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CM दौरे से पहले जबलपुर नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर सवाल,आउटसोर्स कर्मचारियों के विरोध से मची हलचल
कम वेतन के आरोपों के बीच कर्मचारियों ने काम करने से किया इनकार,वैकल्पिक व्यवस्था से संभाली गई स्थिति
जबलपुर।मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के प्रस्तावित जबलपुर दौरे से पहले नगर निगम की सफाई व्यवस्था को लेकर नया विवाद सामने आया है।आउटसोर्स एजेंसी अल्ट्रा क्लीन कंपनी के कर्मचारियों के एक वर्ग ने कथित तौर पर कम वेतन और भुगतान संबंधी शिकायतों के चलते ड्यूटी करने से इनकार कर दिया।इसके बाद नगर निगम प्रशासन को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ी।सूत्रों के अनुसार,मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए ओमती क्षेत्र के जोन क्रमांक-13 में विशेष सफाई अभियान चलाया जाना था।हालांकि,निर्धारित समय पर पर्याप्त कर्मचारी नहीं पहुंचे,जिससे अधिकारियों के सामने चुनौती खड़ी हो गई।बाद में दूसरी एजेंसी के कर्मचारियों की मदद से सफाई व्यवस्था बहाल की गई।
कर्मचारियों का दावा—निर्धारित वेतन नहीं मिल रहा
कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें तय मानकों के अनुरूप भुगतान नहीं किया जा रहा है।उनका कहना है कि निजी संस्थानों में इससे अधिक मजदूरी मिल रही है,जिसके कारण उन्होंने विरोध दर्ज कराया।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
टेंडर प्रक्रिया और नियमों पर उठे सवाल
घटना के बाद नगर निगम की आउटसोर्स व्यवस्था और टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं।स्थानीय स्तर पर यह मांग की जा रही है कि निम्न बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए—
•कर्मचारियों ने काम करने से इनकार क्यों किया?
•वास्तविक वेतन भुगतान कितना किया जा रहा था?
•दूसरी एजेंसी के कर्मचारियों को किस आदेश के तहत लगाया गया?
•क्या अनुबंध और श्रम कानूनों का पालन हुआ?
•पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी किसकी है?
अतिरिक्त स्वास्थ्य अधिकारी को लेकर भी लगाए गए आरोप
कुछ शिकायतकर्ताओं ने अतिरिक्त स्वास्थ्य अधिकारी देवेंद्र सिंह चौहान की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।उनका आरोप है कि कर्मचारियों की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई।वहीं,कुछ लोगों ने यह भी दावा किया है कि पूर्व में अन्य स्थानों पर भी उनके कार्यकाल को लेकर शिकायतें हुई थीं।
हालांकि,इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी की ओर से इस संबंध में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।
जांच और पारदर्शिता की मांग
शिकायतकर्ताओं और कर्मचारियों का कहना है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उनका यह भी कहना है कि भविष्य की टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए ताकि कर्मचारियों के हित और सार्वजनिक धन दोनों सुरक्षित रह सकें।
