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संकट में वाॅरियर्स:

 नौकरी जाने के डर से सरकार को भेजी चिट्‌ठी, कहा- कोरोनाकाल में जोखिम लेकर सेवाएं दीं, हमारे भविष्य की चिंता करें

 


अनुबंध के तहत नौकरी कर रहे पैरामेडिकल स्टाफ का कहना है कि उन्हें संविदा नौकरी पर रखा जाए।

कोरोना काल में जान की परवाह किए बगैर काेराेना मरीजाें की सेवा में लगे स्वास्थ्यकर्मी और पैरामेडिकल स्टूडेंट काे अब नाैकरी जाने का डर सताने लगा है। इसी डर काे उन्हाेंने आवदेन के जरिए स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण जडिया के पास पहुंचाया है। नियमितीकरण की मांग काे लेकर ये लाेग जिला स्वास्थ्य कार्यालय पहुंचे। यहां ज्ञापन देकर संविदा भर्ती पर रखे जाने की मांग की है।

डॉ. जडिया को पैरामेडिकल स्टाफ ने ज्ञापन सौंपा।

कुछ ऐसा है आवेदन...

महाेदय, हम सभी कोविड -19 चिकित्सा अधिकारी और स्टाफ (आयुष चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन) पिछले 8 महीनों से जान जोखिम में डाल कर काम कर रहे हैं। सरकार आवश्यकताओं के अनुसार हमारा अनुबंध घटा-बढ़ा रही है, किंतु हमने जिन परिस्थितियों में सरकार का साथ दिया है, उन्हें ध्यान में रखते हुए हमें संविदा में लिया जाए। सरकार के स्वास्थ्य विभाग में पर्याप्त रिक्तियां हैं। क्योंकि इतने महीनों से काम करना और अब हमें अचानक से बेरोजगार करना उचित नहीं है। हमारी प्राइवेट नौकरी और क्लिनिक भी छूट चुकी हैं।

तीन महीने की अस्थाई नौकरी थी

वहीं, मामले में सीएमएचओ डॉ. जडिया ने कहा कि कोविड-19 में आवश्यकता पड़ने पर तीन माह की अस्थाई नौकरी का प्रस्ताव सरकार द्वारा दिया गया था, जिसमें पैरामेडिकल के छात्रों द्वारा ज्वॉइन किया गया था। यह वही डॉक्टर थे, जिन्होंने 3 महीने कोरोना में सेवा दी। राज्य शासन महीने दर महीने इनकी सेवा को बढ़ा रही है। इनका कार्यकाल 31 दिसंबर तक का बढ़ा दिया गया है। इनकी मांग है कि एक-एक महीने बढ़ाने के बजाय संविदा नियुक्ति कर दी जाए। डॉ. जडिया ने कहा कि निश्चित तौर पर इन्होंने मुश्किल दौर में अच्छा काम किया है। इनकी जो भी मांगें हैं, उन्हें राज्य शासन तक भेजा जाएगा। ये लोग किसी प्रकार से हड़ताल पर नहीं गए हैं। इन्होंने पत्र भेजा है। बस, जरूरी यह है कि पद उतने होना चाहिए। ये करीब 40 लोग हैं।

सरकार हमें संविदा नौकरी पर रखे

पैरामेडिकल छात्राें का कहना था कि हम लॉकडाउन के समय से काम कर रहे हैं। हमें तीन महीने के अनुबंध पर रखा गया था, जिसे बढ़कर बाद में 8 महीने कर दिया गया। कोरोना के ऐसे समय में हमने सरकार का साथ दिया है, जब सरकार को जरूरत थी। हमें सरकार या तो संविदा में रखे या स्थाई नियुक्ति दे दे, जिससे हमारा भविष्य सुरक्षित हो सके। प्रदेशभर में हमारी संख्या 7 हजार से ज्यादा है। सीएम ने इसे लेकर आश्वासन जरूर दिया है। कई जिलों में साथियों को निकाला जा चुका है। मप्र कोविड संगठन बन रहा है, संगठन के आदेश पर रणनीति पर काम किया जाएगा।

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