सऊदी की राजकुमारी जेल से रिहा 3 साल से काट रही थी जेल की सजा - VIKAS KI KALAM,Breaking news jabalpur,news updates,hindi news,daily news,विकास,कलम,ख़बर,समाचार,blog

VIKAS KI KALAM,Breaking news jabalpur,news updates,hindi news,daily news,विकास,कलम,ख़बर,समाचार,blog

It is our endeavor that we can reach you every breaking news current affairs related to the world political news, government schemes, sports news, local news, Taza khabar, hindi news, job search news, Fitness News, Astrology News, Entertainment News, regional news, national news, international news, specialty news, wide news, sensational news, important news, stock market news etc. can reach you first.

Breaking

सऊदी की राजकुमारी जेल से रिहा 3 साल से काट रही थी जेल की सजा

सऊदी की राजकुमारी जेल से रिहा 3 साल से काट रही थी जेल की सजा







महिला अधिकारों के लिए बोलने वालीनएक सऊदी राजकुमारी और उनकी बेटी को रिहा कर दिया गया है. मानवाधिकार संगठनों ने बताया कि वह तीन साल से बिना किसी आरोप के जेल में बंद थीं।57 वर्षीय बासमा बिन सऊद को तीन साल बाद जेल से रिहा कर दिया गया है.महिला अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाने वाली बासमा शाही परिवार की सदस्य हैं और संवैधानिक राजशाही के खिलाफ भी बोलती रही हैं।

बासमा को मार्च 2019 में हिरासत में ले लिया गया था. मानवाधिकार संगठन अल केस्त (ALQST) फॉर 'मन राइट्स ने ट्विटर पर लिखा,
 "बासमा बिन सऊद अल सऊद और उनकी बेटी सूहौद रिहा हो गई हैं. उन्हें ऐसी बीमारी है जिसमें जान भी जा सकती है लेकिन उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं और समुचित देखभाल नहीं मिल रही थी. हिरासत के दौरान किसी भी वक्त उन पर कोई आरोप दर्ज नहीं किया गया. 

 प्रिंसेस बासमा को तब गिरफ्तार कर लिया गया था जब वह इलाज के लिए स्विट्जरलैंड जाने वाली थीं. हालांकि, यह कभी नहीं बताया गया कि उन्हें क्या बीमारी है. अप्रैल 2020 में उन्होंने राजा सलमान और युवराजबमोहम्मद बिन सलमान से अपनी खराब सेहत की दुहाई देते हुए रिहाई की अपील की थी. नआखिरकार शनिवार को यह सूचना आई कि उन्हें रिहा कर दिया गया है. सऊदी अधिकारियों ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है.

बदल रहा है सऊदी अरब? 

2017 में मोहम्मद बिन सलमान को युवराज नियुक्त किया गया था जिसके बाद से देश में महिला अधिकारों की स्थिति में बदलाव के लिए कई कदम उठाए गए हैं. दशकों से देश में महिलाओं के ड्राइविंग पर लगी पाबंदी हटाना इसकी बड़ी मिसाल है. इसके अलावा बिना किसी पुरुष को साथ लिए महिलाओं के घर से बाहर निकलने जैसे नियमों में ढील दी गई है. पिछले सालमहिलाओं को किसी पुरुष अभिभावक की अनुमति के बिना सऊदी अरब के अंदर स्थित इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में से एक मक्का की तीर्थ यात्रा पर जाने के लिए पंजीकरण कराने का अधिकार दिया गया।

 सऊदी अरब के पिछले राजा अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज अल सऊद के समय से ही देश में सामाजिक परिवर्तन हो रहा है. हालांकि, हाल के कई सुधारों को तथाकथित विजन 2030 का हिस्सा माना जाता है, जिसमें देश को पर्यटन आदि के लिए आगे बढ़ाने की कोशिश है. सख्ती भी बढ़ी है इन बदलावों के साथ ही सऊदी अधिकारियों द्वारा असहमति पर नकेल कसने की घटनाएं भी बढ़ी हैं. संभावित राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए गए हैं. महिला अधिकारों बोलने वाले लोगों पर सख्ती बरती गई है. शाही परिवारों के सदस्यों को भी नहीं बख्शा गया है. 

ज्ञात हो कि राजकुमारी बासमा को अल-हाएर जेल रखा गया था जहां बड़ी संख्या में राजनीतिक कैदीबंद हैं. 2020 में उनके परिवार ने संयुक्त राष्ट्र में एक याचिका दाखिल की थी जिसमें कहा गया था कि उन्हें जेल में इसलिए बंद रखा गया है क्योंकि वह आलोचकों को दी जाने वाली यातनाओं के खिलाफ बोलती हैं.

इस याचिका में यह भी कहा गया कि राजुकमार बासमा को मोहम्मद बिन नाएफ का सहयोगी माना जाता है, जो युवराज बनने के दावेदार थे और जिन्हें नजरअंदाज कर मोहम्मद बिन सलमान को युवारज बना दिया गया. नवंबर 2017 में देश में भ्रष्टाचार विरोधी एक अभियान चलाया गया था जिसमें दर्जनों लोगों को भ्रष्टाचार या बगावत जैसे संदेहों में गिरफ्तार कर लिया गया था. तब रियाद के एक चर्चित रिट्ज कार्लटन होटल को अघोषित हिरासत केंद्र में तब्दील कर दिया गया था. मार्च 2020 में शाही सैनिकों ने महाराज सलमान के भाई और भतीजे को युवराज के खिलाफ बगावत की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था.