% का खेल पार्ट-8...डीपीएम के दान की चारों ओर चर्चा.. लेकिन दान से दाग नहीं मिटते-कर्मचारी संघ... - VIKAS KI KALAM,Breaking news jabalpur,news updates,hindi news,daily news,विकास,कलम,ख़बर,समाचार,blog

Breaking

% का खेल पार्ट-8...डीपीएम के दान की चारों ओर चर्चा.. लेकिन दान से दाग नहीं मिटते-कर्मचारी संघ...

% का खेल..पार्ट-8

डीपीएम के दान की चारों ओर चर्चा..
लेकिन दान से दाग नहीं मिटते-कर्मचारी संघ...





कच्चे मकान जिनके..

जले थे फ़साद में... 

अफ़सोस उनका नाम ही....

बलवाइयों में था....


सिस्टम का सिस्टम ही कुछ ऐसा है की आम आदमी का सर घुमा के रख दे। यहां जो दिखाया जाता है वह कभी होता नहीं और जो होता है वह जिम्मेदारों की मदद से अक्सर छुपा लिया जाता है। जब कभी आवाज उठती है किसी गरीब के न्याय की तो अक्सर बड़े अधिकारियों द्वारा रहनुमा बन कर सख्त से सख्त जांच किए जाने का दिखावा भी कर दिया जाता है। आवाज उठाने वालों को लगता है कि शायद जिम्मेदार अधिकारी उनके हक की पैरवी कर उनके साथ हुए धोखाधड़ी को लेकर गुनहगार की गिरेबान जरूर पकड़ेगा। लेकिन उसे क्या पता... कि यहां से तो सब्र का इम्तिहान शुरू होता है।

इस बीच और भी कई पड़ाव आने वाले हैं। जहां दोषी को भगवान तक साबित किया जा सकता। इन सबके बीच सच्चाई की आवाज उठाने वाला शख्स एक बात तो साफ-साफ समझ जाता है की यहां पर सब कुछ होगा। लेकिन जिस जांच के लिए आवाज उठाई गई है उस जांच की जांच का कुछ नहीं होगा। और अंत में आवाज उठाने वाला ही गुनहगार साबित कर दिया जाएगा।


सिस्टम के ऐसे ही एक सियासी खेल का नजारा जबलपुर के जिला अस्पताल विक्टोरिया की गलियारों में देखा जा रहा है। जहां बीते माह से स्वास्थ्य कर्मचारी संघ अपने निचले स्तर के कर्मचारियों के हक के लिए नेता से लेकर मंत्री तक और अधिकारियों से लेकर जिम्मेदारों तक सबकी चौखट में गुहार लगा चुके है। लेकिन कार्यवाही करना तो दूर बल्कि रोजाना नित नए हथकंडे अपनाते हुए मामले को दफन करने का प्रयास किया जा रहा है।


पहले समझें क्या है पूरा मामला..


कोरोना संक्रमण की लहर के शुरुआती समय से ही कोविड 19 की रोकथाम में लगे स्वास्थ्य कर्मचारियों ने ग्राउंड लेबल पर मोर्चा संभाल लिया था। लेकिन  स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्राथमिक सुरक्षा के लिए दी जाने वाली जीवन रक्षक सामग्री N95 मास्क, सैनिटाइजर, हैंड ग्लब्स उपलब्ध नही करवाये गए। जबकि मिशन संचालक द्वारा बाकायदा लाखों रुपयों का बजट उपलब्ध करवाया गया था।लेकिन हर सरकारी योजना के तर्ज पर यह बजट भी कमीशन खोरी की भेंट चढ़ गया। गौरतलब हो कि कर्मचारी संघों ने इस बात की जानकारी एक ज्ञापन के माध्यम से जिला प्रशासन के जिम्मेदारों तक भी पहुँचाई थी। कर्मचारी संघ ने  एकजुट होकर इस संबंध में तत्काल कार्यवाही करते हुए क्रय लिपिक प्रवीण सोनी और डीपीएम सुभाष शुक्ला को जांच पूरी होने तक जबलपुर से अन्यत्र स्थानांतरण करने संभागायुक्त और कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया था। लेकिन दोषियों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। 


डीपीएम के दान की चारों ओर चर्चा..



कर्मचारी संघ ने जैसे ही अपनी आवाज को बुलंद करना शुरू किया...वैसे ही अचानक डीपीएम साहब को निचले स्तर के स्वास्थ्य कर्मचारियों की चिंता सताने लगी। और उन्होंने जिला अस्पताल विक्टोरिया के इतिहास में सेवा भावना की मिशाल का एक नया अध्याय जोड़ते हुए।अपने एक माह के वेतन और कुछ अन्य सहयोग से 700 नग सुरक्षा किट तैयार कराकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जबलपुर के माध्यम से प्रभारी, सी.एम.एच.ओ. स्टोर को सुपुर्द की। इस  दौरान सबसे खास बात यह रही कि इस अवसर पर क्षेत्रीय स्वास्थ्य संचालक स्वास्थ्य सेवायें जबलपुर संभाग, सिविल सर्जन जिला चिकित्सालय जबलपुर,  डी.एच.ओ.-1, डी.आई.ओ., डी.टी.ओ., जिला स्तरीय अधिकारी एवं समस्त विकासखण्ड चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे। 

सभी ने डीपीएम साहब के इस प्रयास की जमकर सराहना की...

"विकास की कलम"भी डीपीएम सुभाष शुक्ला द्वारा किये गए इस कार्य की प्रशंसा करती है। साथ ही आशा करती है कि आने वाले समय मे भी वे इस तरह के कार्य करते हुए अपनी सेवा भावना को जीवंत रखेंगे....


दान के जश्न में कहीं दब न जाये पीड़ितों की कराह


चारों ओर डीपीएम के दान के ही चर्चे बुलंद हो रहे है। जिसे देखो वो साहब की वाहवाही के पुल बांधता नज़र आ रहा है। 

इस वाह-वाह ...के जयघोष के बीच बिना सुरक्षा किट के 4 माह से काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मचारियों की आवाज कहीं खोती हुई सी नज़र आ रही है।इस बात को लेकर कर्मचारी संघ के कुछ पदाधिकारियों ने 2 तथ्यों के माध्यम से सिस्टम की चालाकी बयान की है। उनका कहना है कि...


जब स्वास्थ्य कर्मचारियों के हित की सुनवाई के लिए बैठक बुलाई जाती है। तो अधिकारी इतने व्यस्त हो जाते है। कि उन्हें सांस लेने तक का समय नहीं होता। लेकिन जब साथ का एक अधिकारी अपने वेतन से कुछ सुरक्षा किट उपलब्ध करवाने की घोषणा करता है। तो पूरा ख़िरका अपना सारा काम छोड़ मौके पर खड़ा हो जाता है।


जब पीड़ित कर्मचारी संघ एक एक अखबार के कार्यालय जाकर स्वयं अपने साथ हुए अन्याय की विज्ञप्ति देता है। तो पूरे पेपर में एक इंच जगह नहीं मिलती। लेकिन जब अधिकारी का संदेशा जाता है। तो बड़े बड़े कॉलम में महिमामंडन का बखान शुरू हो जाता है।


दान से दाग नहीं मिटते साहब...-कर्मचारी संघ..


इस पूरे मामले के दूसरे पहलू को जानने के लिए विकास की कलम ने न्यू बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की प्रांतीय उपाध्यक्ष दुर्गा मेहरा से विस्तार में चर्चा की। हमें जानकारी देते हुए प्रांतीय उपाध्यक्ष दुर्गा मेहरा ने बताया कि।

जबलपुर में आशा सहित 3500 मैदानी कर्मचारियों के बीच महज 700 किट देकर 9 लाख के जीवनरक्षा किट घोटाले की जांच रोकने की कोशिश की जा रही है जिसका संघ विरोध करता है।


प्रांतीय उपाध्यक्ष श्रीमती दुर्गा मेहरा 

न्यू बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की प्रांतीय उपाध्यक्ष श्रीमती दुर्गा मेहरा ने  बताया कि जिले को जीवन रक्षक किट के लिए राज्य शासन द्वारा 9 लाख की राशि प्राप्त हुई थी। किन्तु इस राशि से मास्क सैनिटाइजर की जगह कमीशन के लिए अन्य सामग्री खरीद ली गई। जिले में घर घर किल कोरोना सर्वे कर रहे मैदानी कर्मचारियों को एक मास्क तक उपलब्ध नही करवाया गया।

उन्होंने डीपीएम के दान पर तंज कसते हुए कहा कि...

