"शनि -बृहस्पति का संयुग्मन" दो सितारों का जमीं पर है मिलन आज की रात देखना ना भूलें यह अद्भुत खगोलीय घटना - Vikas ki kalam,जबलपुर न्यूज़,Taza Khabaryen,Breaking,news,hindi news,daily news,Latest Jabalpur News

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"शनि -बृहस्पति का संयुग्मन" दो सितारों का जमीं पर है मिलन आज की रात देखना ना भूलें यह अद्भुत खगोलीय घटना

"शनि -बृहस्पति का संयुग्मन"

दो सितारों का जमीं पर है मिलन
आज की रात 
देखना ना भूलें 
यह अद्भुत खगोलीय घटना





अंतरिक्ष में वैसे तो रोजाना कई खगोलीय घटना घटित होती हैं अंतरिक्ष हमारी कल्पना से भी विशाल है और यहां अनेकों आकाशगंगा है जो अपने भीतर सैकड़ों सौरमंडल समेटे हुए हैं लेकिन कभी-कभी खगोलीय घटनाये तब खास बन जाते हैं जब उन्हें आसानी से धरती से भी देखा जा सकता है ऐसी ही एक खगोलीय घटना है दो बड़े ग्रहों का संयोजन...

जब दो ग्रहों को आकाश में एक-दूसरे के करीब देखा जाता है तो घटना को ग्रहों का संयोजन (कंजक्शन) कहा जाता है। ऐसी ही एक अद्भुत और चमत्कारिक खगोलीय घटना  21 दिसंबर  दिन सोमवार को होने जा रही है जिसमें सौरमंडल के दो विशाल ग्रह एक दूसरे के काफी नजदीक आ जाएंगे । खगोलीय भाषा में इन ग्रहों बृहस्पति- शनि के इस संयोजन को महान संयुग्मन कहा जाता है। इस दिन दोनों ग्रहों के बीच का कोण एक-दूसरे से चाप के लगभग न्यूनतम 0.1 डिग्री शून्य दशमलव एक डिग्री होगा। यह एक बहुत ही विशेष घटना होगी। जिसे नग्न आंखों से पृथ्वी से आसानी से देखा जा सकेगा


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21 दिसंबर को बृहस्पति और शनि होंगे बेहद पास पास


21 दिसंबर 2020 का दिन बेहद खास होने वाला है क्योंकि इस दिन सौरमंडल के 2 सबसे बड़े ग्रह शनि और बृहस्पति कई वर्षों के बाद अपनी कक्षा में परि भ्रमण करते हुए एक दूसरे को स्पर्श करते हुए नजर आएंगे। आपको बता दें कि सूर्यास्त के बाद दक्षिण पश्चिम दिशा में बिना किसी उपकरण के इन ग्रहों को देखा जा सकेगा यह दोनों ग्रह है तारों के समान दिखाई देंगे स्काईमेप एप की सहायता से इन्हें और अच्छे से देखा जा सकेगा।


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आइए जानते हैं इन दो बड़े ग्रह बृहस्पति और शनि के बारे में



बृहस्पति सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। यह मुख्य रूप से गैस का एक तेजी से घूमने वाला गोला है जिसमें विशेष रूप से अमोनिया के बादल होते हैं और इसकी कोई ठोस सतह नहीं होती है।


शनि में मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम होते हैं। इसके वायुमंडल में 90% नाइट्रोजन और (-184oC) का तापमान है। यह हाइड्रोजन साइनाइड से भी बना है जो एक अत्यधिक जहरीली गैस है। यह एक अंगूठी की विशेषता है जो इसे चारों ओर से घेरे हुए है


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इस दुर्लभ घटना की जानकारी देते हुए कल्पना चावला विपनेट क्लब शहडोल के क्लब कोऑर्डिनेटर संतोष कुमार मिश्रा ने जानकारी देते हुए कहा कि इस घटना को जिले में भी सूर्यास्त के बाद दक्षिण पश्चिम दिशा में बिना किसी उपकरण के भी देखा जा सकता है यह दोनों ग्रह तारों के समान दिखाई देंगे उन्होंने बताया कि सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरा करने में पृथ्वी को 365 दिन या 1 वर्ष लगता है लेकिन बृहस्पति को सूर्य से पृथ्वी की तुलना में अधिक दूरी होने के कारण 12 वर्ष लगते हैं वही शनि ग्रह को इस परिक्रमा को पूरा करने में 30 वर्ष लगते हैं। 21 दिसंबर की खगोलीय घटना के बाद दोबारा यह ग्रह 15 मार्च 2080 को इतने पास दिखाई देंगे।


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मौसम ठीक रहा तो देंगे दिखाई


यदि मौसम अनुमति देगा तो दोनों ग्रह सूर्यास्त के लगभग 30 मिनट बाद पश्चिमी क्षितिज के ऊपर नग्न आंखों को दिखाई देंगे। 20 से 23 दिसंबर तक, वे एक साथ इतने करीब होंगे कि एक को दूसरे से अलग देख पाना आसान नहीं होगा। ऐसी स्थिति को डबल प्लेनेट भी कहा जाता है।


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अब 2080 में ग्रह करीब आएंगे




इसके बाद 15 मार्च 2080 को यह दोनों ग्रह फिर से करीब आएंगे। इतने ही करीब दिखेंगे। सीवी रमन विपनेट विज्ञान क्लब के समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि क्लब सदस्य इस ग्रेट कजंक्शन का अवलोकन करेंगे। इससे संबंधित अपने प्रेक्षणों को विश्व अंतरिक्ष संगठन के साथ सांझा भी करेंगे। 21 दिसंबर शीतकालीन अयनांत के दिन के समय सोलर नून गणना प्रयोग व पृथ्वी की परिधि का प्रयोग भी करेंगे। 21 दिसंबर शीतकालीन अयनांत अर्थात सबसे छोटा दिन भी होता है।


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ज्योतिष के नजरिए से भी अहम घटना


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बृहस्पति को ग्रहों का राजा माना जाता है. यह सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है. इसे देवताओं के गुरु की उपाधि दी गई है. बृहस्पति का प्रभाव शुभ फल प्रदान करता है. यह व्यक्ति को न्याय की तरफ अग्रसर करता है. वहीं शनि की गिनती क्रूर ग्रहों में होती है. यह दंड देकर व्यक्ति को सुधारते हैं. लेकिन दोनों ही ग्रह न्यायप्रिय हैं. यह मनुष्य को न्यायोचित जीवन देने की प्रेरणा देते हैं. लेकिन दोनों का तरीका अलग अलग है। न्याय की भावना प्रधान होने के कारण दोनों में नैसर्गिक संबंध होता है.


वैदिक ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक शनि एक राशि में लगभग 2.5 साल जबकि बृहस्पति एक राशि नें 12 से 13 माह तक रहते हैं. इस बार की युति के दौरान दोनों ही ग्रह मकर राशि में उपस्थित हैं. जो कि शनि की स्वराशि है।


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विकास की कलम

चीफ एडिटर

विकास सोनी

लेखक विचारक पत्रकार


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