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एमपी में समर्थन मूल्य चाहिए..?? तो गाइडलाइन के आधार पर ही.. करनी होगी.. धान की खेती..

 

एमपी में समर्थन मूल्य चाहिए..??
तो गाइडलाइन के आधार पर ही..
करनी होगी.. धान की खेती..




किसानों को खेती के लिए उन्नत तकनीक सिखाने और इसके साथ साथ फसल की गुणवत्ता को निखारने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने एक नई मुहिम का आगाज किया है। सरकारी तंत्र का दावा है कि इस नई मुहिम से ना केवल किसान जागरूक होगा बल्कि उसे उन्नत तकनीक और उच्च कोटि के बीज एवं खाद उपलब्ध कराए जाएंगे। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के कृषि विभाग ने बकायदा धान की खेती के लिए एक गाइडलाइन भी जारी की है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की इस गाइडलाइन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यदि मध्य प्रदेश का कोई किसान इन गाइडलाइन ओं का फाइल पालन नहीं करता है तो उसकी फसल समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदी जाएगी।


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प्रदेश भर में कलेक्टरों को भेजे गए आदेश


प्राप्त जानकारी के अनुसार कृषि मंत्रालय द्वारा प्रदेश भर के कलेक्टर कार्यालयों में यह सरकारी आदेश भेजा जा चुका है। आदेश में किसानों के लिए मध्य प्रदेश के कृषि विभाग द्वारा धान की खेती करने के लिए विशेष गाइडलाइन जारी की गई है। इस पूरी योजना के पीछे जिम्मेदारों ने यह तर्क दिया है कि कई बार किसान जानकारी के अभाव में गलत बीज खरीद लेते हैं जिसके परिणाम स्वरूप उत्पन्न हुई फसल की गुणवत्ता काफी निम्न स्तर की होती है और अंततः सरकार को भी किसानों की इस निम्न स्तर की फसल को खरीदना पड़ता है यही कारण है कि किसानों को जागरूक करने और अच्छी फसल की पैदावार करवाने के उद्देश्य से सरकार ने यह गाइड लाइन जारी की है


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यहां समझिए.. जारी की गई गाइडलाइन की बारीकियां..


मध्य प्रदेश सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर किसानों की धान खरीदने की प्रक्रिया में गुणवत्ता प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा धान की खेती के लिए गाइडलाइन जारी की गई है जिसका एकमात्र उद्देश्य किसानों की पैदावार हो और भी उन्नत करना है। धान की खेती के लिए जारी की गई गाइडलाइन के मुताबिक...


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कृषि विभाग देगा किसान को बीज..


किसानों के खेतों में धान का कौन सा बीज रोपा जाएगा इसका फैसला अब किसान नहीं बल्कि कृषि विभाग और सरकार करेगी । किसानों को अपने खेत में बोने के लिए धान का बीज कृषि विभाग द्वारा ही उपलब्ध कराया जाएगा।

 इतना ही नहीं कृषि विभाग का अधिकारी जिस कंपनी के बीज की वकालत करेगा किसान को अपने खेतों में वही बीज बोना पड़ेगा।


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मिलर्स से लेना होगा क्वालिटी सर्टिफिकेट


मध्यप्रदेश में जारी की गई धान की खेती की गाइड लाइन के अनुसार किसान को अपने खेतों में फसल बोने से पहले मिलर्स से बेस्ट क्वालिटी का एक सर्टिफिकेट लेना होगा। जो यह सुनिश्चित करेगा की किसान द्वारा खेती के दौरान अपनाई गई तकनीक काफी उन्नत और सरकारी गाइडलाइन के अनुरूप है। अगर किसी किसान के द्वारा मिलर्स के सर्टिफिकेट के बिना अपने खेतों में धान की बुवाई की जाती है तो वह किसान अपनी फसल को समर्थन मूल्य पर सरकार को नहीं भेज पायेगा या यूं कहें बिना सर्टिफिकेट के पैदा की गई फसल की जवाबदारी सरकार नहीं लेगी।

इसके साथ ही साथ धान की क्वालिटी तय करने के लिए खाद्य विभाग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाएगी। आदेश के मुताबिक यदि धान की फसल उत्तम क्वालिटी की नहीं होती है तो उसे समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा जाएगा।


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किसान कॉल सेंटर के जरिए दी जा रही जानकारी


इस गाइड लाइन के जरिए एक और जहां किसान की धान की खेती को उन्नत करने का प्रयास किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ धान का उपार्जन मंडी में और अधिक सरलता से कैसे हो। इसके लिए सरकार पूरी तरह से प्रयासरत है। इस मामले में प्रमुख सचिव फैज अहमद किदवई ने कहा कि खरीफ फसल के उत्पादन के लिए किसान को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जा रही है। वहीं असुविधा होने की स्थिति में किसान कॉल सेंटर में अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। इसके अलावा कॉल सेंटर से प्रतिदिन जिले के लगभग 10 किसानों को फोन पर उपार्जन से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी जा रही है। 


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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार


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