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आबकारी आयुक्त की कारगुजारीओं से.. सरकार को 100 करोड़ का चूना.. हाईकोर्ट में पूर्व मंत्री ने लगाई याचिका...

सहायक आबकारी आयुक्त की कारगुजारीओं से..
सरकार को 100 करोड़ का चूना..
हाईकोर्ट में पूर्व मंत्री ने लगाई याचिका...




मध्य प्रदेश की हालत अब किसी से छुपी हुई नहीं एक तो कोरोना की मार के चलते मध्य प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान पहले से ही प्रदेश की स्थिति सुधारने लाखों करोड़ों का कर्ज ले चुके हैं जिसके चलते प्रदेश की जनता के ऊपर भी टैक्स के रूप में इसका भार पड़ रहा है लेकिन इन सबके बीच कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं जिनकी 10 उंगलियां घी में नजर आ रही है और वे धड़ल्ले से सरकारी खजाने को लूटने का काम कर रहे हैं। शिकायतें होने के बावजूद भी ऐसे अधिकारियों पर ना तो कोई कार्यवाही की जा रही है और ना ही कोई जांच। कुछ इसी तरीके के सनसनीखेज आरोप लगाते हुए पूर्व राज्य मंत्री एवं पूर्व भाजपा विधायक हरेंद्र जीत सिंह बब्बू ने एक भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।


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जानिए..?? पूर्व मंत्री ने किस अधिकारी के खिलाफ दायर की याचिका




पूर्व मंत्री हरेंद्र जीत सिंह बब्बू ने हाईकोर्ट में आबकारी विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर सत्यनारायण दुबे के खिलाफ याचिका दाखिल की है। याचिका में दावा किया गया है कि श्री दुबे के कारण सरकार को 100 करोड रुपए का नुकसान हुआ है। लेकिन कई शिकायतों के बावजूद जांच नहीं कराई गई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय यादव व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई आठ दिसंबर को निर्धारित कर दी है। बीते मंगलवार को प्रारंभिक रूप से याचिका पर गौर किया गया।


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अधिकारों का दुरुपयोग कर रहे सहायक आबकारी आयुक्त...




पूर्व मंत्री बब्बू की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि सहायक आबकारी आयुक्त दुबे ईमानदारी से कर्तव्य निर्वहन नहीं कर रहे हैं। बल्कि वे अपने पद और अधिकारों का दुरुपयोग कर अवैध गतिविधियों को संचालित किए जाने में सहयोग कर रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता उमेश त्रिपाठी की दलील है कि असिस्टेंट कमिश्नर दुबे अवैध शराब की बिक्री व परिवहन में स्थानीय शराब माफिया की मदद कर रहे हैं। देशी और अंग्रेजी शराब दुकानों में बिना कोई अनुमति, लाइसेंस के, लाइसेंस फीस या एक्ससाइज डयूटी लिए बिना अहाते खोलने दिए गए।


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फिर उठा आर्मी कैंटीन के लाइसेंस का मुद्दा


याचिकाकर्ता ने आरोप लगाते हुए कहा कि सहायक आबकारी आयुक्त के सानिध्य में बिना लाइसेंस फीस जमा किए हुए साल के आरंभ से ये अहाते चल रहे हैं। जिसके चलते सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हुई। इसी तरह आर्मी कैंटीन को असिस्टेंट कमिश्नर दुबे ने जानबूझकर एक माह तक एफएल-6 लाइसेंस नहीं दिया। इससे करीब तीन करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ। इसके लिए उन्हें शोकॉज नोटिस दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 


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लॉकडाउन के दौरान धड़ल्ले से बिकवाई गई शराब


लॉकडाउन के दौरान जबलपुर जिले की देशी शराब दुकानें लूटी गईं। असिस्टेंट कमिश्नर दुबे के सामने ठेकेदारों ने दुकानों से शराब निकलवाई। पूरे लॉकडाउन के दौरान महंगी दरों पर ये शराब बेची गई।  जब पूरे शहर में कर्फ्यू की स्थिति थी उस समय भी शहर के हर गली और मोहल्ले में शराब की आपूर्ति की जा रही थी ऊल-जलूल दामों में खुलकर शराब का कारोबार चल रहा था। शराब माफियाओं ने इस आपदा को अवसर की तरह भंजाया और इस पूरे गोरखधंधे में आबकारी विभाग अपनी मुख सहमति देते हुए पूरी गतिविधियों को अंजाम दिए जाने में सहायता कर रहा था।सब कुछ जानते हुए भी बेचने वालों पर कोई कार्रवाई न कर सरकार को करीब 50 करोड़ रुपये की राजस्व क्षति पहुंचाई।


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शिकायत और शोकॉज नोटिस को भी हजम कर गए जिम्मेदार....


 याचिका में आरोप लगाया गया है कि आबकारी आयुक्त दुबे के अवैधानिक कृत्य और कर्तव्य न निभाने को स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने गम्भीरता से लिया। संभागायुक्त महेश चौधरी व पूर्व कलेक्टर भारत यादव तथा छवि भारद्वाज ने भी दुबे को शोकॉज नोटिस दिए। असिस्टेंट कमिश्नर दुबे के इस कृत्य की शिकायत तीन पूर्व मंत्रियों, एक पूर्व व एक वर्तमान विधायक ने मुख्यमंत्री से भी की। असिस्टेंट कमिश्नर सत्य नारायण दुबे ने अपनी अवैध गतिविधियों के चलते राज्य सरकार को करीब 100 करोड़ रुपये की चपत लगाई, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नही की गई। याचिका में आग्रह किया गया कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारी को विधि अनुसार दंडित किया जाए। ताकि सरकार को हो रहा नुकसान रोका जा सके।


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विकास की कलम

चीफ एडिटर

विकास सोनी

लेखक विचारक पत्रकार


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