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मंगलवार, 14 दिसंबर 2021

पूरी दुनिया में कब्ज़ा चाहता चाइना, सुपरपावर बनने के लिए जारी है कोशिश

अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि चीन नौसेना, वायु, जमीन, साइबर और अंतरिक्ष शक्ति प्रक्षेपण पर दबदबा बनाने के लिए अतिरिक्त सैन्य सुविधाएं बनाने पर फोकस कर रहा है.

चीन सुपरपावर बनने के लिए अपनी कोशिशें और तेज करता हुआ नजर आ रहा है. चीन को लेकर अक्सर दावा किया जाता रहा है कि वो दुनिया भर में सैन्य ठिकानों का निर्माण कर रहा है या फिर बनाने का प्रयास कर रहा है. अमेरिकी रक्षा विभाग का कहना है कि चीन नौसेना, वायु, जमीन, साइबर और अंतरिक्ष शक्ति प्रक्षेपण पर दबदबा बनाने के लिए अतिरिक्त सैन्य सुविधाएं बनाने पर फोकस कर रहा है. पेंटागन के अधिकारियों ने कहा कि अतिरिक्त सैन्य ठिकानों और रसद सुविधाएं बढ़ाने को लेकर चीन पहले से योजना बना रहा है.

दुनिया भर में सैन्य ठिकानों को बनाने पर चीन का फोकस!
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) दुनिया की सबसे बड़ी सेना है. पिछले कुछ सालों से राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा बागडोर संभालने के बाद चीन की सैन्य महत्वाकांक्षा काफी बढ़ गई है. हाल के मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि संभावित चीनी सैन्य प्रतिष्ठानों के लिए इक्वेटोरियल गिनी और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर ध्यान केंद्रित किया है. दिसंबर की शुरुआत में मीडिया रिपोर्टों में ये भी कहा गया कि चीन इक्वेटोरियल गिनी में अपना पहला अटलांटिक सैन्य अड्डा बनाने की कोशिश कर रहा है. संभावित स्थल बाटा है, जो चीनी निर्मित गहरे पानी का वाणिज्यिक बंदरगाह है.


चीन का क्या है खतरनाक प्लान?
अमेरिकी सेना के अफ्रीका कमांड के कमांडर जनरल स्टीफन टाउनसेंड ने अप्रैल में कहा था कि चीन से सबसे ज्यादा खतरा अफ्रीका के अटलांटिक तट को लेकर है. जहां पर चीन नौसैनिक सुविधा बनाने पर जोर दे रहा है. बंदरगाह पर हथियारों की तैनाती और नौसेना के जहाजों की मरम्मत कर सकता है. हालांकि संयुक्त राज्य अमेरिका से कड़ी चेतावनी के बाद, अबू धाबी से 80 किमी उत्तर में खलीफा के कार्गो बंदरगाह पर निर्माण रोक दिया गया था. ऐसे आरोप थे कि संयुक्त अरब अमीरात से अनजान, वहां गुप्त तरीके से सैन्य सुविधाएं विकसित की जा रही थीं.

साल 2018 में संयुक्त अरब अमीरात और चीन ने COSCO शिपिंग पोर्ट्स अबू धाबी टर्मिनल को अपग्रेड करने के लिए 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे. यह बंदरगाह अल धफरा एयर बेस और जेबेल अली दोनों के पास स्थित है. चीन के लिए कंबोडिया एक और संभावित जगह है. सितंबर-अक्टूबर 2020 में, कंबोडिया ने रीम नेवल बेस में संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा वित्त पोषित दो इमारतों को ध्वस्त कर दिया. बाद में कंबोडियाई रक्षा मंत्री टी बान ने पुष्टि की थी कि चीन बुनियादी ढांचे के विस्तार में मदद कर रहा है.

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कंबोडिया में चीनी सेना को नौसैनिक सुविधा का उपयोग करने देने के लिए एक गुप्त 30 साल के समझौते का आरोप लगाया. हालांकि, कंबोडियाई सरकार ने इसका खंडन किया है. दूसरी चिंता कोह कोंग में एक चीनी विकास है, जिसमें असामान्य रूप से बड़ा हवाई अड्डा शामिल है. संयुक्त राज्य अमेरिका ने 8 दिसंबर को कंबोडिया पर हथियार और दोहरे उपयोग वाली वस्तु पर प्रतिबंध लगा दिया था.

चीन के 2019 के रक्षा श्वेत पत्र में कहा गया है कि पीएलए को विदेशी रसद सुविधाएं विकसित करनी चाहिए. बताया जाता है कि चीनी शिक्षाविदों ने विदेशी ठिकानों के कई फायदों को सूचीबद्ध किया है, जैसे कि पीएलए बलों की आगे तैनाती को सक्षम करना, राजनयिक संकेत देना, राजनीतिक परिवर्तन, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग और प्रशिक्षण, एक व्यापक लॉजिस्टिक नेटवर्क अमेरिकी सेना की बेहतर खुफिया निगरानी में भी सहायता कर सकेगा.

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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार