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बुधवार, 27 अक्तूबर 2021

यहां जिला चिकित्सालय में पैसे लेकर डॉक्टर कर रहे उपचार पैसे ना मिलने पर ऑपरेशन को 3 दिन के लिए किया लेट

यहां जिला चिकित्सालय में पैसे लेकर डॉक्टर कर रहे उपचार
पैसे ना मिलने पर ऑपरेशन को 3 दिन के लिए किया लेट



बैतूल-मध्यप्रदेश


जिला चिकित्सालय में डॉक्टर पैसे लेकर कर रहे इलाज..

पैसों के कारण 3 दिन लेट किया गया ऑपरेशन..

आयुष्मान कार्ड धारी गरीब मरीज से लिये दो हजार रुपये..

कलेक्टर से शिकायत के बाद सीएमएचओ ने की पुष्टि.. 

आनन-फानन में शुरू हुई जांच।


शिवराज के राज में कुछ बड़े ओहदे पर बैठे अधिकारी और कर्मचारी ऐसे भी हैं जो एक पल के लिए भी आपदा को अवसर में बदलने का मौका नहीं खोते। और जब बात अति आवश्यक सेवाओं की हो तो फिर पीड़ित की जेब से पैसे निकलवा लेना मानो बच्चे के मुंह से चॉकलेट छिनने जितना आसान होता है। आज की कहानी भी कुछ इसी तरह की कशमकश से जुड़ी हुई है जहां पर एक की मजबूरी दूसरे के लिए मुनाफे का सबब बन गई।

 आइए जानते हैं भ्रष्ट अधिकारियों के महाकाव्य से निकले इस अनोखे अध्याय की कहानी...


यहां जानिए.. आखिर कहां का है मामला..???




सरकारी योजनाओं की घिनौनी पर सच्ची दास्तान मध्य प्रदेश के बैतूल से सामने आई है। जहां पर जिला चिकित्सालय में मोटी मोटी तनख्वाह पा रहे सरकारी डॉक्टर अपने अस्पताल में आ रहे गरीब मरीजों का खून चूसने से बाज नहीं आ रहे। और उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हुए उन्हें निशुल्क उपचार के एवज में अपने पारितोषिक का टैरिफ थमाते हुए उनसे उगाही कर रहे हैं।

आपको बता दें कि वैसे तो शिवराज सरकार ने मध्यप्रदेश में गरीब जनता को बेहतर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने कई योजनाएं जिला चिकित्सालय के माध्यम से शुरू की है जिनमें सबसे अहम आयुष्मान कार्ड को माना जाता है लेकिन ताजा मामले की बात करें तो ऐसा लगता है कि सरकार द्वारा गरीब मरीजों को फ्री इलाज प्रदान किए जाने की योजना बैतूल के जिला चिकित्सालय में लागू ही नहीं होती।

क्योंकि हकीकत तो यह है कि बैतूल जिले का जिला चिकित्सालय दलालों का अड्डा बन चुका है। जहां आयुष्मान कार्ड धारी गरीब मरीजों से सरकारी डॉक्टर पैसे लेकर इलाज कर रहे हैं। बात थोड़ी सी अटपटी जरूर है लेकिन 100 टका सच है । और सोने पर सुहागा तो यह है कि इन मरीजों को दवाइयां भी बाजार से ही खरीदनी पड़ रही हैं । 


बैतूल कलेक्टर तक पहुंची मामले की शिकायत


वैसे तो पीड़ित को लगता है कि जहां तक हो सके वह झंझट में पढ़े बिना सबसे पहले स्वास्थ्य लाभ ले

 क्योंकि जान है तो जहान है...

 लेकिन जब पानी सर के ऊपर चला जाता है तो फिर सैलाब तो आना ही था। ठीक वही हुआ जिसका डर था। सरकारी डॉक्टरों द्वारा रोजाना पैसे की उगाही का तकाजा और पैसे ना मिलने पर मरीज के उपचार में जानबूझकर देरी करना पीड़ित के परिजन को नागवार गुजरा और फिर उसने पूरे मामले की सिलसिलेवार जानकारी एक शिकायत पत्र के जरिए बैतूल जिले के कलेक्टर तक पहुंचा दी। क्योंकि मामला बेहद गंभीर था लिहाजा कलेक्टर साहब ने आनन-फानन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को मामले की विशेष जांच कर जांच रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए।


खुद पीड़ित ने सुनाई अपने साथ हुई उगाही की कहानी...



 पीड़ित मरीज कैलाश बड़ौदे 27 साल के कैलाश भीमपुर विकासखंड के गुरु ढाना गांव के रहने वाले हैं । हर्निया से पीड़ित कैलाश अपना ऑपरेशन कराने के लिए जिला चिकित्सालय में 21 अक्टूबर को भर्ती हुए थे। वे सरकारी अस्पताल में दर्द से कराहते रहे। लेकिन उनका 3 दिन तक ऑपरेशन नहीं हुआ। कैलाश का आरोप है डॉक्टर धाकड़ ने हर्निया के ऑपरेशन के लिए उनसे 3000 रुपये मांगे थे । गरीब होने के कारण वह उनकी डिमांड पूरी नहीं कर पाए लेकिन डॉक्टर धाकड़ ने बोला की ढाई हजार रुपए लगेंगे और जब तक पैसे नहीं दोगे तब तक ऑपरेशन नहीं होगा कैलाश ने अपने चाचा की मदद से 2000 रुपये का इंतजाम किया और डॉक्टर धाकड़ को ऑपरेशन थिएटर में 2000 रुपये दिए। तब उनका 23 अक्टूबर को ऑपरेशन हुआ । कैलाश को इलाज और दवाई फ्री मिलनी थी। लेकिन उन्हें कुछ दवाई बाजार से भी खरीदनी पड़ी । कैलाश ने इस मामले की शिकायत अधिकारियों से की और मामले की जांच शुरू हो गई है ।


