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बलात्कार की जांच को प्रभावित करने 2 पुलिस वालों ने बदल दिए ब्लड और स्पर्म के सैंपल

बलात्कार की जांच को प्रभावित करने
2 पुलिस वालों ने बदल दिए
ब्लड और स्पर्म के सैंपल





(स्वप्निल श्रीवास्तव-भोपाल)


किसी भी मामले में जांच के दौरान पुलिस की भूमिका काफी अहम होती है आम आदमी को यह विश्वास होता है कि पुलिस के पहरे में होने वाली जांच पूर्णता निष्पक्ष और सच होगी लेकिन मध्य प्रदेश पुलिस के कुछ लोगों ने पूरे डिपार्टमेंट के मुंह में कालिख पोत दी है। उन्होंने अपनी करतूतों से कुछ ऐसी नजीर पेश की है जिसके चलते आम जनता का और खास तौर पर पीड़ितों का विश्वास पुलिस जांच से उठ गया है इस लेख का उद्देश्य किसी भी तरीके से पुलिस प्रशासन का मनोबल गिराने का नहीं है बल्कि पुलिस प्रशासन के कुछ ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को बेनकाब करने का है जिनकी वजह से पूरा डिपार्टमेंट बदनाम हो रहा है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और ऐसा क्या हो गया..?? जो पुलिस प्रशासन ही कटघरे में आकर खड़ा हो गया।


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जानिए क्या है घटना कहां का है मामला


 पुलिस प्रशासन की साख में पलीता लगाने वाली है घटना मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले में घटित हुई है। जहां एक युवती से दुष्कर्म के आरोपी पुलिस कांस्टेबल को बचाने के लिए उसके ही दो अन्य साथी कॉन्स्टेबल जांच को गुमराह करने का अपराध कर डाला यदि यह दो पुलिसकर्मी अपने मंसूबे में कामयाब हो जाते हो तो जांच एजेंसियों की सारी मेहनत धरी की धरी रह जाती और इसके साथ ही रेप पीड़िता गुनहगार पुलिसकर्मी को कभी भी सजा नहीं दिलवा पाती। एक तरफ ड्यूटी की कर्तव्यनिष्ठता तो दूसरी तरफ सहकर्मी पुलिस वाले कि दोस्ती का धर्म। इस पूरी कशमकश में ड्यूटी को दरकिनार रखते हुए दो पुलिसकर्मियों ने अपनी दोस्ती का धर्म निभाया और आरोपी पुलिसकर्मी के ब्लड और स्पर्म (वीर्य) के सैंपल बदल डाले। यह तो गनीमत रही कि उनकी साजिश सफल ना हो सकी और पुलिस के आला अधिकारियों को इस बात की भनक लग गई।


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जानिए आखिर कौन है यह युवती जिसने दर्ज कराई थी शिकायत


पीड़ित युवती उन्हेल की रहने वाली है जोकि नीलगंगा थाना क्षेत्र के न्यू अशोक नगर में किराए के मकान में रहकर सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रही थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार 3 साल पूर्व उसकी मुलाकात पड़ोस में रहने वाले पुलिस कॉन्स्टेबल अजय अस्तेय से हुई थी। पहचान कब दोस्ती में बदल गई और दोस्ती कब प्यार में तब्दील हो गई पता ही नहीं चला उसके बाद पुलिस कांस्टेबल अजय ने युवती को शादी का वादा करते हुए उसके साथ 2 साल से भी अधिक समय तक उसका शारीरिक शोषण करता रहा मामले में तनाव की स्थिति तब उत्पन्न हुई जब पीड़ित युवती को पता चला कि उसका प्रेमी अजय किसी अन्य युवती के साथ सगाई कर रहा है लिहाजा युवती ने नीलगंगा थाने में कॉन्स्टेबल अजय के खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज करा दिया। युवती की शिकायत के महज कुछ ही घंटों में आरोपी पुलिस कांस्टेबल अजय अस्तेय को गिरफ्तार कर लिया गया ।


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आरोपी कांस्टेबल को बचाने दूसरे के सैंपल से बदला आरोपी का सैंपल


