेडीशिविर इंजेक्शन की व्यवस्था प्रशासन द्वारा की जानी थी, किंतु मरीजों को इंजेक्शन भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। प्रदेश की सरकार भी छिंदवाड़ा जिले के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है । अन्य जिलों में तो इंजेक्शन हैलीकॉप्टर और एरोप्लेन द्वारा उपलब्ध करवा दिए गए किंतु छिन्दवाड़ा में इंजेक्शन नहीं भेजा जाना यह दिखाता है कि प्रदेश सरकार छिन्दवाड़ा के साथ अन्याय कर रही है।


4.  जिले में किसी भी अस्पताल में मरीजों के भर्ती होने के लिए कोई जगह शेष नहीं बची है . एक-एक व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए  सारे प्रयास करने के बावजूद भी बिस्तर नहीं मिल रहे हैं,  आईसीयू और वेंटिलेटर की तो बात ही अलग है साधारण बिस्तर तक मिल पाना अस्पताल में मुश्किल है।


 5. कोरोना इलाज की व्यवस्था केवल जिला मुख्यालय स्तर पर की जा रही है।  शेष विकास खंडों में दूरस्थ आदिवासी अंचलों में इलाज की कोई भी व्यवस्था नहीं है।  यदि कोई व्यक्ति बीमार हो रहा है तो उसे 60- 70 किलोमीटर की दूरी तय कर जिला मुख्यालय तक आना पड़ रहा है। ऐसे में रास्ते में किसी अनहोनी की संभावना भी लगातार बनी रहती है, तथा क्षेत्र की जनता के पास इतना धन भी नहीं होता कि वह मरीज को इमरजेंसी की स्थिति में जिला मुख्यालय तक ले जा सके।  प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से लगातार मांग करने के बाद भी प्रशासन द्वारा कोई भी व्यवस्था विकासखंड स्तर पर नहीं की जा रही है।


6.  अन्य जिलों में जिला प्रशासन द्वारा आवश्यकता के आधार पर अस्थाई कोविड सेंटर तैयार किए जा रहे हैं किंतु छिंदवाड़ा जिले में अत्यधिक मरीज होने के बावजूद भी जिला प्रशासन द्वारा कोई भी तैयारी नहीं की जा रही है।


7 मरीजों की कोरोना टेस्टिंग प्रॉपर नहीं हो रही है,  इस कारण अधिकांश मरीज जिन्हें कोरोना के लक्षण भी हैं वह बिना किसी बंधन के घूम रहे हैं और संक्रमण फैला रहे हैं। 


ग्रामीण क्षेत्रों में निमोनिया और टाइफाइड के नाम पर इनका गलत इलाज हो रहा है जिस कारण बहुत से  लोगों की मृत्यु भी हो रही है।


8.  प्रशासन द्वारा संदिग्ध कोरोना मरीजों की पहचान के लिए किल कोरोना अभियान चलाया जा रहा है,  लेकिन धरातल पर ऐसा कोई अभियान चलता नहीं दिख रहा। 


9. संदिग्ध मरीजों की कोरौना जांच होने पर जांच रिपोर्ट आने में 4 से 5 दिन का समय लग रहा है,  और इतने समय में या तो मरीज अत्यंत गंभीर स्थिति में पहुंच जा रहा है और रिपोर्ट नहीं आने पर वह अस्पताल में भर्ती भी नहीं हो पाता और इस कारण वह संक्रमण भी अपने आसपास के लोगों में फैला रहा है।


10.  कोरोना को लेकर लोगों में जागरूकता भी स्थानीय प्रशासन द्वारा नहीं फैलाई जा रही है। पीड़ित को कोई मार्गदर्शन नहीं मिल रहा है।


11. प्रशासन द्वारा मौत के आंकड़े छुपाए जा रहे हैं।


12. विकासखंड स्तर पर शमशान घाट पर शवों को जलाने के लिए जगह कम पड़ रही है।



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