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सोमवार, 5 अप्रैल 2021

बिना बिल चुकाए पीछे के रास्ते से भाग रहे थे मरीज और परिजन.. फिर हुआ कुछ यूं..

 


बिना बिल चुकाए पीछे के रास्ते से भाग रहे थे मरीज और परिजन.. 

फिर हुआ कुछ यूं..




आपने अक्सर सुना होगा की कुछ लोग होटल में खाना खाते हैं और फिर बिल चुकाने के समय दबे पैर पीछे के रास्ते से भागने का प्रयास करते हैं जिसमें कई बार वे सफल भी हो जाते हैं लेकिन आज हम आपको ऐसा अजीबो गरीब किस्से सुनाने जा रहे हैं जहां बकायदा एक अस्पताल में इलाज करवाने के बाद बिल ना चुकाने की नियत से मरीज उसके परिजन ने गुपचुप तरीके से अस्पताल के पीछे वाले गेट से भागने का प्रयास किया हालांकि उनकी यह चोरी पकड़ी गई और फिर उसके बाद जमकर हंगामा खड़ा हुआ।

यह पूरी घटना मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में घटित हुई है। जहां एक मरीज के परिजनों ने पहले तो ईलाज करवाया और फिर ईलाज के रु न देने पड़े तो चोरी छिपे पीछे वाले गेट से भाग निकले जैसे ही ये खबर अस्पताल प्रबंधन को लगी तो उन्होंने अस्पताल के पास भगाते हुए मरीज और उनके परिजनों को पकड़ा इस दौरान विवाद हुआ और फिर पुलिस मौके पर आई। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे खास बात तो यह रहीं कि मरीज और उसके परिजनों के सपोर्ट में  सत्ताधारी पार्टी के  कुछ नेता भी पहुँच गए और अस्पताल प्रबंधन पर दबाव बनाने लगे जिसके बाद दवाबवश अस्पताल प्रबधंन को बिना रु लिए ही   मरीज को छोड़ना पड़ा.........


जानिए कौन है यह मरीज और को क्यों पहुंचा था अस्पताल


जानकारी के मुताबिक दमोह जिला के पथरिया में एक युवक क्रेशर में फसल की गहाई कर रहा था उसी दौरान उसका हाथ चपेट में आ गया और कट गया,आनन फानन में परिजन पथरिया स्वास्थ्य केंद्र फिर दमोह जिला अस्पताल पहुँचे जहाँ से उन्हें मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया,परिजन युवक को लेकर मेडिकल कॉलेज ईलाज के लिए पहुँचते है उसी दौरान मेडिकल कालेज में एक युवक से उनका संपर्क होता है जो कि उन्हें आश्वाशन देता है कि कम से कम पैसों में उसका अच्छी अस्पताल में ईलाज हो जाएगा......

मेडिकल कॉलेज में जिस युवक से मरीज के परिजनों का संपर्क होता है उसकी बातों में आकर परिजन सर्वोदय अस्पताल पहुँचते है जहाँ हाथ के इलाज के लिए प्रबधंन एक लाख रु बताता है बाद में परिजन 70 हजार रु देने को तैयार हो जाते है और 20 हजार रु देकर इलाज शुरू किया जाता है......


कटा हाथ जोड़ने को कहा था पर नही  जोड़ा गया इसलिए नही देंगे रु....परिजन

परिजन ने इस आधार पर ईलाज करवाया था कि युवक का कटा हाथ जोड़ दिया जाएगा पर हाथ नही जोड़ा गया इसलिए हम और रु नही दे सकते,इतना कहते हुए थोड़ी देर बाद परिजन बिना बताए मरीज को लेते हैं और चुपचाप अस्पताल से बाहर निकल आते है,जैसे ही ये जानकारी अस्पताल प्रबंधन को लगती है तुरन्त वो लोग मरीज के परिजनों को पकड़कर अस्पताल लेकर आते है जहाँ परिजन और अस्पताल प्रबंधन के बीच मारपीट हो जाती है.......

ईलाज करने से पहले बता दिया था खर्चा:अस्पताल प्रबधंन...

इधर सर्वोदय अस्पताल के डायरेक्टर का कहना है कि मरीज जिस समय आया था उसकी हालत बहुत नाजुक दी और हाथ से खून भी बह रहा था मरीज के ऑपरेशन का खर्चा करीब 70 हजार रु बताया गया था पर परिजन अपनी माली हालत खराब बताकर 40 हजार रु देने को कह रहे थे जिस पर से की अस्पताल प्रबधंन तैयार हो गया,और उनसे 20 हजार रु नगद जमा करवाए गए पर जब मरीज ठीक हो गया तो बाकी की रकम दिए बिना ही चले गए जिस पर से उन्हें पकड़ा गया था........


सूचना पर अस्पताल पहुँची पुलिस-दोनों पक्ष ने दर्ज करवाई शिकायत.....


सर्वोदय अस्पताल में प्रबधंन और मरीज के परिजनों का विवाद हो गया ये सूचना जैसे ही ओमती पुलिस को मिलती है वह मौके पर पहुँचती है जहाँ दोनो पक्ष एक दूसरे की शिकायत करते है,परिजनों का कहना था कि अस्पताल प्रबंधन ने मारपीट की है वही प्रबधंन ने भी परिजनों के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज करवाई है.......


आखिर कौन है वह बिचौलिया जिसने मेडिकल कॉलेज में मरीज के परिजनों से किया था संपर्क


दमोह-पथरिया से जबलपुर मेडिकल कॉलेज ईलाज करवाने पहुँचे मरीज के परिजनों से किस युवक ने संपर्क किया और फिर उसे निजी अस्पताल में लेकर आया था ये अभी भी रहस्य बना हुआ है,कही ऐसा तो नही कोई गैंग सक्रिय है जो कि सरकारी अस्पताल में जाने वाले मरीजो को कम पैसे में अच्छा ईलाज का प्रलोभन देकर लाते हो,बहरहाल पुलिस अब सभी एंगल से जाँच करने में जुटी हुई है........



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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार