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%का खेल -पार्ट -2 ऑडियो की जांच बिना बन गयी रिपोर्ट अब जांच.. की जांच.. पर जांच

 %का खेल -पार्ट -2


ऑडियो की जांच बिना बन गयी रिपोर्ट
अब जांच.. की जांच.. पर जांच


जबलपुर न्यूज़ खुलासा



विकास की कलम ने परसेंट का खेल पार्ट वन में अपने पाठकों को बताया था कि किस तरह से आपदा को अवसर में बदलते हुए स्वास्थ्य महकमे के कुछ लोगों द्वारा सैनिटाइजर के बिल निकलवाने के नाम पर कमीशन खोरी का गंदा खेल खेला गया था। यह बात शायद कभी किसी को पता ना चलती लेकिन गलती से एक बातचीत का ऑडियो वायरल हो गया और उस ऑडियो ने संबंधित व्यक्ति को शक के दायरे में लाकर खड़ा कर दिया।

 इस ऑडियो के बाद से ही जिला चिकित्सालय विक्टोरिया में हड़कंप मचा हुआ है । आनन-फानन में जांच किए जाने की कवायत भी शुरू की गई लेकिन विकास की कलम को इस बात का पहले से ही एहसास था कि कहीं ना कहीं कोयले की दलाली में कईयों के हाथ काले हैं लिहाजा जांच रिपोर्ट तैयार करने में हीलाहवाली जरूर की जाएगी। और इसी लीपापोती की आशंका के चलते विकास की कलम ने भोपाल में बैठे उच्चाधिकारियों से भी कुछ जानकारियां साझा की थी। बहरहाल लंबी चली जद्दोजहद के बाद कहीं ना कहीं जांच खत्म होती दिखाई दे रही है लेकिन इस दौरान सबसे अहम सवाल दरकिनार भी होते नजर आ रहे हैं।

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वायरल ऑडियो को जांच में भेजे बिना कैसे हो गयी जांच....



वायरल ऑडियो आने के बाद से ही लीपापोती का दौर शुरू हो गया उपरोक्त ऑडियो के संबंध में की जाने वाली कार्यवाही को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कलेक्टर कर्मवीर शर्मा के आदेश पर 3 सदस्य की एक जांच कमेटी निर्धारित की थी। जिन्हें ना केवल इस वायरल ऑडियो के संबंध में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी थी बल्कि पूरे मामले को उजागर भी करना था। उपरोक्त जांच कमेटी के एक सदस्य डॉक्टर संजय मिश्रा से विकास की कलम ने जांच के दौरान बात की और उनसे यह जानकारी ली कि आखिर किन तथ्यों पर जांच की जा रही है। इस दौरान विकास की कलम ने यह सवाल किया कि....

 क्या वायरल ऑडियो को फॉरेंसिक लैब जांच में भेजा जा रहा है या फिर केवल विभागीय भाषा का इस्तेमाल कर कागजों में जांच की जा रही है।

 इस पर डॉक्टर संजय मिश्रा ने जानकारी देते हुए कहा कि 

जांच अधिकारी होने के नाते मैं भी इस बात को मानता हूं कि बिना फॉरेंसिक लैब भेजे इस ऑडियो की जांच हो ही नहीं सकती लेकिन ऑडियो को लैब में भेजना हमारे कार्य क्षेत्र के बाहर है इस पर सिर्फ हमारे द्वारा कलेक्टर महोदय को आवेदन किया जा सकता है उसके बाद जो जांच होगी वह कलेक्टर महोदय के आदेश पर ही होगी।

 कलेक्टर के आदेश के बाद भी 4 दिन तक चले इस मेलोड्रामा का नतीजा क्या होगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन जांच अधिकारी के जवाबों से बहुत सी चीजें साफ हो चुकी थी।


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बन चुकी है जांच रिपोर्ट लेकिन कोई जवाब देने नहीं है तैयार...





आखिरकार चारदीवारी के अंदर स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित की गई 3 सदस्य की टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत भी कर दी है। सूत्र बताते हैं कि उपरोक्त जांच रिपोर्ट की मानी जाए तो इस प्रकार की शिकायत निराधार है और जो लोग जांच के दायरे में आए थे वह न केवल साफ़ पाक है बल्कि उनका इस ऑडियो से कोई लेना-देना ही नहीं है। अब सवाल ये उठता है कि अगर उपरोक्त व्यक्तियों का संबंधित ऑडियो से कोई लेना देना नहीं था तो अचानक उन पर गाज गिरा देना कहीं न कहीं गैर जिम्मेदाराना आदेशों को भी उजागर करता है। लेकिन इन सबके बीच कहीं ना कहीं दाल में काला भी नजर आ रहा है। क्योंकि अगर वाकई शिकायत निराधार थी तो ऑडियो की विशेष जांच करने से आखिर किसके पेट में दर्द होगा।


विभागीय जांच के बाद- अब एसडीएम स्तर पर हो रही जांच


प्राप्त जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित की गई जांच कमेटी ने कलेक्टर महोदय तक अपनी जांच रिपोर्ट पहुंचा भी दी है लेकिन सूत्रों की माने तो विभाग द्वारा की गई जांच से कलेक्टर महोदय संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं यही कारण है कि अब पूरी जांच का जिम्मा एक एसडीएम स्तर के अधिकारी को सौंपा गया है और अब एसडीएम खुद अपने स्तर पर इस पूरे मामले की जांच करेंगे।


शिकायतकर्ता नहीं इसलिए सब कुछ जायज


इस जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है बातों बातों में विकास की कलम को जांच अधिकारियों  से यह जानकारी लगी की वेज जिस मामले की जांच कर रहे थे उसका कोई शिकायत करता ही नहीं था तो वह किस से पूछताछ करते लिहाजा उन्होंने संबंधित व्यक्तियों से अपने-अपने पक्ष को रखने की बात कही और संबंधित व्यक्तियों के पक्ष को आधार मानते हुए जांच रिपोर्ट तैयार की गई है। अब ऐसे में यह सवाल खड़ा होता है की यदि किसी कमीशन बाजी का कोई ऑडियो वायरल होता है तो क्या विभाग सिर्फ इसलिए पूरे मामले को दरकिनार कर दे क्योंकि उपरोक्त ऑडियो के लिए किसी ने शिकायत नहीं की या फिर आंखों देखी मक्खी सिर्फ इसलिए खा ली जाय क्योंकि इस गोरखधंधे को उजागर करने के लिए कोई भी आवाज नहीं उठा रहा।


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क्या.. कलेक्टर महोदय कर पाएंगे.. दूध का दूध और पानी का पानी


इस आपदा के क्षणों में सैनिटाइजर के बिल को पास करवाने के लिए हुए कमीशन बाजी के खेल का एकमात्र सबूत सिर्फ और सिर्फ वह वायरल ऑडियो है जो खुद चीख चीख कर कह रहा है की विभाग में परसेंट का गंदा खेल खेला जा रहा है और इसकी आड़ में कई लोग अपनी जेबे भरने में लगे हुए हैं यह ऑडियो विक्टोरिया अस्पताल के गलियारे से निकलकर शहर की आम जनता से होते हुए राजधानी के जिम्मेदारों तक जा पहुंचा और अब इस ऑडियो को लेकर तरह-तरह की बातें की जा रही है इन सबके बीच अब आम जनता को इंतजार है उस न्यायिक कार्यवाही का जिसका जिम्मा जबलपुर के जिला कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने उठाया है अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा की अधिकारियों की सांठगांठ के बीच आखिर किस तरह से जबलपुर के कलेक्टर महोदय 

दूध का दूध और पानी का पानी करते हैं


बहुत जल्द आने वाला है पार्ट 3 कुछ अन्य सनसनीखेज खुलासों के साथ बने रहिए

 विकास की कलम पर
 


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