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हम बोलेगा.. तो बोलोगे... की बोलता है....

 हम बोलेगा..
 तो बोलोगे...
की बोलता है....



वाह रे नगर पालिका निगम


गर्मी का मौसम पूरे शबाब पर था इस दौरान शहर के एक स्विमिंग पूल को चालू किये जाने की मांग हर खासों आम ने की लेकिन निगम के अधिकारियों के कान में जूं तक न रेंगी। फिर एक दिन अचानक साहब के रिश्तेदार को जल क्रीड़ा की इक्षा हुई। लेकिन शहर का स्विमिंग पूल तो अव्यवस्थित था। लिहाजा पूरी गर्मी निकल जाने के बाद अब निगम के अधिकारियों को स्विमिंग पूल की सुध आयी।खास बात यह है कि बरसात मुहाने पर खड़ी है। ऐसे में अब स्विमिंग पूल की सुध लेना तर्क हीन है। क्योंकि विभाग ने जितनी तत्परता से शहर को खोदा है उससे आने वाली बरसात में आधा शहर तो स्विमिंग पूल बन ही जायेगा। और फिर शहर का हर नागरिक फक्र से कहेगा..वाह रे नगर पालिका निगम..


क्या रेड क्रॉस का दान धो देता है पाप


आजकल रेड क्रॉस सोसायटी में दान देने का चलन काफी जोरों पर है। पहले जो गुप्त दान दिया जाता था। आजकल उसे लेकर सोशल मीडिया में जमकर ढिंढोरा पीटा जाता है।इसी बीच कुछ ऐसे लोगों ने भी दान देकर फोटो खिंचवाई जिन्होंने आम परिवार के अविभावकों का जीना मुहाल कर रखा था। ख़बर है कि दानदाता  अपने कारनामों से काफी मशहूर है।साहब कभी ऑनलाइन क्लास में सिगरेड के छल्ले बनाते है तो कभी पेरेंट्स को जान से मारने की धमकी देते है।इधर शिकायत होने पर भी प्रशासन कार्यवाही नहीं करता और उधर आला हुजूरों संग खींची दान की फोटो शिकायतकर्ता के हौसले तोड़ देती है। इस पूरी कश्मकश में जनता को तो यही लगता है कि शायद.. रेड क्रॉस का दान सारे पापों को धो देता है।


नेता जी निगल गए नजूल की जमीन


सर पर छत नहीं,और शहर के बाहर दूरदराज में अपना झोपड़ा बना कर रह रहा गरीब परिवार इस आसरे में सालों पड़ा रहता है कि आज नहीं तो कल इस नजूल की जमीन पर उसे पट्टा तो मिल ही जायेगा। इसी बीच सत्ताधारी दल के नेता हालचाल जानने पहुंचते है। लेकिन गरीब परिवार की परिस्थिति से ज्यादा नेता जी को मौके की जमीन भा जाती है। फिर क्या था..गरीब परिवार दफ्तरों में चप्पल चटकाता रह जाता है। और नेता जी खुद को असली हितग्राही बताते हुए जमीन का पट्टा बनवा लेते है। आखिरकार कब्जाधारी गरीब परिवार को अपना डेरा कहीं और जमाना पड़ेगा।पलायन के समय जब परिवार का छोटा बच्चा अपनी तोतली भाषा में पूछता है कि पापा जमीन तो हमारी थी न..तो भारी हृदय से बच्चे को समझाते हुए पिता कहता है..नहीं बेटा...नेता जी निगल गए नजूल की जमीन..