आरोपी पुलिस कांस्टेबल अजय को गिरफ्तार करने के बाद युवती से दुष्कर्म की पुष्टि के लिए जांच को आगे बढ़ाया गया और आरोपी कॉन्स्टेबल को ब्लड ओर स्पर्म के सैंपल की टेस्टिंग जांच के लिए अस्पताल भेजा गया। इस दौरान आरोपी कांस्टेबल को बचाने के लिए उसके साथ गए दो अन्य साथी कॉन्स्टेबल ने दोस्ती निभाते हुए अपने सहकर्मी पुलिस कांस्टेबल को बचाने के लिए एक गहरी साजिश रच डाली इस साजिश के तहत दो अन्य कांस्टेबलों ने अस्पताल में आरोपी की बजाए दूसरे के ब्लड और स्पर्म (वीर्य) के सैंपल दे दिए।


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अस्पताल में चालाकी दिखाते हुए चचेरे भाई का दिलवाया सैंपल


नीलगंगा थाने के आरक्षक घनश्याम मालवीय व महिला थाने में पदस्थ आरक्षक तबरेज आरोपित के दोस्त हैं। दोनों ने मिलकर अजय को बचाने व सजा नहीं हो इसके लिए मेडिकल के दौरान चालाकी दिखाते हुए अजय के चचेरे भाई बलराम सूर्यवंशी को मेडिकल के लिए खड़ा कर दिया। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ. अजय दिवाकर ने जब मेडिकल करवाने के लिए खड़े हुए बलराम से मास्क उतारने को कहा तो सभी पुलिसकर्मियों के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। सभी ने मास्क उतारने से इंकार कर दिया। इस पर डॉक्टर दिवाकर ने सख्त लहजे में मास्क हटवाया तो वह मेडिकल के लिए खड़े युवक का चेहरा देखकर दंग रह गए। मेडिकल के लिए बलराम खड़ा हुआ था। डॉ. दिवाकर ने मेडिकल करने से इंकार कर दिया। इस पर पुलिसकर्मियों ने भी विवाद करते हुए चिकित्सक से अभद्रता की।


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पुलिस के आला अधिकारियों को लगी साजिश की भनक फिर गिरी साथी कॉन्स्टेबल पर गाज


रेप के आरोपों की जांच के लिए पुलिस ने आरोपी कांस्टेबल को ब्लड गैस पंप की टेस्टिंग के लिए अस्पताल भेजा लेकिन उसके साथ गए दो अन्य पुलिसकर्मियों ने आरोपी के  ब्लड और स्पर्म के सेंपल को अपने  ब्लड और स्पर्म सैंपल से बदल दिया। इससे पहले की आरोपी पुलिसकर्मी को बचाने के लिए उसके सहकर्मी पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए गोलमाल की साजिश कामयाब होती अस्पताल पवन डंकोर साजिश का पता लग गया जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने इस पूरे मामले की जानकारी पुलिस के आला अधिकारियों को दी।

सूत्रों के अनुसार कॉन्स्टेबलों के द्वारा की गई इस साजिश का जब आला अधिकारियों को पता चला तो उन्होंने आरोपी पुलिस कॉन्स्टेबल अजय को शनिवार को जेल नहीं भेजा बल्कि रविवार को पुनः एक सब इंस्पेक्टर की निगरानी में आरोपी का फिर से मेडिकल परीक्षण कराया गया इसके बाद आरोपी कांस्टेबल को सेंट्रल जेल भैरवगढ़ भेजा गया वही मामला खुलते ही सभी 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है तीनों आरोपी कॉन्स्टेबल को नौकरी से बर्खास्त करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कॉन्स्टेबलों की इस साजिश का जब उच्चाधिकारियों का पता चला तो उन्होंने अजय को शनिवार (5 दिसंबर) को जेल नहीं भेजा। रविवार यानी 6 दिसंबर को एक सब इंस्पेक्टर की निगरानी में आरोपी का फिर से मेडिकल परीक्षण कराया गया। इसके बाद सेंट्रल जेल भैरवगढ़ भेजा गया।


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विकास की कलम

चीफ एडिटर

विकास सोनी

लेखक विचारक पत्रकार



 

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