एक ने हिम्मत दिखाई तो एक-एक करके कई मामले होने लगे उजागर



अकेले कैलाश का ही मामला नहीं है जब बैतूल सीएमएचओ डॉ एके तिवारी ने जिला चिकित्सालय के सर्जिकल वार्ड में पहुंचकर और भी मरीजों से बात की तो सब्जी बेचने वाले कुंवर लाल रैकवार जिनका भी हर्निया का ऑपरेशन हुआ है उसने भी अस्पताल प्रबंधन में चल रहे गोरखधंधे को उजागर करते हुए सनसनीखेज आरोप लगाना शुरू कर दिया । 

पीढ़ित कुंवर लाल ने भी आरोप लगाया है कि ऑपरेशन होने के बाद रमेश मालवी नाम का कर्मचारी बार-बार पैसे मांग रहा है। बताया कि उनके पास पैसे नहीं है कुछ पैसे थी तो दवाइयां बाजार से खरीदनी पड़ी । मरीज कुंवर लाल का कहना है कि शिकायत के बाद डॉ रंजीत राठौर ने आकर मरीजों को बोला कि अगर ऐसी शिकायत करोगे तो हम ऑपरेशन नहीं करेंगे और भोपाल रेफर करेंगे ।



सीएमएचओ ने स्वीकारा हुई है चूक... जल्द ही जांच का प्रतिवेदन कलेक्टर को करेंगे प्रस्तुत



इस पूरे मामले को लेकर बैतूल जिला चिकित्सालय में पदस्थ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ एके तिवारी का कहना है कि उच्च अधिकारी का फोन आया था ,की मरीज कैलाश बड़ौदे जिला चिकित्सालय में भर्ती है और वह गरीब है जिसका आयुष्मान कार्ड भी जमा किया गया है। इस मरीज से सर्जिकल स्पेशलिस्ट डॉक्टर धाकड़ ने ऑपरेशन के लिए 3000 रुपये मांगे थे। जब उसने पैसे नहीं दिए तो डॉक्टर ने बोला कि ढाई हजार रुपए लगेंगे और जब तक पैसे नहीं दोगे तब तक ऑपरेशन नहीं होगा ।तब उसने 2000 रुपये दिए और फिर पैसे मिलने के बाद ही ऑपरेशन किया गया। ऐसे ही एक और मरीज कुंवर लाल रैकवार से भी पैसे मांगने की बात सामने आई है जांच की जा रही है प्रतिवेदन कलेक्टर बैतूल को भेजा जाएगा।

पीढ़ित कैलाश बडौदे के अलावा कुछ और मरीजों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कुछ से पैसे लिए गए हैं और कुछ से पैसे मांगे गए हैं इस पूरे मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है ।


खुद पर लगे गंभीर आरोपों के जवाब में जानिए कि क्या कहते है डॉ प्रदीप धाकड़


जिला चिकित्सालय में पदस्थ सर्जिकल स्पेशलिस्ट डॉ प्रदीप धाकड़ ने पैसे लेने की बात को लेकर कहा कि मुझे याद नहीं है अगर ऑपरेशन थिएटर में कोई सामान लग रहा होगा तो उसके लिए पैसे लिए गए होंगे। शिकायत तो होती रहती है मैंने किसी से पैसे नहीं लिए हैं । इसी तरह दूसरे सर्जिकल स्पेशलिस्ट डॉक्टर रंजीत राठौर ने भी उन पर लगे आरोप आरोप खारिज करते हुए कहा कि हमने गंभीर मरीजों को रेफर करने की बात की थी ।


चोर चोर मौसेरे भाई..
सिस्टम की है जांच कराई..


इस पूरे मामले के खुलासे के बाद एक ओर जहां जिला चिकित्सालय में हड़कंप मचा हुआ है वहीं दूसरी ओर अब दोषी कर्मचारी और चिकित्सक सेटिंग बाजी के खेल में जुट गए हैं और सभी का प्रयास है कि किसी भी तरीके से बात को दबाकर यही ठंडा कर दिया जाए क्योंकि यदि बात बड़ी तो कई सफेदपोश भी बेनकाब हो जाएंगे। हालांकि जिस जोश के साथ सीएमएचओ ने जांच शुरू की है उसे देख कर तो लगता है की गरीब को न्याय मिल ही जाएगा लेकिन इन सबके बीच मरीज और उनके परिजनों को यह डर भी सता रहा है की भले कुछ पैसे देकर ही सही लेकिन इलाज तो मिल ही रहा था ऐसा ना हो कि इस शिकायत के चक्कर में रही सही सुविधाएं भी मिलना बंद हो जाएं। बहरहाल हम जांच के हर एक पहलू पर अपनी नजर गड़ाए हुए हैं और तो और अधिकारियों से सतत संपर्क करते हुए जांच को एक सही दिशा में ले जाने का प्रयास भी करेंगे हम चाहते हैं कि सिस्टम का रिश्वतखोरी वाला यह रिवाज टूटे और जरूरतमंद को सरकार द्वारा दिया जाने वाला उसका हक 100 फ़ीसदी मिल सके।

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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार