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एमपी पुलिस का कारनामा.. CG जेल में बंद कैदी से.. MP में कर लिया गांजा बरामद..



एमपी पुलिस का कारनामा..
CG जेल में बंद कैदी से..
MP में कर लिया गांजा बरामद..




जबलपुर मध्यप्रदेश

आम जनता द्वारा हमेशा यह शिकायत की जाती है की पुलिस द्वारा जबरन उस पर प्रकरण बनाते हुए कार्यवाही की जा रही है। लेकिन अचानक सबूतों का पुलिंदा ना जाने कहां से इकहठा हो जाता है और फिर शिकायतकर्ता की शिकायत धरी की धरी रह जाती है। ऐसे एक दो नहीं बल्कि कई मामले कोर्ट में विचाराधीन है जहां पुलिस द्वारा आम आदमी को द्वेष भावना से ग्रस्त होकर जबरन किसी भी प्रकरण में फंसा दिया गया है। हालांकि अधिकतर ऐसे मामलों में पुलिस का पल्ला भारी ही दिखाई देता है। लेकिन आज हम आपको जिस कहानी से रूबरू कराने जा रहे हैं उस कहानी से तो यह सब समझ में आ रहा है की मध्य प्रदेश पुलिस ने फर्जी प्रकरण बनाने के दौरान कुछ इतनी जल्दबाजी कर दी कि अब वहीं फर्जी प्रकरण पुलिस के गले की हड्डी बन चुका।


आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला...

यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के जैतपुर थाने का है दरअसल अनूपपुर निवासी दीपक सिंह उर्फ दीपू पर जैतपुर पुलिस ने 6 अप्रैल 2020 को अवैध मादक पदार्थ गांजा रखे होने पर उसके खिलाफ एनडीपीएस का प्रकरण पंजीबद्ध किया। जैतपुर पुलिस ने बाकायदा आरोपी बनाए गए दीपक सिंह से 23 किलो गांजा जप्त भी किया। आरोपी से मादक पदार्थ गांजा की जब्ती के बाद उस पर विधिवत एफआईआर दर्ज की गई। लेकिन पूरे मामले में उस समय एक बड़ा मोड आ गया जब आरोपी ने इस बात को सिद्ध किया की जिस तारीख को जैतपुर पुलिस उससे 23 किलो गांजा की बरामदगी कर रही है उस दिन तो वह है मध्यप्रदेश में था ही नहीं बल्कि पुलिस द्वारा एफ आई आर में जिस तारीख का जिक्र किया गया है उस तारीख को दीपक सिंह छत्तीसगढ़ की पेंड्रा जेल में बंद था।


आपको बता दें कि आरोपी बनाए गए दीपक पर एनडीपीएस के प्रकरण में शहडोल जिले की कोर्ट में सुनवाई भी चल रही है। वही अब इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़े करते हुए पीड़ित दीपक ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर दी। याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एनडीपीएस के एक प्रकरण में शहडोल जिले की कोर्ट में चल रही ट्रायल पर रोक लगा दी है।

आवेदक की ओर से अधिवक्ता सीएम तिवारी ने दलील में दी कि जिस तिथि को पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है, उस दिन दीपक सिंह छत्तीसगढ़ राज्य की पेंड्रा जेल में बंद था। पुलिस ने उसके खिलाफ जानबूझकर फर्जी प्रकरण दर्ज किया है। 


आवेदक की ओर से पेंड्रा मरवाही जेल के सहायक जेल अधीक्षक का प्रमाण पत्र भी पेश किया गया।
जिसमें उल्लेखित था कि 4 फरवरी से 22 मई 2020 के बीच दीपक सिंह उर्फ दीपू जेल में बंद था।

 
अधिवक्ता सी एम तिवारी ने बताया कि एक पुराने मामले में हाईकोर्ट से जमानत होने पर शहडोल पुलिस ने दुर्भावनावश उसके खिलाफ फर्जी प्रकरण पंजीबद्ध कर लिया। जिस दिन एफआईआर दर्ज की गई, उस दिन दीपू दूसरे राज्य की जेल में बंद था। शासन की ओर से स्थगन पर आपत्ति पेश की गई। मामले पर सुनवाई के बाद जस्टिस अरुण कुमार शर्मा की एकलपीठ ने उक्त एफआईआर के आधार पर जारी ट्रायल की प्रोसीडिंग पर रोक लगा दी है।