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ग़रीब मरीज के लिए संजीवनी बना कलेक्टर का फोन अस्पताल प्रबंधन ने सारा बिल किया माफ


ग़रीब मरीज के लिए संजीवनी बना कलेक्टर का फोन,
अस्पताल प्रबंधन ने सारा बिल किया माफ



जबलपुर-विकास की कलम

वैसे तो जबलपुर के कलेक्टर साहब अपनी एक विशिष्ट कार्यशैली के लिए पहचाने जाते है। जिन्होंने आते ही शहर वासियों के दिल जीत लिया। वैसे तो कलेक्टर सहाब को लेकर हर किसी का अलग ही तजुर्बा रहा है। लेकिन नरसिंहपुर के गौड़ ठाकुर परिवार के लिए तो कलेक्टर साहब साक्षात संकट मोचक बनकर संजीवनी ले आए। और कुछ यूं वाक्या हुआ कि यह परिवार ताजिंदगी कलेक्टर इलैया राजा टी का नाम भूल नहीं पायेगा।



मदद की गुहार लगाने कलेक्ट्रेड पहुंचा था पीड़ित पिता

नरसिंहपुर से अपने बेटे के इलाज के सिलसिले में शहर आये हरप्रसाद ठाकुर आर्थिक तंगी के चलते बेटे को घर नहीं ले जा पा रहे थे। दरदर की ठोकर खाने के बाद उन्होंने कलेक्टर दरबार में हाज़िरी लगाने की बात सोची। इसी सिलसिले में हर प्रसाद ठाकुर गौंड ने कलेक्टर डा. इलैयाराजा टी से मुलाकात की।
उन्होंने कलेक्टर को बताया कि उनका 14 वर्षीय पुत्र मनीष गौड़ पेड़ से गिर गया था 10 जून को नरसिंहपुर से पुत्र को लेकर गोल बाजार स्थित सुधा नर्सिंग होम इलाज कराने पहुंचे। वहां पर इलाज शुरू हुआ और आज 28 दिन बाद डिस्चार्ज करने के लिए अस्पताल ने इलाज ख़र्च रु 1, 30, 000 और दवाइयों का 45000 रू का बताया। बिल जमा ना करने की स्थिति में पेशेंट को डिस्चार्ज नही किया जा रहा है।



झाड़फूंक कर 40 हजार किये थे जमा


पीड़ित पिता हरिप्रसाद ठाकुर गोंड ने कहा कि सर मेरे परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है इतनी राशि मेरे पास कहां से आएगी मेरे पास ₹40000 की जमा पूंजी थी जो मैंने हॉस्पिटल में एडमिशन के समय जमा कर दी थी, मैं एक गरीब आदमी हूं तथा मजदूरी करके जीवन यापन करता हूं इतने रुपये में नही ला सकता हूँ ,कृपया मेरी मदद कीजिये।



कलेक्टर के एक्शन पर रिएक्शन, माफ हुआ सारा बिल


यह सुनकर कलेक्टर ने सीएमएचओ डॉ. रत्नेश कुररिया को इस मामले का तुरन्त निराकरण करने और मरीज के परीजन की मदद करने के निर्देश दिये। कलेक्टर से मिले निर्देश पर सीएमएचओ ने हॉस्पिटल प्रबंधक से बात की और बिल माफ करने और गरीब परिजन की आर्थिक स्थिति को देखकर उचित निर्णय लेने को कहा। जिस पर सुधा नर्सिंग होम के संचालक ने भी मरीज के परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए मानवता का परिचय दिया और दरियादिली दिखाते हुए ₹130000 का बिल माफ कर दिया।सिर्फ दवाओं का खर्च 45000 रू जमा करने का वे भी बाद में देने का कहकर मरीज को डिस्चार्ज किया। परिजनों पुत्र को लेकर नरसिंहपुर रवाना हो गए।

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