ये किसी की समझ में नहीं आ रहा कि डीपीएम् सुभाष शुक्ला का वेतन कितना है। जिसमें उन्होंने सात सौ किट खरीद ली। क्या इतने दिनों से कर्मचारी फिल्ड में कार्य कर रहा है तब इनको उनकी सुरक्षा का ध्यान नहीं आया।अब जब कर्मचारी संघो ने उन पर 9 लाख गबन का आरोप लगाया तब ही क्यों अपने और अपने पिता की सेलरी के नाम से किट वितरित की जा रही है ।



जिले के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी लगाया सवालिया निशान...


न्यू बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की प्रांतीय उपाध्यक्ष दुर्गा मेहरा ने अपने बयानों के आधार पर जिले के कई जिम्मेदार अधिकारियों को कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है उन्होंने बताया कि

जिले के सभी उच्च अधिकारी सच्चाई जानने के बाद भी चुप्पी साधे हुए है । अपने आरोपों के साथ जिम्मेदारों से सवाल करते हुए उन्होंने पूछा है कि जब कर्मचारी संघ सभी बातों के साक्ष्य और लिखित शिकायत सौंप चुका है। तो कर्मचारी संघों की शिकायत पर कोई भी जांच क्यों नहीं की जा रही । उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का यह रवैया साफ बयां कर रहा है कि जिले के अधिकारी भी भ्रटाचार और कमिशन खोरी को खुले आम बड़ाबा दे रहे है ।


दान की किट से नहीं दबेगा...
कमीशन खोरी का मामला....


दुर्गा मेहरा ने जानकारी देते हुए बताया कि पूरा देश इस समय एक कठिन परिस्थिति से गुजर रहा है ।स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना रात दिन लोगो का जीवन बचाने में लगे है ।वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार लोग आपदा को अवसर बनाकर अपनी जेब भरने में लगे है।

कर्मचारी संघ का कहना है कि भले ही डीपीएम साहब ने अपनी स्वेक्षा निधि से 700 सुरक्षा किट कर्मचारियों के लिए उपलब्ध कराई हो। लेकिन यह जंग केवल 700 सुरक्षा किट की नहीं है। बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से आए ₹900000 के उस बजट की है जिसमें स्वास्थ्य कर्मचारियों के एक वक्त के भोजन से लेकर न जाने क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी थी। जब हमारी व्यवस्थाओं के लिए मिशन संचालक ने ₹900000 की बड़ी राशि उपलब्ध कराई हो तो फिर हम दान की किट के लिए मोहताज क्यों हों...???

पहले जिम्मेदार इस बात का जवाब दें की स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए आए ₹900000 कहां गए..??

इसके बाद ही हम डीपीएम साहब के दान का गुणगान करेंगे। उन्होंने दो टूक शब्दों में यह चेतावनी दी है कि बड़े अधिकारी इस मुगालते पर ना रहे की कुछ किट दान करवा देने से 900000 के बजट के कमीशन खोरी पर पर्दा डाला जा सकता है बल्कि जब तक भ्रस्टाचार की जांच नही होती जिले के सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ता काली पट्टी बांधकर कोविड का काम करेंगे।


700 सुरक्षा किट के जरिये कुछ इस तरह से संतुष्ट करने का प्रयास...




डीपीएम सुभाष शुक्ला द्वारा अपने स्वयं के वेतन एवं पारिवारिक सहयोग के माध्यम से विभाग को 700 सुरक्षा किट सहयोग स्वरूप प्रदान की गई है। लेकिन खास बात यह है कि हजारों जरूरतमंद स्वास्थ्य कर्मचारियों के बीच महज 700 सुरक्षा किट का वितरण कई नए विवादों को जन्म दे रहा है। आधिकारिक तौर पर जारी की गई विज्ञप्ति पर गौर किया जाए तो प्रदान की गई 700 सुरक्षा किट को  निम्न तरीके से वितरित किए जाने का प्रारूप बनाया गया है


320 किट 16 यू.पी.एच.सी. के फ्रण्ट लाईन स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए।


280 किट 7 ब्लॉक के फ्रण्ट लाईन स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए।


100 किट विभिन्न स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों को आकस्मिक स्थिति में किल कोरोना सर्वे में कार्यरत् फण्ट लाईन स्वास्थ्य कर्मचारियों को उपलब्ध कराने हेतु जो कि निम्नानुसार है-


20 किट श्रीमति दुर्गा मेहरा, प्रांतीय उपाध्यक्ष न्यू बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी संघ मध्यप्रदेश जिला जबलपुर के सुपुर्द किये जाने हेतु।


20 किट श्री विरेन्द्र शर्मा, जिला अध्यक्ष, न्यू बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी संघ जिला जबलपुर के सुपुर्द किये जाने हेतु।


20 किट श्री राजेन्द्र तेकाम, संभागीय अध्यक्ष, मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ जिला जबलपुर के सुपुर्द किये जाने हेतु।


20 किट श्री आलोक अग्निहोत्री, जिला अध्यक्ष स्वास्थ्य, म.प्र. तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, जिला जबलपुर के सुपुर्द किये जाने हेतु ।


20 किट श्री सुनील नेमा, प्रांतीय उपाध्यक्ष, म.प्र. संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ जिला जबलपुर के सुपुर्द किये जाने हेतु।



किसको बांटे... किस को डांटे...
आपसी मनमुटाव पैदा करेगा यह बंटवारा


अध्यक्ष योगेश चौधरी
मध्यप्रदेश अनुसूचित जनजाति जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ जिला जबलपुर के अध्यक्ष योगेश चौधरी ने दान की गई सुरक्षा किटों के बंटवारे को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। विकास की कलम से खुली बातचीत में उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि सुरक्षा किट के नाम पर विभाग ने जो रेवरी बटवाने का खेल खेला है। उससे कर्मचारियों के मन में आपसी मनमुटाव पैदा होने की आशंका है। जिस तरीके से 320 सुरक्षा किट 16 यू.पी.एच.सी. के फ्रण्ट लाईन स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए बांटने की बात कही गई है उसके हिसाब से प्रत्येक यू.पी.एच.सी मैं केवल 20 किट ही बाटी जानी है जबकि प्रत्येक यूपीएएचसी में 20 से ज्यादा फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मचारी कार्यरत है। और अब ऐसे में जिन्हें भी किट नहीं मिलेगी वह या तो अपना गुस्सा कर्मचारी संघ के नेताओं पर उतारेंगे या फिर हीन भावना से ग्रसित हो जाएंगे। और जो कर्मचारी हमेशा एक दूसरे के सुख दुख में हर वक्त खड़े होते हैं कहीं ना कहीं उनकी एकता में फूट डालने का काम भी यह बंदरबांट करेगा। उन्होंने इस बात की भी जानकारी देते हुए कहा कि निचले स्तर के स्वास्थ्य कर्मचारियों ने बड़ी उम्मीद के साथ कर्मचारी संघ के बैनर तले अपने हक की आवाज बुलंद की है अब ऐसे में महज कुछ सुरक्षा किट को बटवा कर यदि कुछ लोग सोच रहे हैं की आंदोलन को दबाया जा सकता है तो यह बात वे गौर से सुन ले की जब तक मामले की विशेष जांच हो कर दोषियों को उनके किए की सजा नहीं मिल जाती तब तक कर्मचारी संघ किसी भी समझौते पर रजामंदी की मोहर नहीं लगाएगा।