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मंगलवार, 22 दिसंबर 2020

नचनियों के ठुमकों से झूमा गाँव.. आखिर कहां है..कोरोना गाइडलाइन का पालन कराने वाले..

नचनियों के ठुमकों से झूमा गाँव..
आखिर कहां है..कोरोना गाइडलाइन का
पालन कराने वाले..





(हाशिम खान-सिवनी)

बिना मास्क लगाए घर से निकल जाओ तो रास्ते में खड़े पुलिसकर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा एक झटके में चालानी कार्यवाही कर दी जाती है। यदि दुकान में सैनिटाइजर ना हो और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन ना किया जा रहा हो तो भी स्वास्थ्य विभाग के अमले की टीम तत्काल चालानी कार्यवाही करती है और होना भी चाहिए क्योंकि जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आ जाती, तब तक सावधानी ही बचाव है। लेकिन इन सबके बीच कोरोना गाइडलाइन  का सख्ती से पालन कराने का दम भरने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की एक बहुत बड़ी चूक सामने आई है। दरअसल गांव में लगने वाले मड़ई मेले में एक भव्य आयोजन होता है। जहां दोपहर को बकायदा सैकड़ों हजारों ग्रामीणों के बीच मेले की धूम रहती है , तो रात को ग्रामीणों के मनोरंजन के लिए नचनियो के नाच की भी व्यवस्था की जाती है। इस दौरान देर रात तक ठुमके लगाने का सिलसिला जारी रहता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोरोना आपदा काल के दौरान ना तो यहां कोई सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का ख्याल रखा गया और ना ही कोई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहा जो इतनी बड़ी संख्या में कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती बरत सके।


*जानिए..ऐसा क्या हुआ कि.??* *10 सरकारी और निजी बैंक* *कर दिए गए सील..*


कहां का है मामला.. क्या है पूरी कहानी..??




कोरोना गाइडलाइन की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता जाहिर करने वाला यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के छपारा से सामने आया है जहां ग्राम मडवा में रविवार को गांव में मड़ई मेले का आयोजन किया गया । इस मड़ई-मेले को देखने आसपास के गांव के सैकड़ों और हजारों ग्रामीण उमड़ पड़े। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का हुजूम किसी एक जगह पर  होना और किसी भी तरीके के प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस कर्मियों का मौजूद ना होना। जिले की प्रशासनिक व्यवस्था पर कई बड़े सवालिया निशान खड़े कर रहा है।


*यह दवा ले लो..तो* *रात भर पढ़ सकोगे..* *कुछ इस अंदाज में..* *बेची जा रही थी ड्रग्स..*


आयोजकों ने छत्तीसगढ़ से बुलवाई थी नचनिया.. देर रात तक जमकर लगे ठुमके




मड़ई मेले का आयोजन कितने व्यापक स्तर पर हुआ था इस बात को समझने के लिए सिर्फ इतना ही काफी है की इस मेले को देखने के लिए आसपास के कई गांवों के ग्रामवासी बड़ी भारी संख्या में मेले में पहुंचे थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार लोगों का आकर्षण खींचने के लिए मेले में तरह-तरह की दुकान स्टॉल झूले और खाने-पीने की दुकानों की भरपूर व्यवस्था की गई थी वही दिन में इनामी दंगल का भी आयोजन किया गया था ।लेकिन मेले का मुख्य आकर्षण अभी बांकी था। जैसे-जैसे शाम बीती लोगों का इंतजार खत्म होना शुरू हुआ और आयोजन समिति द्वारा विशेष रूप से छत्तीसगढ़ से बुलाई गई नाचने वालियों के कार्यक्रम का आयोजन शुरू हुआ। इस आयोजन के जरिए बकायदा छोटे छोटे कपड़े पहन के नचनियों द्वारा जमकर ठुमके लगाए गए। और एक से बढ़कर एक गानों की धुन के ऊपर लड़कियों के ठुमकों को देखते हुए गांव वाले भी गदगद हो उठे। इस दौरान गांव के जिम्मेदार प्रधान याने सरपंच और सचिव जैसे लोग भी देर रात तक आयोजन का लुफ्त उठाते रहे। लेकिन किसी को भी कोरोना संक्रमण का ख्याल नहीं आया।


*सीएम हेल्पलाइन से* *शिकायत हटवाने* *सीएमओ की धमकी* *कहा- 24 घंटे के अंदर हटा लो शिकायत* *वरना करवा दूंगा-FIR*


क्या बिना अनुमति के हो सकता है इतना बड़ा आयोजन..??


छपारा के मड़वा गांव में हुए मड़ई मेले के आयोजन को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का माहौल गर्म हो चुका है। बताया तो यहां तक भी जा रहा है कि इस आयोजन के लिए किसी भी प्रशासनिक अधिकारी से कोई भी अनुमति नहीं ली गई थी। नाही जिम्मेदारों को इस आयोजन के विषय में कोई जानकारी थी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि यदि गांव के सरपंच और सचिव की मौजूदगी में इतना बड़ा आयोजन होता है तो फिर ऐसा कैसे हो सकता है कि आला अधिकारियों को इस आयोजन की भनक ही ना हो। यह आयोजन ना तो चारदीवारी के अंदर किया गया कोई गुपचुप आयोजन था और ना ही कोई शादी का समारोह जिसके चलते प्रशासनिक अधिकारियों की सहानभूति परिजनों को मिल सके। बल्कि इस आयोजन को डंके की चोट पर हजारों लोगों को आमंत्रित करते हुए आयोजित किया गया था और यदि किसी आयोजन में दूसरे राज्यों से नाचने वालों को बुलवाया जा रहा हो,तो उस आयोजन की भव्यता का अंदाजा आप खुद ही लगा सकते हैं।


*चुनावी घोषणा पर खुले..* *51 सरकारी कॉलेजों को..* *बंद कर रही..* *शिवराज सरकार..* *यहां जानिए आखिर क्या है ...राज़..*


कब टूटेगी जिम्मेदारों की नींद..??
क्या मड़ई आयोजकों के ऊपर होगी कार्यवाही..??


मेला भी हो गया और लोगों ने उत्साह भी मना लिया लेकिन यह मेला अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया है। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि गांव में होने वाले इतने बड़े आयोजन की भनक जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों नहीं लगी । क्या..? सिर्फ बाजारों में और चौराहों में चालान काट कर औपचारिकता निभाने से कोरोना भाग जाएगा। क्या..? जिम्मेदारों की यह जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह ऐसे आयोजनों पर लगाम लगा सके। बहरहाल कोरोना गाइडलाइन का जिम्मेदारी से पालन करवाना ना केवल एक प्रशासनिक बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है और ऐसे में इन अधिकारियों की उदासीनता कहीं किसी बड़े संक्रमण को बढ़ावा ना दे बैठे अब देखना यह होगा कि जिम्मेदारों की नींद टूटती है या फिर इस घटना को ठंडे बस्ते में डालते हुए मामले को शांत कर दिया जाएगा।


*तो क्या..बंद हो जाएंगे टोल प्लाजा* *जानिए क्या है..??* *केंद्र सरकार का एलान..*


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विकास की कलम
चीफ एडिटर
विकास सोनी
लेखक विचारक पत्रकार






 

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