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शुक्रवार, 14 मई 2021

रेमेडेसिविर के बाद अब.. "ब्लैक फंगस" की दवाइयों पर जमाखोरों की नज़र...

 रेमेडेसिविर के बाद अब..
"ब्लैक फंगस" की दवाइयों पर
जमाखोरों की नज़र...


भोपाल-मध्यप्रदेश

कोरोना क्या कम था जो ब्लैक फंगस भी अब अपने तेवर दिखाने लगा है। जैसे तैसे प्रदेश और देश की जनता ने कोरोना संक्रमण पर संयम पाना शुरू ही किया था की इस ब्लैक फंगस नामक एक नई बला ने जनता व सरकार की चिंताएं दोगुनी कर दी। प्रदेश भर में दिन प्रतिदिन ब्लैक फंगस से संक्रमित मरीजों की आंकड़े बढ़ते ही जा रहे हैं । ऐसे में अचानक ब्लैक फंगस की दवाओं का आउट ऑफ स्टॉक हो जाना काफी चिंता का विषय बनता जा रहा है। समय पर मरीजों को दवाएं उपलब्ध ना होने से दवाइयों की जमाखोरी और कालाबाजारी की आशंकाएं भी बढ़ने लगी है। हालांकि सरकार की माने तो उन्होंने ब्लैक फंगस के मरीजों को निशुल्क उपचार दिए जाने का ऐलान किया है लेकिन संक्रमितों के परिजनों को जमीनी स्तर पर ऐसी कोई भी सुविधा नहीं मिल पाई है।


प्रदेशभर में आ रहे ब्लैक फंगस के गंभीर मरीज...


मध्य प्रदेश के तमाम जिलों में ब्लैक फंगस पांव पसारने लगा है यही कारण है कि बीते कुछ दिनों में ही अचानक ब्लैक पंकज से संक्रमित मरीजों की संख्या सामने आई है राजधानी भोपाल जबलपुर इंदौर एवं अन्य कई जिलों से ब्लैक फंगस के मरीजों की पुष्टि हुई है जिसमें कुछ मरीजों ने दम तोड़ दिया तो कुछ मरीजों के संक्रमित अंग ही निकालने पड़े


रेमेडेसिविर के बाद अब ब्लैक फंगस की दवा पर भी कालाबाजारीयों की नजर


कोरोना संक्रमण के उपचार के दौरान संजीवनी बूटी माने जाने वाले रेमेडेसिविर इंजेक्शन और ऑक्सीजन संबंधित उपकरणों की जमकर कालाबाजारी की गई। हालांकि सरकार ने अपना सख्त रवैया दिखाते हुए दवाओं के कालाबाजारी में लिप्त पाए जाने पर सख्त कार्यवाही करने और एनएसए लगाने के निर्देश दिए हैं लेकिन मुनाफाखोरों पर इस सख़्ती का कुछ खास असर होते दिखाई नहीं दे रहा। अब चूंकि कोरोना के साथ-साथ ब्लैक फंगस भी अपने तेवर दिखाने लगा है। लिहाजा ब्लैक फंगस के उपचार से जुड़ी दवाओं पर भी अब काला कारोबार करने वालों की पैनी नजर है


सरकार को होना होगा सचेत...
कहीं आपदा को अवसर में बदलकर सक्रिय ना हो जाए अवसरवादी..


ताजा हालातों की बात करें तो जिन जगहों पर ब्लैक फंगस से संक्रमित मरीजों की संख्या ज्यादा है वहां पर उपचार के दौरान दवाओं की कमी आ रही है। इस बीमारी का इलाज काफी महंगा है। वहीं मरीजों को दवाओं के संकट के दौर से गुजरना पड़ रहा है। कोरोना के मरीजों के लिए आवश्यक रेमडेसीविर इंजेक्शन के मामले में जिस तरह की कालाबाजारी और नकली इंजेक्शन की बिक्री के मामले सामने आए हैं, ठीक उसी तरह की आशंका ब्लैक फंगस की दवाओं को लेकर भी है। इसलिए राज्य सरकार को ध्यान देना चाहिए।


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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार