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गुरुवार, 6 मई 2021

% का खेल पार्ट-6 बैठक के बहाने... लगे-रूठों को मनाने कहीं ये 181 की घंटी का ख़ौफ़ तो नहीं

 % का खेल पार्ट-6
बैठक के बहाने... लगे-रूठों को मनाने
कहीं ये 181 की घंटी का ख़ौफ़ तो नहीं




बिके हुए सूरज,

क्या ख़ाक रोशनी लुटाएंगे....


ख़ुदको बड़ा बतायेंगे,

फिर कौड़ियों में बिक जायेंगे....


विकास की कलम के पिछले संस्करण (% का खेल पार्ट 5) में हमने अपने पाठकों को बताया कि किस तरह से जबलपुर जिले की स्वास्थ्य कर्मचारी अपने साथ हुई  बेनाइंसाफी और दगाबाजी से तंग आकर अब कमीशन बाज अधिकारियों के खिलाफ आर-पार की जंग लड़ने का मन बना चुके हैं। अपनी इस जंग के शुरुआती दौर में स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले कलेक्टर , कमिश्नर से लेकर प्रभारी मंत्री तक को कमीशन बाजो की पोल पट्टी का लेखा-जोखा दिया जा चुका है। लेकिन किसी भी तरह की कार्यवाही ना होने पर सभी स्वास्थ्य कर्मचारी काली पट्टी बांधकर स्वास्थ्य सेवाएं देते हुए इस आस में अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। कि आखिर कभी तो जिम्मेदारों की नींद खुलेगी और कमीशन बाजों को बर्खास्त कर उन्हें न्याय दिलाया जाएगा।


आपको बता दें कि बीते दिनों से जिले भर के स्वास्थ्य कर्मचारी काली पट्टियां बांधकर कोविड-ड्यूटी को कर रहे है। खास बात यह है कि जिले भर में स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ हुए धोखे की कहानी जाहिर हो चुकी है लेकिन जिम्मेदारों की खामोशी यह बयान कर रही है जैसे उन्हें कुछ पता ही न हो। लेकिन कर्मचारी संघ के तेवर देख कर तो लगता है की कमीशन बाजो के खिलाफ उनकी जंग काफी लंबी चलने वाली है।


DPM ने आयोजित की अधिकारी/कर्मचारी संघ की बैठक..



प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला कार्यक्रम प्रबंधक महोदय (DPM) सुभाष शुक्ला द्वारा एक बैठक को आयोजित किए जाने का संदेश प्रसारित किया गया। जिसमें स्वास्थ्य विभाग के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी संगठन से उपस्थित होने की अपील की गई। बताया जा रहा है कि बैठक का आयोजन गुरुवार की दोपहर को जिला अस्पताल विक्टोरिया के आरसीएच मीटिंग हॉल में किया गया। जिसमें कोविड-19 महामारी में सेवाएं दे रहे मैदानी स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को आ रही समस्याओं की चर्चा के लिए मीटिंग रखी गयी थी। इसमें स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए रिज़र्व कोविड वार्ड बनाए जाने एवं अन्य सभी संबंधित विषय पर चर्चा किये जाने सहित  संगठनों के परामर्श एवं सुझाव आमंत्रित किये जाना बताया गया था।


नाराज कर्मचारियों के बीच DPM की बैठक के मायने..




उपरोक्त संदेश को पाकर स्वास्थ्य कर्मचारियों और कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों को लगा कि देर से ही सही लेकिन कम से कम जिम्मेदार बड़े अधिकारियों से उनकी आमने सामने की बात तो हो ही सकेगी। लेकिन बैठक में पहुंचे कर्मचारी संघ के सदस्यों की आशाओं में उस वक्त पानी फिर गया । जब उन्हें पता चला कि उपरोक्त मीटिंग में कोई भी बड़ा जिम्मेदार अधिकारी आया ही नहीं। जैसे तैसे DPM महोदय के नेतृत्व में बिना एजेंडों की बातचीत होना शुरू हो गई। सूत्र बताते हैं कि जब कर्मचारी संगठन के सदस्यों ने DPM से जीवन रक्षक लॉजिस्टिक और उससे जुड़े विषयों पर चर्चा करनी चाही, तो उन्हें कोई भी संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। कर्मचारी संगठन के सदस्यों की माने तो उन्होंने यह कयास लगाई थी कि आज की इस बैठक में भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से रूबरू होते हुए अपनी समस्याओं को रखेंगे। लेकिन बैठक की गंभीरता का अंदाजा आप सिर्फ इस बात से लगा लीजिए की इस बैठक में खुद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी अनुपस्थित रहे।लिहाजा कर्मचारियों की किसी भी समस्या का समाधान ना होने के कारण कर्मचारी नेता बैठक से नाखुश  ही दिखाई दिए।


मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की अनुपस्थिति में हुई बैठक... बेनतीजा


उपाध्यक्ष दुर्गा मेहरा
न्यू बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की प्रांतीय उपाध्यक्ष दुर्गा मेहरा ने विकास की कलम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय जबलपुर में सभी संघों के पदाधिकारियों को बुलाया तो गया, परंतु बैठक का एजेंडा निर्धारित न होने के कारण बैठक बेनतीजा हो गई ।कर्मचारियों की किसी भी समस्या का समाधान ना होने के कारण कर्मचारी नेता बैठक से नाखुश रहे।

कर्मचारियों की मूलभूत समस्याओं पर बात ही नहीं की गई। बल्कि डीपीएम स्वयं अपनी बातों को रख रहे थे। उन्होंने सभी मूलभूत समस्याओं हेतु मुख्य चिकित्सा अधिकारी से ही बात करने को कहा और वह बैठक में अनुपस्थित थे। अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार  कर्मचारी किसे अपनी समस्याओं से अवगत कराते।  कर्मचारी नेताओं की माने तो उनकी किसी भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। अतः  जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति में उपरोक्त बैठक बेनतीजा रही ।


कहीं सस्ती सहानुभूति के लिए.. पब्लिसिटी स्टंट तो नहीं खेला गया..


जानकारों की माने तो इस बैठक को लेकर बुधवार की रात से ही तरह-तरह की कानाफूसी शुरू हो गई थी। बताया जा रहा है कि बैठक के संदेश को लेकर स्वास्थ्य कर्मचारी और कर्मचारी संगठनों के बीच में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थी। कोई कह रहा था कि  काली पट्टी बांधकर काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मचारियों की शायद स्वास्थ्य विभाग को सुध आ गई है ।हो सकता है कि अब उनकी समस्याओं का समाधान हो पाएगा।

तो कहीं यह बातें भी सामने आ रही थी कि आंदोलन से घबराये कमीशन बाजो ने कहीं मैनेजमेंट का कोई नया खेल तो शुरू नहीं कर दिया। क्योंकि वाकई में यदि विभाग को स्वास्थ्य कर्मचारियों के प्रति जरा सी भी सहानुभूति होती तो वह बिना जीवन रक्षक लॉजिस्टिक के स्वास्थ्य कर्मियों को फील्ड पर उतरने ही ना देते।


अजास्क के तीखे सवालों का किसी के पास नहीं जबाब...


मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ अजाक्स के संभागीय अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह तेकाम ने विकास की कलम से बातचीत करते हुए कहा कि गुरुवार को आयोजित की गई बैठक किसी ढोंग से कम नहीं थी। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि जिस रिज़र्व कोविड वार्ड को बनाये जाने के लिए श्रेय लूटने की बैठक का दिखावा किया जा रहा था। उस विषय पर एक दिन पहले ही अजास्क को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी हरी झंडी दिखा चुके थे। रही बात कोविड 19 में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों के हितों की तो अजास्क कर्मचारी संघ पहले ही अपनी मंशा साफ कर चुका है। अब ऐसे में बैठक से बड़े अधिकारियों का नदारद रहना और खुद डीपीएम का स्वास्थ्य कर्मचारियों का हिमायती बन कर बैठक लेना अपने आप में ही बैठक की सफलता का राज बयां कर रहा है।


अपने ही मुंह मियां मिट्ठू बन कर..
सफल बैठक की जारी कर दी विज्ञप्ति..


बैठक के तत्काल बाद कर्मचारी संगठन के सदस्य और पदाधिकारियों ने बैठक के प्रति अपनी नाराजगी साफ साफ बयां कर दी ।उन्होंने यह तक कह दिया कि जब तक कोई बड़ा जिम्मेदार अधिकारी बैठक में नहीं आता। हम किसी भी विषय पर चर्चा नहीं करेंगे बावजूद इसके सोशल मीडिया में बैठक के पूर्ण रूप से सफल होने और कर्मचारी संगठनों के सहयोग की दास्तान भरी विज्ञप्ति भी जारी कर दी जाती है। जहाँ DPM द्वारा जारी संदेश में कहा गया है कि बैठक में कर्मचारियों के हित में लिये गए निर्णय का संघ द्वारा स्वागत किया गया। 

साथ ही कोरोना की डियूटी करते हुये बीमार होने वाले कर्मी के लिए दवा, किट और 20 बेड सुरक्षित रखने के निर्णय पर आभार व्यक्त कराया गया है।


अब इस तरह की बातों से एक बात तो साफ साफ बयां हो रही है की..


 जिरह भी हम करेंगे...

 दलील भी हम देंगे...

 और फैसला भी.. हम ही सुना देंगे...


अब ऐसे में कुछ कर्मचारी संगठन के सदस्यों का कहना है कि जब सब कुछ खुद ही कर लेना था। तो फिर पदाधिकारियों को बुलाने की जरूरत ही क्या थी..???


और भी अन्य रोचक खुलासों के साथ जल्द ही आएगा....अगला अंक....


बनें रहिए..विकास की कलम..पर








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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार